चंडीगढ़: स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस लेंगे, प्रशासन के आदेश से हाईकोर्ट सहमत

लॉकडाउन अवधि के दौरान स्कूल की फीस के मामले में चंडीगढ़ प्रशासन के आदेशों को रोकने से उच्च न्यायालय ने इनकार कर दिया है. बता दें कि चंडीगढ़ प्रशासन ने स्कूलों से फीस में संशोधन नहीं करने को कहा था और सिर्फ ट्यूशन फीस चार्ज करने की अनुमति दी थी.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 7:25 PM IST

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को लॉकडाउन अवधि के लिए स्कूल फीस से संबंधित आदेशों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इसके बाद अब निजी स्कूल अब ट्यूशन फीस को छोड़कर किसी भी तरह की फीस की डिमांड नहीं कर पाएंगे.

चंडीगढ़ प्रशासन ने आदेश जारी करते हुए स्कूलों को स्कूल फीस में संशोधन करने और बस किराया, डेवलपमेंट फीस जैसी सेवाओं पर शुल्क लगाने के लिए प्रशासन की सहमति के बिना रोक दिया था. हाईकोर्ट ने ये आदेश निजी स्कूलों के एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.

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इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन (ISA) ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके चंडीगढ़ प्रशासन के आदेशों को चुनौती दी थी. संघ ने प्रशासन के आदेशों को चुनौती देते हुए, अदालत को सूचित किया था कि 78 प्राथमिक स्कूल सदस्य हैं जो स्कूल बंद होने के साथ-साथ घाटे का सामना कर रहे थे और उन्हें पूर्ण विद्यालय शुल्क लेने से रोक दिया गया था.

चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत के समक्ष अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा कि स्कूलों को फीस को संशोधित करने से रोक दिया गया था और केवल लॉकडाउन अवधि के लिए अभिभावकों को ये राहत देने के लिए ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी गई थी.

चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत को यह भी बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में चलाए जा रहे सरकारी स्कूल पहले ही अपने स्कूल की फीस माफ कर चुके हैं. यहां यह उल्लेखनीय है कि निजी स्कूल यह साबित करने में भी असफल रहे कि वे घाटे का सामना कर रहे हैं. आईएसए ने अदालत को यह भी बताया कि स्कूल के कुल 78 सदस्यों में से 41 ने पहले ही प्रशासन के आदेशों को लागू कर दिया है.

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हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई तक के लिए टाल दी है क्योंकि याचिकाकर्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है.

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