अन्नपूर्णा महाराणा: 180 किलोमीटर पैदल मार्च कर छेड़ी थी आजादी की जंग

आज स्वतंत्रता सेनानी अन्नपूर्णा महाराणा का जन्मदिन है, जिन्होंने आजादी से पहले महात्मा गांधी और अन्य क्रांतिकारियों से साथ स्वतंत्रता संग्राम में साथ दिया था. उनका जन्म 3 नवंबर 1917 को हुआ था और वो बचपन से ही स्वतंत्रता आंदोलन में जुड़ गई थीं.

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अन्नपूर्णा महाराणा अन्नपूर्णा महाराणा

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 9:40 AM IST

आज स्वतंत्रता सेनानी अन्नपूर्णा महाराणा का जन्मदिन है, जिन्होंने आजादी से पहले महात्मा गांधी और अन्य क्रांतिकारियों से साथ स्वतंत्रता संग्राम में साथ दिया था. उनका जन्म 3 नवंबर 1917 को हुआ था और वो बचपन से ही स्वतंत्रता आंदोलन में जुड़ गई थीं. उन्होंने 14 साल की उम्र में पहली बार आजादी की लड़ाई में भाग लिया था.

साल 1934 में महाराणा ने महात्मा गांधी की हरिजन पद यात्रा में पुरी से भद्रक तक पैदल मार्च किया था. ओडिशा में आंदोलन को आगे बढ़ाने वाली महाराणा स्वतंत्रता के साथ महिलाओं के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाती थी. इस दौरान उन्हें जेल में भी जाना पड़ा और 1942 से 1944 तक ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ओडिशा के कटक जेल में बंद कर दिया था.

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आजादी के बाद उन्होंने ओडिशा के राजगढ़ जिले में आदिवासी बच्चों के लिए एक स्कूल खोला. साथ ही उन्होंने चंबल घाटी के डकैतों का पुन: स्थापित करने के लिए भी काम किया था. साल 1950 में उन्होंने विनोबा भावे की ओर से शुरू किए गए भूदान आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी.

उन्होंने रमा देवी और गोपांधु चौधरी के परिवार में जन्म लिया था और उनके माता-पिता भी यूके से भारतीय स्वंतत्रता संग्राम में सक्रिय रहते थे. उनका 31 दिसंबर 2012 में निधन हो गया था. 

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