प्राइवेट स्कूलों की फीस और उनके कथित 'हिडन चार्ज' को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने एक बेहद ऐतिहासिक और कड़क फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी प्राइवेट स्कूल अपनी फीस का ढांचा (Fee Structure) माता-पिता से छिपा नहीं सकेगा. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सभी निजी स्कूलों को अपनी पूरी फीस स्कूल के नोटिस बोर्ड के साथ-साथ अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी साफ-साभ डिस्प्ले (प्रदर्शित) करनी होगी.
स्कूल एसोसिएशन की 'स्टे' की मांग खारिज
दरअसल, निजी स्कूलों के डायरेक्टर ने बीते 1 जून को एक सर्कुलर जारी किया था. इस सर्कुलर में सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिया गया था कि वे अपनी फीस को सार्वजनिक करें और इसे नोटिस बोर्ड व वेबसाइट पर लगाएं.
सरकारी विभाग के इस फैसले के खिलाफ 'ऑल इंडिया प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एसोसिएशन' ने मद्रास हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी. स्कूल एसोसिएशन की मांग थी कि सरकार के इस सर्कुलर पर तुरंत रोक (Stay) लगाई जाए.
हाईकोर्ट ने सर्कुलर पर रोक लगाने से किया साफ इनकार
मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन को बड़ा झटका दिया और सरकार के सर्कुलर पर 'स्टे' लगाने से साफ इनकार कर दिया. कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए सरकारी आदेश को सही ठहराया और स्कूलों को अपनी फीस पूरी पारदर्शिता के साथ नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर अपलोड करने का हुक्म दिया.
पैरेंट्स के लिए क्यों बड़ा फैसला है यह?
अक्सर देखा जाता है कि एडमिशन के समय या सेशन के बीच में कई प्राइवेट स्कूल अलग-अलग मदों (जैसे डेवलपमेंट फीस, एक्टिविटी चार्ज आदि) के नाम पर पैरेंट्स से मोटी रकम वसूलते हैं, जिसकी जानकारी पहले नहीं दी जाती. कोर्ट के इस फैसले के बाद अब दाखिले से पहले ही माता-पिता को स्कूल की पूरी फीस का सटीक अंदाजा रहेगा और स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी.
अनघा