इंडिया टुडे वुमन समिट एंड अवार्ड्स में राजस्थान की आठ महिला चैंपियन्स शामिल हुईं. ये वो महिलाएं हैं, जिन्होंने कुरीतियों, गरीबी आदि से लड़कर समाज में अपने लिए एक अलग जगह बनाई है. उन्होंने कार्यक्रम के सेशन 'स्विमिंग अगेंस्ट द टाइड: फ्लोटिंग टू द टॉप ऐ' चैंपियन वुमन फ्रॉम राजस्थान इन कन्वरसेशन' में अपनी बात रखी.
आशा झाझड़िया (पर्वतारोही): 39 वर्षीय आशा झांझड़िया राजस्थान के झुंझुनू जिले की रहने वाली हैं और उनकी शादी 1998 में हरियाणा पुलिसकर्मी अजय से हुई. आशा दो बच्चों की मां होने के साथ ही स्टाफ नर्स भी है लेकिन उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह कर दिखाया.
उन्होंने कहा, 'मैं राजस्थान की बेटी हूं, जिस राज्य बेटियों को बोझ माना जाता था. मेरी शादी भी एक ऐसे स्टेट में हुई हरियाणा में जहां बेटियों को बोझ माना जाता था. मैंने साबित करके दिखाया कि बेटी होकर भी मैंने अपने पिता का नाम रोशन किया. मुझे महसूस कराया जाता था कि समाज में मेरा कोई अस्तित्व ही नहीं है. मुझे अपने को साबित करने के लिए 40 साल लग गए.'
बता दें कि पर्वतारोहण के दौरान भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा और उन्हें कई शव पार करके आगे बढ़ना पड़ा.
मंजू देवी (पहली महिला कुली): राजस्थान की पहली महिला कुली की कहानी बहुत ही अलग है. उन्होंने अपने महिला कुली बनने की कहानी सुनाई. मंजू देवी ने इंडिया टुडे के मंच से कहा, 'हमारे साथ ऐसी परेशानियां आईं कि किसी के सामने नहीं आई होंगी. रहने को घर नहीं, खाने को खाना नहीं, बच्चों को पढ़ाने के लिए फीस नहीं. लेकिन मैंने सोचा, लेडीज कौन सा काम नहीं कर सकतीं, अगर हिम्मत हो तो लेडीज हर काम कर सकती हैं.'
सरोज चौधरी (वैज्ञानिक, कृषि ज्ञान केंद्र)- सरोज बिना स्कूल गए ही सब कुछ सीख गई. उन्होंने बताया, मेरे माता-पिता किसान थे और अशिक्षित थे. हम पांच भाई बहन थे. मेरे घर वालों ने मेरा बहुत साथ दिया.'
सरोज को भाइयों को स्कूल छोड़कर आना पड़ता था और घर पर उनका ध्यान रखना पड़ता था.
सरोज ने बताया, 'मुझे भाइयों को स्कूल छोड़कर बकरियां चरानी पड़ती थी. मुझे पढ़ना- लिखना कुछ नहीं आता था लेकिन स्कूल के बाहर खड़े होकर मैं भी सीख गई. एक दिन ऐसा हुआ कि बच्चे काउंटिंग बोल रहे थे, एक दिन एक बच्चा अटक गया, जहां पर वह बच्चा रुका, मैंने वहीं से बोलना शुरू कर दिया. टीचर्स ने मेरे पैरेंट्स को मोटिवेट किया और फिर तभी मेरी जिंदगी में नई रोशनी आई. उसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई की और घर के काम के साथ साथ अपने सपनों को पूरा किया.
कियारा (मॉडल)- एक छोटे से शहर से आने वाली मॉडल कियारा ने भी अपने संघर्ष की कहानी सुनाई. उन्होंने बताया, 'मैं 14 साल की उम्र से मॉडलिंग के बारे में सोचने लगी थी. लेकिन परिवार के लोगों से शुरुआत में विरोध का सामना करना पड़ा. उन्होंने बताया कि आज भी उनके परिवार के कुछ लोग उनसे बात नहीं करते हैं लेकिन आज उनके माता-पिता दुनिया में सबसे ज्यदा खुश पैरेंट्स हैं. मैंने लैक्मे फैशन वीक में 18 साल की उम्र में हिस्सा लिया था.'
शालिनी पाठक (इंस्पेक्टर, राजस्थान पुलिस)- राजस्थान पुलिस में इंस्पेक्टर शालिनी पाठक ने अपनी जर्नी के बारे में बात की. उन्होंने बताया, 'मैं राजस्थान की पहली कबड्डी इंटरनैशनल प्लेयर हूं. जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में हमने सिल्वर मेडल हासिल किया. उन्होंने कहा कि मेरी सारी पहचान INDIA है, हम जो भी मेहनत करते हैं, इसीलिए करते हैं कि इंडिया के लिए खेल सकें.
उन्होंने बताया, मैंने एक ऐसे गेम को चुना था जिसे पुरुषों का गेम माना जाता है. कोई भी पैरेंट्स नहीं चाहेंगे कि उनकी लड़की एक ऐसा खेल खेले, जिसमें खून बहता हो. यह एक ऐसा खेल है जिसमें पसीने के साथ खून बहता है. लेकिन फिर मेरे पैरेंट्स ने सपोर्ट किया और मैं यहां तक पहुंची.'
रुपा यादव (एमबीबीएस स्टूडडेंट, बीकानेर)- रूपा यादव की 8 साल में ही शादी हो गई थी और उन्हें कॉलेज जाने तक काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उन्होंने इंडिया टुडे के मंच से बताया कि जब उनकी शादी हो रही थी तो वह तीसरी क्लास में थी.
रूपा ने बताया, वह इस बात को लेकर खुश थी कि नई-नई चीजें आ रही हैं, बच्चों में जैसे किसी कार्यक्रम को लेकर खुशी होती है, वैसी ही खुशी हो रही थी. कुछ साल बाद मैं ससुराल आ गई. मेरे ससुराल वाले लोग भी पढ़े-लिखे नहीं थे. मैंने उनसे बात की तो 11वीं कक्षा में एडमिशन करा दिया गया. वहां जाकर पहली बार मैंने नीट का नाम सुना था. मेरा सपना डॉक्टर बनने का था. मैं खेत में काम भी करती थी और घर में पढ़ाई भी करती थी. बीकानेर में जब मेरा एमबीबीएस में एडमिशन हुआ तो मुझे बहुत खुशी हुई.
शबाना डागर (आर्कविस्ट)- शबाना एक प्रसिद्ध फैमिली से आती हैं, जो शास्त्रीय संगीत से जुड़ी हैं. उन्होंने बताया, ' मैं ऐसे परिवार से
आती हूं, जिसकी 20 पीढ़ी शास्त्रीय संगीत से हैं, हालांकि लड़कियों को गाने
की इजाजत नहीं हैं, लेकिन दुनिया की कई लडकियां शार्गिद हैं. मैं और मेरे
भाई ने इस काम को करने का फैसला किया. हम आर्ट और कल्चर और ध्रुपद के लिए
काम कर रहे हैं. उसी के चलते मैंने एक आर्काइव खिला, मुझे लगा ये बहुत जरूरी
है. पुराने जमाने में आर्काइव किसी ने नहीं किया मुझे लगता है कि हमारी
नेक्स्ट जेनरेशन में पहुंचाना चाहिए. हमने बनाया जो जयपुर के रविन्द्र भवन
में है. हमने बहुत सी पुरानी चीजों को जुटाया जो अगली पीढ़ी को क्लासिक के
बारे में जानकारी देने में मदद करेगा.'
समंथा लो- सक्सेसफुल एंटरप्रेन्योर समंथा लो ने इंडिया टुडे के कार्यक्रम में
हिस्सा लिया. उन्होंने अपना करियर जयपुर में ज्वैलरी के एक्सपोर्ट के तौर
पर शुरू किया था. उसके बाद इटालियन फ्यूजन क्लब और नाइट क्लब शुरू किया और सफलता हासिल की. विदेश से भारत आकर उन्होंने बिजनेस में कामयाबी हासिल की.