असम के कार्बी आंगलोंग जिले में स्थित बोकाजान, अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित एक विधानसभा क्षेत्र है और दीफू लोकसभा सीट के छह हिस्सों में से एक है. इस सीट को पहले 'स्वायत्त जिला संसदीय क्षेत्र' के नाम से जाना जाता था. बोकाजान एक ऐसा कस्बा है जो अपनी सीमेंट फैक्टरी के लिए मशहूर है, और यह फैक्टरी यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा का काम
करती है. बोकाजान विधानसभा क्षेत्र में बोकाजान नगर पालिका बोर्ड, बोकाजान और निलिप विकास खंड, और साथ ही चौकीहोला और देइथोर नगर समितियां शामिल हैं. इस क्षेत्र में कस्बाई इलाका और आस-पास के गांव, दोनों का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है. इस वजह से इसका चरित्र कुछ-कुछ शहरी, लेकिन ज्यादातर ग्रामीण है. पूरे कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में फैले इस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 200-300 गांव आते हैं. यह क्षेत्र आज भी काफी हद तक ग्रामीण ही बना हुआ है, जहां शहरी मतदाताओं का अनुपात लगभग 11.75 प्रतिशत है, जबकि गांव-आधारित मतदाताओं का अनुपात 88.25 प्रतिशत है. इस क्षेत्र में मुख्य रूप से कार्बी आदिवासी समुदाय, अन्य मूल निवासी समूह, और उद्योग व कृषि से जुड़े कुछ गैर-आदिवासी लोग रहते हैं.
वर्ष 1967 में स्थापित बोकाजान ने अब तक कुल 12 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. कांग्रेस पार्टी ने सबसे ज़्यादा, यानी पांच बार इस सीट पर जीत हासिल की है. वहीं, एक स्थानीय मार्क्सवादी संगठन 'स्वायत्त राज्य मांग समिति' (ASDC) ने वर्ष 1991 से 2006 के बीच लगातार चार बार जीत दर्ज की थी. जनता पार्टी ने वर्ष 1978 में एक बार इस सीट पर कब्जा जमाया था, और भाजपा ने पिछले दो चुनावों में लगातार दो बार जीत हासिल की है.
वर्ष 2011 में कांग्रेस पार्टी के क्लेन्गडून एंगती ने बोकाजान सीट पर जीत हासिल की थी. उन्होंने उस समय के मौजूदा ASDC विधायक जगत सिंह एंगती को 16,808 वोटों के अंतर से हराया था; जगत सिंह एंगती ने इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था. भाजपा, जो वर्ष 2011 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रही थी, ने इस बार जबरदस्त वापसी करते हुए अपने उम्मीदवार मुमल मोमिन को मैदान में उतारा. मुमल मोमिन ने कांग्रेस के मौजूदा विधायक क्लेन्गडून एंगती को 4,744 वोटों से हराकर जीत हासिल की. वर्ष 2021 में मुमल मोमिन ने एक बार फिर इस सीट पर कब्जा जमाया, और इस बार उनकी जीत का अंतर और भी ज्यादा था. उन्होंने कांग्रेस के रतन एंगती को 17,885 वोटों से हराया.
बोकाजान विधानसभा क्षेत्र में मतदान के रुझानों से यह भी पता चलता है कि भाजपा का जनाधार धीरे-धीरे बढ़ रहा है. पार्टी ने पहले पिछड़ने के बावजूद जोरदार वापसी करते हुए संसदीय चुनावों में अपना दबदबा कायम कर लिया है. 2009 के लोकसभा चुनावों में, कांग्रेस ASDC से 13,793 वोटों से आगे थी. BJP, जो तीसरे स्थान पर रही थी, 2014 में बढ़त बनाने में कामयाब रही और तब से शीर्ष स्थान पर बनी हुई है. BJP 2014 में कांग्रेस से 3,163 वोटों से और 2019 में 19,752 वोटों से आगे थी, जो 2024 के लोकसभा चुनावों में बढ़कर 71,642 वोटों की बढ़त हो गई.
बोकाजान, कुल मिलाकर, SIR 2025 और 2023 के परिसीमन से अप्रभावित रहा है, क्योंकि इसका मतदाता आधार लगातार बढ़ा है. 2026 के चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची में इसके 157,241 पात्र मतदाता थे, जो 2024 में 150,200 मतदाताओं से अधिक थे. इससे पहले, यह संख्या 2021 में 149,929, 2019 में 140,447, 2016 में 129,427 और 2011 में 131,747 थी. अनुसूचित जनजातियां 46.44 प्रतिशत मतदाताओं के साथ सबसे प्रभावशाली समूह थीं, जबकि इस निर्वाचन क्षेत्र में अनुसूचित जातियों और मुस्लिम मतदाताओं की उपस्थिति बहुत कम थी. मतदान प्रतिशत स्थिर और उच्च बना रहा, जो 2011 में 74.40 प्रतिशत, 2016 में 74.60 प्रतिशत, 2019 में 79.61 प्रतिशत, 2021 में 74.70 प्रतिशत और 2024 में 75.20 प्रतिशत था.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जनसांख्यिकी यह दर्शाती है कि अनुसूचित जनजातियां सबसे बड़ा समूह बनाती हैं (व्यापक जिला संदर्भ में लगभग 46-56 प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रतिशत और भी अधिक है), जबकि अनुसूचित जातियों और मुसलमानों की संख्या बहुत कम है. इस निर्वाचन क्षेत्र में मुख्य आदिवासी समुदाय, कार्बी, और दिमासा, बोडो जैसे अन्य मूल निवासी समूहों तथा छोटी जनजातियों का मिश्रण है. साथ ही, शहरी इलाकों में उद्योग और व्यापार से जुड़े गैर-आदिवासी बसने वाले लोग भी हैं, जो मिलकर इस क्षेत्र के आदिवासी-बहुसंख्यक ग्रामीण मतदाताओं का निर्माण करते हैं.
बोकाजान निर्वाचन क्षेत्र मध्य असम के कार्बी आंगलोंग जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है. यहां पहाड़ी इलाका, ऊबड़-खाबड़ पठार और कुछ समतल घाटियां हैं, जो कार्बी पठार (मेघालय पठार का एक हिस्सा) का ही विस्तार हैं. यहां का भूभाग झूम (स्थानांतरित) खेती, घाटियों में स्थिर धान की खेती, किनारों पर चाय के बागान और वन-आधारित गतिविधियों के लिए उपयुक्त है. लेकिन यह क्षेत्र कभी-कभी भूस्खलन और पास से बहने वाली धनसिरी नदी तथा उसकी सहायक नदियों से होने वाली मौसमी बाढ़ की चपेट में आ जाता है. बोकाजान में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि (धान, बागवानी), चाय बागानों में काम, CCI की एक प्रमुख औद्योगिक इकाई, सीमेंट फैक्ट्री में रोजगार, छोटे-मोटे व्यापार और वन संसाधनों पर निर्भर है. घाटियों की उपजाऊ मिट्टी और भरपूर वर्षा इन गतिविधियों को बनाए रखने में सहायक होती है. यहां के बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से आस-पास के क्षेत्रों से सड़क संपर्क, बोकाजान स्टेशन पर रेल सुविधा और शहर में बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं. इसके अलावा, ग्रामीण सड़कों और आदिवासी कल्याण योजनाओं के क्षेत्र में भी लगातार विकास कार्य चल रहे हैं.
यहां का सबसे नजदीकी बड़ा शहर दीफू है, जो इस जिले का मुख्यालय भी है और यहां से लगभग 40-65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. आस-पास के अन्य शहरों में हैमरेन (पश्चिमी कार्बी आंगलोंग) शामिल है, जो यहां से और पश्चिम की ओर स्थित है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, यहां से लगभग 200-250 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है. इस निर्वाचन क्षेत्र की पूर्वी सीमा नागालैंड से लगती है, जहां से दीमापुर की दूरी मात्र 15 किलोमीटर है. इस निकटता का प्रभाव यहां के स्थानीय व्यापार, सीमा-पार आपसी मेलजोल और कभी-कभी होने वाले प्रवासन (migration) के तरीकों पर भी देखने को मिलता है.
पिछले दो विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने और लगातार तीन लोकसभा सीटों पर बढ़त बनाए रखने के साथ, इतिहास BJP के पक्ष में है. इसके विरोधियों के लिए चिंता की बात यह है कि हर चुनाव के साथ इसकी लोकप्रियता और स्वीकार्यता बढ़ रही है, जो इसकी जीत के बढ़ते अंतर में साफ दिखाई देता है. कांग्रेस पार्टी ने रतन एंगती पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें 2026 के चुनावों के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है. यह कदम विश्वास से ज्यादा उम्मीद के साथ उठाया गया लगता है कि वे BJP को पछाड़कर यह सीट छीन लेंगे. हालांकि चुनावों में अक्सर कुछ चौंकाने वाले नतीजे सामने आते हैं, लेकिन अगर बोकाजान में ऐसा कुछ नहीं होता है, तो 2026 के विधानसभा चुनावों में इस सीट को बरकरार रखने के लिए BJP को शायद ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.
(अजय झा)