ग्राउंड रिपोर्ट: जानिए यूपी के प्राइमरी स्‍कूलों का हाल...कहीं बंध रही गाय तो कहीं चूड़ी की दुकान

शिक्षा प्रणाली की विडंबना यह है कि प्राथमिक स्तर पर भारी कमी है. राज्य में कई स्कूल हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे काम कर रहे हैं. राज्य सरकार, हर सच्चाई से अवगत होने के बावजूद, अभी भी एक स्थायी समाधान नहीं खोज पाई है और कोरोना अवधि के पिछले एक वर्ष ने पूरी स्थिति को बदतर कर दिया है.

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यूपी के एक प्राइमरी स्‍कूल की तस्‍वीर (Photo: aajtak.in) यूपी के एक प्राइमरी स्‍कूल की तस्‍वीर (Photo: aajtak.in)

अभिषेक मिश्रा

  • लखनऊ,
  • 18 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 10:41 PM IST

यूपी के प्राथमिक विद्यालयों पर सरकार को ज्‍यादा से ज्‍यादा ध्‍यान देने की जरूरत है. यहां कई प्राइमरी स्‍कूल ऐसे हैं जहां कहीं पर परिसर में गाय बंधी है तो कहीं चूड़ी की दुकान है तो कहीं एक कमरे में दो क्‍लास चलते हैं. यहां कई स्‍कूल बिना COVID प्रोटोकॉल माने फर्श पर बच्‍चों को पढ़ा रहे हैं. इन उपेक्षित स्कूलों के नवीनीकरण के लिए मिशन कायाकल्प के विस्तार की जरूरत है. 

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सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में प्राथमिक छात्रों की संख्या सबसे अधिक है. इन बच्चों और उनके साथ पूरे राज्य का भविष्य उचित शिक्षा प्रणाली पर टिका हुआ है. योगी सरकार के 4 साल में कक्षाएं नियमित करने, यूनिफॉर्म और किताबें उपलब्ध कराने, स्कूल भवनों के नवीनीकरण और हर बच्चे को मिड डे मील प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन शिक्षा प्रणाली की विडंबना यह है कि प्राथमिक स्तर पर भारी कमी है. राज्य में कई स्कूल हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे काम कर रहे हैं. राज्य सरकार, हर सच्चाई से अवगत होने के बावजूद, अभी भी एक स्थायी समाधान नहीं खोज पाई है और कोरोना अवधि के पिछले एक वर्ष ने पूरी स्थिति को बदतर कर दिया है.

अगर हम उत्तर प्रदेश की बात करें तो 2011 की साक्षरता दर 69.72 प्रतिशत है. वहीं, केरल की साक्षरता दर 93.91 फीसदी और दिल्ली की 86.34 है. पिछली सरकार की तुलना में तस्वीर ज्यादा नहीं बदली है. उत्तर प्रदेश की खराब शिक्षा प्रणाली का कारण इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च स्तर तक और मौजूदा बुनियादी ढांचे में व्यापक स्तर पर पुनर्निर्माण मोड के तहत शिक्षकों की भारी कमी है.

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आदर्श व्यवस्था के तहत, एक शिक्षक पर चालीस से अधिक बच्चों का बोझ नहीं होना चाहिए. लेकिन सच्चाई यह है कि कई स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं. ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता की कल्पना आसानी से की जा सकती है. जब बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार कानून बनाया गया, तो यह माना गया कि साठ बच्चों को पढ़ाने के लिए कम से कम दो शिक्षक होने चाहिए. हालांकि, यदि बच्चों की संख्या 121 से 200 के बीच है, तो पांच शिक्षक बच्चों को पढ़ा सकते हैं.

यूपी के एक प्राइमरी स्‍कूल की तस्‍वीर (Photo: aajtak.in)

योगी सरकार का दावा है कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संकल्प को साबित करने के लिए, राज्य सरकार ने 1.20 लाख से अधिक सहायक अध्यापकों की भर्ती की है. वहीं परिषदीय स्कूलों में छात्रों को प्रौद्योगिकी-आधारित सीखने की सुविधा प्रदान करने के लिए राज्य में लगभग पांच हजार स्मार्ट कक्षाएं बनाई गई हैं. ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प करते हुए इन सभी को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है.

विडंबना यह है कि यूपी में प्राथमिक शिक्षा के नाम पर बहुत सारा बजट खर्च किया जाता है, लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण कई प्राथमिक स्कूल केवल भोजन आपूर्ति के लिए चलाए जा रहे हैं. इन स्कूलों के पास अपने भवन नहीं हैं. इंडिया टुडे ने प्राथमिक शिक्षा की स्थिति का फिरोजाबाद, बलिया और बाराबंकी जिलों आदि में स्‍कूलों का निरीक्षण किया. यहां देखा कि स्‍कूलों का संचालन कैसे किया जा रहा है.

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यूपी के एक प्राइमरी स्‍कूल की तस्‍वीर (Photo: aajtak.in)

यहां शिक्षक अलग से तैनात हैं लेकिन बच्चों को एक कमरे में बैठाया जाता है जो अलग-अलग स्कूलों के नाम पर आवंटित हैं. फिरोजाबाद में, प्राथमिक विद्यालय मोहल्ला देव नगर में कक्षा 1 से 5 तक का एक विद्यालय है, जिसमें न तो शौचालय है और न ही बिजली है. प्राथमिक विद्यालय, चौकी गेट, स्कूल के कमरे में गाय बंधी हुई है. कई बार शिकायत करने के बाद भी इसका हल नहीं निकला. इसी प्रकार, शीशग्रान में प्राइमरी स्कूल में, टिन शेड वाली इमारत में कक्षा 5 तक की पढ़ाई होती है, यहां चूड़ियों का एक गोदाम बन गई है, इन सभी इमारतों को सरकार द्वारा किराए पर लिया जाता है और छात्रों को पढ़ाने के लिए कोई संसाधन नहीं है.

यूपी के एक प्राइमरी स्‍कूल की तस्‍वीर (Photo: aajtak.in)

बलिया में शिक्षा के नाम पर, यह बताना मुश्किल है कि सुघर छपरा के उच्च प्राथमिक विद्यालय में किस कक्षा में पांचवीं कक्षा के छात्र हैं. यहां सब क्‍लास एक ही कमरे में चल रहे हैं. यहां प्राथमिक के बाद स्कूल को उच्च प्राथमिक विद्यालय में मिला दिया जाता है. स्कूल गंगा में डूब गया, इस कमरे में कक्षा 1 से 5 तक के छात्र और छात्राएं पढ़ते हैं.

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इस तरह की एक तस्वीर बाराबंकी के प्राथमिक विद्यालय लालाखेड़ा में भी सामने आई है जहां स्कूल के हॉल एक जर्जर इमारत में परिवर्तित हो गए हैं, फर्श टूट गया है, कमरों की नींव बिगड़ रही है और बच्चे बरामदे में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं. 40 साल के जय शंकर वर्मा प्राथमिक विद्यालय लालाखेड़ा के एक शिक्षामित्र ने कहा कि इमारत की यह स्थिति लंबे समय से है, जिसका सर्वेक्षण विभाग ने भी किया है. यहां सरकारी इंजीनियर ने कमरों का निरीक्षण भी किया था, लेकिन बाद की एक रिपोर्ट में नवीनीकरण की सूची में स्कूल शामिल नहीं था.

यूपी के एक प्राइमरी स्‍कूल की तस्‍वीर (Photo: aajtak.in)

11 वर्षीय, आलोक ने बारिश के मौसम के दौरान का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि हमारे लिए स्कूल आना मुश्किल था क्योंकि परिसर पानी और कचरा बिखरा हुआ था. अब कमरे की दीवारें टूट गई हैं और छत के प्लास्टर गिरने का खतरा है. उन्होंने यह भी कहा कि वह स्कूल आना पसंद करते हैं लेकिन शिक्षण का आनंद लेने के लिए बेहतर कक्षाएं चाहते हैं.

कक्षा 5 वीं की छात्रा 13 वर्षीय शबरी ने साझा किया कि यह हमारे लिए शर्म की बात है क‍ि स्कूल में शौचालय की दयनीय स्थिति के कारण उसे और उसके दोस्तों को मैदान में जाना पड़ा. उन्होंने कहा क‍ि हमें स्कूल जाने के लिए पूरा दिन इंतजार करना पड़ा. कई बार हम स्कूल छोड़ देते हैं क्योंकि अच्‍छा शौचालय नहीं है.

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उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों की वर्तमान स्थिति

  • यूपी में लगभग 159000 प्राथमिक शिक्षा के स्कूल हैं.
  • सरकार का दावा है कि 50000 से अधिक कायाकल्प कार्य किए गए थे
  • इसमें खिड़कियां, दरवाजे, फर्श, छत, सीमा, शौचालय और फर्नीचर शामिल हैं.
  • कायाकल्प योजना का बजट पंचायती राज विभाग से आता है.
  • शहरी स्कूलों का काम नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी है.
  • शहर के अधिकांश भवनों की हालत बजट की कमी के कारण खराब है.
  • यूपी सरकार के पिछले तीन वर्षों के बजट में समग्र शिक्षा अभियान पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए.
  • 2021-2022 के बजट में समग्र शिक्षा अभियान के लिए 18,172 करोड़ रुपये का बजट बनाया गया है.
  • मुफ्त यूनिफॉर्म के लिए 40 करोड़ रुपये, जूते-मोजे और स्वेटर के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान है.
  • कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के स्कूल बैग के लिए 110 करोड़ रुपये का प्रावधान है.

यह है सरकार का पक्ष

इंडिया टुडे से बात करते हुए योगी सरकार के यूपी बेसिक शिक्षा मंत्री, सतीश द्विवेदी ने कहा कि पिछले 50 सालों से यह व्यवस्था प्रचलित है क्योंकि पिछली सरकारों की अनदेखी के कारण 2-4 दिनों में बदलाव नहीं आएगा. मंत्री ने स्वीकार किया कि शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्कूलों की स्थिति खराब है और अब नए भवनों के लिए भूमि की तलाश की जा रही है. द्विवेदी ने कहा कि अब मामला संज्ञान में आता है, तो उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि कायाकल्प योजनाओं के तहत 33000 स्कूल वर्तमान में नवीनीकरण के काम से गुजर रहे हैं और मार्च 2022 तक हम काम खत्म करने और स्कूलों को बुनियादी और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का लक्ष्य रखते हैं.

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मौजूदा बजट में 191 करोड़ की बड़ी कटौती

पिछले साल की तुलना में, यूपी सरकार ने 2020-21 के शिक्षा बजट में 191 करोड़ की बड़ी कटौती की है. योगी सरकार ने यूपी-शिक्षा बजट 2020-21 के लिए 18,363 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. बुनियादी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, उत्तर प्रदेश के समग्र शिक्षा अभियान के लिए 18363 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, लेकिन इस बार शिक्षा क्षेत्र में बड़ी कटौती हुई है.

दूसरी ओर, अखिलेश सरकार के पिछले बजट से इसकी तुलना करें तो सर्व शिक्षा अभियान के लिए 15, 397 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. माध्यमिक शिक्षा की विभिन्न योजनाओं के लिए 9,168 करोड़ रुपये और बजट के दौरान उच्च शिक्षा योजनाओं के लिए 2,222 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. 2016-17 अखिलेश सरकार की कन्या विद्याधन योजना की संशोधित योजना के तहत कक्षा 10 वीं और 12 वीं उत्तीर्ण करने वाले मेधावी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप के वितरण के लिए 30 हजार रुपये प्रति छात्र की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए सरकार की प्रमुख योजनाओं में 300 करोड़ रुपये शामिल किया गया था.

योगी सरकार ने उठाए ये कदम

प्राथमिक शिक्षा से इतर, योगी सरकार ने राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के मद्देनजर कुल 1,151 संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के माध्यम से 88.29 हजार छात्रों को संस्कृत शिक्षा दी जा रही है. कोरोना अवधि में शैक्षिक गतिविधियों का संचालन करने के लिए योगी सरकार ने मिशन प्रेरणा के ई-पाठशाला का एक बड़ा कार्यक्रम संचालित किया है जिसमें डिजिटल और अन्य संचार के माध्यम से बच्चों को शिक्षित करने का काम किया जा रहा है.

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इसमें दूरदर्शन, व्हाट्सएप कक्षाएं और मिशन प्रेरणा यूट्यूब चैनल पर शैक्षिक कार्यक्रमों का प्रसारण शामिल है. हालांकि योगी सरकार बुनियादी और आधुनिक सुविधाओं के साथ बुनियादी शिक्षा संरचना का विस्तार करने की कोशिश कर रही है, लेकिन चार साल के शासन के बाद केवल कुछ उदाहरण ही दे पाए हैं, जिन्हें व्यवस्था में सुधार के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है.

 

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