हाई कोर्ट: नजीब अहमद केस में पुलिस करा सकती है पॉलीग्राफ टेस्ट

जेएनयू छात्र नजीब अहमद के लापता हुए चार महीने बीत चुके हैं लेकिन उसका अभी तक कोई अता-पता नहीं है. इस केस में अब हाई कोर्ट ने कहा है कि पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट करा सकती है.

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नजीब अहमद केस में पुलिस करा सकती है पॉलीग्राफ टेस्ट नजीब अहमद केस में पुलिस करा सकती है पॉलीग्राफ टेस्ट

पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 12:25 AM IST

लापता होने के चार माह बीतने के बाद भी जेएनयू छात्र नजीब अहमद का पुलिस को कोई सुराग न मिल पाने पर हाई कोर्ट ने हैरानी जाहिर की है. जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद के मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अगर जांच में पुलिस को कुछ खास नहीं मिल पा रहा है तो वो पॉलीग्राफ टेस्ट करा सकती है. मामला गंभीर है इसलिए हर उस शख्स को खंगाला जाए जो मामले पर रोशनी डाल सकता है.

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कोर्ट ने कहा कि नजीब अक्टूबर में गायब हुआ था और लगभग चार महीने से ऊपर होने के बाद भी दिल्ली पुलिस को कुछ खास हाथ नही लगा है.


नजीब 15 अक्टूबर 2016 में लापता हुआ था. चार महीने बीतने के बाद भी मामले में पुलिस के हाथ खाली है. हाइकोर्ट मामले में संदिग्ध 9 छात्रों में से एक की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. छात्र ने दिल्ली पुलिस के उसे पॉलीग्राफी टेस्ट के लिए किए गए नोटिस को चुनौती देने के अलावा हाई कोर्ट को अपने 14 दिसंबर और 22 दिसंबर के आदेश पर पुर्नविचार करने का आग्रह किया है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि हाई कोर्ट के ये दोनों आदेश मामले की जांच को नियंत्रित कर रहे है, जो उनके अधिकारों के खिलाफ है.


सुनवाई के दौरान पुलिस के वकील ने याचिका का विरोध किया. उन्होंने कहा कि याचिका ने इससे पहले भी इस मुद्दे पर याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट 23 जनवरी को रद्द कर चुकी है. दोबारा याचिका दायर कर उसने कानून का दुरुपयोग किया है. याचिकाकर्ता छात्र है और उसे एक छात्र की तरह की व्यवहार करना चाहिए वो कानून से ऊपर नहीं है. छात्र को पॉलीग्राफी टेस्ट के मद्देनजर 10 फरवरी को ही निचली अदालत में पेश होना है लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उसे पुलिस के भेजे नोटिस की भाषा पर आपत्ति है.

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कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप अतिसंवेदनशील न बनें और संभावना न जताए. आप निचली अदालत में जाए, वहां पॉलीग्राफी के लिए हां या नहीं जो उचित समझे अपना जवाब दें. इसके बाद भी कानून में आपके पास रास्ते खुलें हैं और आप हाई कोर्ट आ सकते हैं. कोर्ट ने साफ किया कि वो मामले की जांच को नियंत्रित नहीं कर रहें वह केवल जांच में अपने सुझाव दें रहें हैं. मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी.

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