देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है. लेकिन कई बार सफलता की कहानी केवल परीक्षा पास करने तक नहीं रहती है. ऐसी ही कहानी है काजल राजू की. केरल के छोटे से शहर से आने वाली काजल जन्म से ही शारीरिक चुनौती से लड़ रही हैं लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी इस कमी को अपनी सफलता के बीच नहीं आने दी. पहली बार में ही सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद भी वह मेहनत से कभी पीछे नहीं हटी. वह लगातार उस रैंक के लिए मेहनत करती रहीं जिसका सपना उन्होंने देखा था.
शारीरिक चुनौती नहीं बनी रुकावट की वजह
केरल के कासरगोड जिले के निलेश्वर से आने वाली काजल जन्म से ही एक दुर्लभ बीमारी फोकोमेलिया सिंड्रोम से जूझ रही हैं जिसकी वजह से उनकी दाहिनी बांह का अग्र भाग विकसित नहीं हो पाया. कई परेशानियों का सामना करने के बाद भी उन्होंने कभी अपने आत्मविश्वास को टूटने नहीं दिया. काजल का मानना था कि व्यक्ति की सफलता उसकी मेहनत और सोच से आती है, न कि उसकी शारीरिक अंगों से.
कब से शुरू हुआ सिविल सेवा का सपना?
काजल ने अपनी हायर एजुकेशन देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मद्रास से की. यहां पर उन्होंने डेवलपमेंट स्टडीज में इंटीग्रेटेड मास्टर डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का सपना आकार लेने लगा. देश के लिए काम करने की उनकी इच्छा ने उन्हें UPSC की तैयारी के लिए प्रेरित किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी.
हालांकि, अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली लेकिन उन्हें वो रैंक नहीं मिला जो उन्हें चाहिए था. पहले प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 910 हासिल की और उनका चयन इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (IRMS) के लिए हो गया. लेकिन उनका लक्ष्य ये नहीं भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना था. उन्होंने अपनी तैयारी यहीं पर नहीं रोकी और आगे अपनी तैयारी जारी रखी.
अगले प्रयास में नहीं मिली सफलता
पहले प्रयास के बाद काजल का सफर आसान नहीं था. दूसरे प्रयास में उनकी रैंक नीचे चली गई और एक बार तो वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) भी पास करने में असमर्थ रहीं. लगातार आ रही चुनौतियों और असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. लेकिन काजल की इस जर्नी को नौकरी ने थोड़ा मुश्किल जरूर बना दिया था. अपनी तैयारी के दौरान उन्होंने नौकरी भी की. IRMS में चयन के बाद वह रेलवे सेवा की ट्रेनिंग ले रही थीं. ट्रेनिंग और अन्य जिम्मेदारियों के बीच समय निकालना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हर कोशिश कर पढ़ाई के लिए समय निकाल ही लिया.
चौथे प्रयास में हासिल की शानदार रैंक
लगातार मेहनत के बाद उन्हें उसका फल मिला. आखिरकार चौथे प्रयास में उन्होंने वो रैंक हासिल की जो वह चाहती थीं. काजल राजू ने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 167 हासिल की. यह रैंक उनके लंबे समय से देखे गए IAS बनने के सपने के काफी करीब ले गई.
आजतक एजुकेशन डेस्क