CBSE पेपर लीक मामले में ताबड़तोड़ छापेमारी, एक पेपर के 10 से 15 हजार तक लेते थे आरोपी

दिल्ली पुलिस ने कहा, "क्षेत्रीय निदेशक सीबीएसई की शिकायत पर, भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है और इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 11:16 AM IST

CBSE बोर्ड के इकोनॉमिक्स और मैथ्स के पेपर लीक मामले में दिल्ली-एनसीआर में ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले के गुनहगारों के खिलाफ कमर कस ली है. पेपर लीक हो जाने के कुछ घंटे के अंदर ही क्राइम ब्रांच ने दिल्ली-एनसीआर में 10 स्थानों पर छापेमारी की. सूत्रों ने अनुसार क्राइम ब्रांच की जांच इस बात पर केंद्रित  है कि पेपर कैसे लीक हुए. क्राइम ब्रांच पेपर लीक मामले की जांच कई बिंदुओं पर केंद्रीत होकर कर रही है.

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1. क्या सीबीएसई मुख्यालय से लीक हुआ है पेपर? हालांकि, इसे लेकर अधिकारियों का कहना है कि ऐसा नामुमकिन सा लगता है

2. पेपर लीक परीक्षा केंद्र, सतर्कता दस्ता और स्कूल स्टाफ के जरिए हो सकता है.

3. सीबीएसई के स्टाफ के साथ मिले हुए ट्यूटोरियल और कोचिंग केंद्रों द्वारा भी पेपर लीक हो सकता है.

बता दें कि क्राइम ब्रांच प्रश्नपत्र लीक मामले के सिलसिले में कई लोगों पर सवाल उठा रहा है, जिसके लिए जांच शुरू कर दी गई है. दिल्ली पुलिस ने सीबीएसई कक्षा की 10वीं और 12वीं के प्रश्नपत्र लीक के सिलसिले में दो मामले दर्ज किए हैं. सूत्रों के मुताबिक जांच में ये बात सामने आई है कि एक पेपर के लिए आरोपी 10 से 15 हजार रुपये तक लेते थे.

दिल्ली पुलिस ने कहा, "क्षेत्रीय निदेशक सीबीएसई की शिकायत पर, भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है और इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है.

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CBSE बोर्ड के पेपर लीक हो जाने की वजह से देशभर के 19 लाख बच्चों पर असर पड़ा है. बता दें, इस साल बोर्ड की परीक्षा के लिए में करीब 2,824,696 बच्चे शामिल हुए थे. एक हफ्ते में इन दो पेपर्स की नई तारीख तय की जाएगी. बच्चों के ऊपर अब दोबारा परीक्षा का दबाव आ गया है.

छात्र गुस्से में...

बता दें कि बोर्ड का पेपर व्हाट्सएप्प पर लीक हुआ था. पेपर लीक हो जाने के बाद छात्र और उनके माता-पिता तनाव में हैं. छात्र इस बात से डरे हुए हैं कि दोबारा होने वाली परीक्षा का प्रश्नपत्र कितना मुश्किल होगा. क्या वह उस जोश के साथ परीक्षा दे पाएंगे जैसे अभी दी है. वहीं कई छात्र पेपर लीक हो जाने की वजह से गुस्से में है. उनका कहना है कि सीबीएसई की गलती का खामियाजा हम क्यों भुगतें.

इसी के साथ केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि सीबीएसई ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. साथ ही बोर्ड अब परीक्षा के आयोजन में नया पैटर्न अपनाने की तैयारी कर रहा है. बता दें कि 12वीं इकनॉमिक्स की परीक्षा 27 मार्च और 10वीं गणित की परीक्षा 28 मार्च को हुई थी, जिसके बाद पेपर लीक होने की खबर सामने आई.

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पेपर लीक की खबरों के बीच सीबीएसई ने 10वीं कक्षा की गणित और 12वीं कक्षा की अर्थशास्त्र की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है. सीबीएसई ने बताया है कि परीक्षा की तारीख की घोषणा एक सप्ताह के भीतर वेबसाइट पर कर दी जाएगी.

अब ऐसे होगी परीक्षा

पूरे प्रकरण पर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि सीबीएसई पेपर लीक रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, 'इलेक्ट्रॉनिकली कोडेड पेपर एग्जामिनेशन सेंटर्स को भेजा जाएगा. वहीं परीक्षा से आधा घंटे पहले सेंटर्स को इलेक्ट्रॉनिक पेपर भेजा जाएगा. सीबीएसई का पेपर पासवर्ड प्रूफ होगा. सेंटर पर ही प्रिंट आउट निकालकर छात्रों को एग्जाम पेपर बांटा जाएगा.'

अकाउंट्स के पेपर लीक की भी आई थी खबर

इकोनॉमिक्स के पेपर से पहले अकाउंट्स के पेपर लीक होने की खबरें आई थीं, जिसके बाद सीबीएसई ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा था कि पेपर लीक की खबर गलत है. साथ ही बोर्ड ने एफआईआर करवाने का फैसला भी लिया था. गौरतलब है कि सीबीएसई 5 मार्च से बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन कर रहा है और इस बार परीक्षा में लाखों उम्मीदवार भाग ले रहे हैं.

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