आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z के लिए सफलता की परिभाषा बदल रही है. जहां पहले एक स्थिर नौकरी, बॉस का सम्मान और धीरे-धीरे कॉर्पोरेट में आगे बढ़ना ही सफलता माना जाता था, वहीं अब युवा इससे आगे सोच रहे हैं. वे काम करना चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर. जहां उन्हें स्वतंत्रता और खुद के फैसले लेने की आजादी मिले. इस बीच ‘एंटी-बॉस जेनरेशन’ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है. चलिए जानते हैं इसके बारे में.
पहले के समय में मैनेजर की कुर्सी पर बैठना बड़ी सफलता मानी जाती थी. लेकिन हाल के समय में वर्क कल्चर पूरी तरह बदल गया है. अगर ऑफिस का कल्चर अच्छा नहीं है तो, Gen Z को इस्तीफा देने में बिल्कुल समय नहीं लगाता. यह पीढ़ी ऐसे माहौल में बेहतर प्रदर्शन करती है, जहां उन्हें सोचने, प्रयोग करने और अपने तरीके से काम मैनेज करने की छूट मिले.
फोर्ब्स की रिपोर्ट बताती है कि 84% Gen Z भविष्य में अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं. AXA के सर्वे में करीब 60% युवा 30 साल की उम्र तक बिजनेस शुरू करने की इच्छा रखते हैं. बैंक बाजार के अनुसार, 85.5% भारतीय युवा उद्यमिता की ओर बढ़ना चाहते हैं, जबकि 36% इसे जीवन का मुख्य लक्ष्य मानते हैं.
इसके अलावा सैमसंग और Morning Consult की रिपोर्ट बताती है कि 16-25 साल के करीब 50% युवा अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं. Intuit की साइड हसल रिपोर्ट के अनुसार, 49% Gen Z खुद मालिक बनना चाहते हैं और 66% लोग साइड हसल शुरू कर चुके हैं या करने की योजना बना रहे हैं.
Gen Z एक ऐसी जनरेशन है जिसे हर सूचना आसानी से मिल जाती है. ऐसे में उनके लिए पद बहुत ज्यादा मायने नहीं रखते हैं, जितना सम्मान रखती है. वे ट्रेडिशनल टॉप-डाउन मॉडल को नकार रहे हैं. उन्हें कोलेबोरेटिव माहौल पसंद है, जहां उनकी राय सुनी जाए.
पहले के दौर में काम के लिए लोग अपनी पर्सनल लाइफ कुर्बान कर देते थे, लेकिन युवा पीढ़ी सेल्फ केयर पर ज्यादा फोकस करती है. वे ऑफिस आवर्स खत्म होने के बाद ऑफिस के ईमेल या किसी भी काम का जवाब देने के सख्त खिलाफ हैं.
Gen Z को हर छोटी-छोटी बातों पर टोकना बिल्कुल पसंद नहीं है. इस पीढ़ी के युवा ऐसे मैनेजर चाहते हैं जो मेंटर की तरह काम करें, न कि डिक्टेटर की तरह.