...वो गुरुदेव जिनकी देन है 'जन-गण-मन'

ऐसे रचनाकार जिन्होंने भारत को दिया वो गान जिसे गाकर हर भारतीय करता है गर्व महसूस... जानें उनके बारे में...

Advertisement
 Rabindranath tagore Rabindranath tagore

वंदना भारती

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2017,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

जन-गण-मन जिसे गाकर हर भारतीय गर्व महसूस करता है. आज उन्हीं का जन्मदिन है, जिन्होंने भारत देश को राष्ट्रगान दिया है. दुनियाभर में भारत का नाम रोशन करने वाले गुरु रवीद्रनाथ टैगोर का जन्म साल 1861 को 7 मई को हुआ था.

उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ बातें

1. उनका जन्म कलकत्ता केजोड़ासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था.

Advertisement

2. रविद्रनाथ टैगोर को दुनिया गुरुदेव के नाम भी जाना जाता है.

3. उनकी पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल में हुई.उनके पिता देवेन्द्रनाथ ठाकुर एक जाने-माने समाज सुधारक थे. वे चाहते थे कि रवीन्द्रनाथ बडे होकर बैरिस्टर बनें.


4. उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की लेकिन साल 1880 में बिना डिग्री लिए वापस आ गए.

5. साल 1883 में उनकी शादी मृणालिनी देवी के साथ फिक्स हुआ है.

6. बचपन से ही उनका रुझान कविता, छन्द और कहानियां लिखने में था. उन्होंने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी.

7. 1877 में वह 16 साल के थे जब उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई.

8. ये कहना गलत नहीं होगा कि एक बांग्ला कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार थे.


9. गुरुदेव रवीन्द्रनाथ की सबसे लोकप्रिय रचना 'गीतांजलि' रही जिसके लिए 1913 में उन्हें नोबेल अवार्ड से सम्मानित किया गया.

Advertisement

10. वह पहले ऐसे लेखक है जिनकी लिखी गई रचना दो देशों का राष्ट्रगान बनी.जिसमें भारत का जन-गण-मन और बांग्लादेश का राष्ट्रीयगाना 'आमार सोनार बांग्ला' है.

11. काबुलीवाला, मास्टर साहब और पोस्टमास्टर उनकी ये सभी कहानियां आज भी लोकप्रिय कहानियां हैं.

12. रवीन्द्रनाथ की रचनाओं में स्वतंत्रता आंदोलन और उस समय के समाज की झलक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है.

13. टैगोर ने विश्व के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक जलियांवाला कांड (1919) की घोर निंदा की और इसके विरोध में उन्होंने ब्रिटिश प्रशासन द्वारा प्रदान की गई, 'नाइट हुड' की उपाधि लौटा दी थी. .

14. 1921 में शांति निकेतन, पश्चिम बंगाल में विश्व भारतीय यूनिवर्सिटी की नींव रखी.

रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता
- तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो तू चल अकेला
  चल अकेला, चल अकेला, चल तू अकेला

  रवीन्द्रनाथ  टैगोर की लोकप्रिय कहानियां
- तोता-कहानी

- काबुलीवाला

- अनधिकार प्रवेश

रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल वचन
- प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है.

- हर एक कठिनाई जिससे आप मुंह मोड़ लेते हैं, एक भूत बन कर आपकी नीद में बाधा डालेगी.

-  कला में व्यक्ति खुद को उजागर करता है कलाकृति को नहीं.

-  जब मैं खुद पर हंसता हूं तो मेरे ऊपर से मेरा बोझ कम हो जाता है.

Advertisement

 - मिट्टी के बंधन से मुक्ति पेड़ के लिए आज़ादी नहीं है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »