कोटा से आई कामयाबी की सबसे खूबसूरत कहानी: साथ पढ़कर, साथ खेलकर दो यार बने ऑल इंड‍िया टॉपर

जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणाम में कोटा के दो दोस्तों शुभम कुमार और कबीर छिल्लर ने क्रमशः ऑल इंडिया रैंक 1 और 2 हासिल कर देशभर में अपनी पहचान बनाई. दोनों एक ही हॉस्टल में रहते थे, साथ पढ़ते और खेलते थे. शुभम ने अपनी सफलता का श्रेय क्वालिटी स्टडी, अनुशासन और संतुलित जीवनशैली को दिया. कुल 1 लाख 87 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 56 हजार से ज्यादा सफल हुए.

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JEE Advanced 2026: रात 1 बजे आया रिजल्ट और कोटा में दो दोस्तों ने रच दिया इतिहास JEE Advanced 2026: रात 1 बजे आया रिजल्ट और कोटा में दो दोस्तों ने रच दिया इतिहास

चेतन गुर्जर

  • कोटा,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:53 AM IST

कोटा से आई यह खबर इस साल की सबसे खूबसूरत और प्रेरणादायी कहानी है. जब देश की सबसे कठिन परीक्षा का नतीजा आता है, तो अक्सर हमें सिर्फ नंबर्स और कट-ऑफ की बातें सुनाई देती हैं. लेकिन इस बार कोटा की वादियों से जो कहानी निकली है, वह सिर्फ कामयाबी की नहीं बल्कि एक सच्ची दोस्ती, अनुशासन और जिद की दास्तान है.

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आईआईटी रुड़की ने जब देर रात 1 बजे जेईई एडवांस्ड 2026 का परिणाम घोषित किया, तो कोटा में एक नया इतिहास रचा जा चुका था. यहाँ साथ रहने वाले, साथ पढ़ने वाले और शाम को साथ खेलकर तनाव दूर करने वाले दो दोस्तों ने देश की टॉप-2 रैंक पर अपना नाम लिख दिया.

बिहार के गया के रहने वाले शुभम कुमार ने 360 में से 330 अंक लाकर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) हासिल की. वहीं उनके सबसे पक्के दोस्त, गुरुग्राम के कबीर छिल्लर महज 1 नंबर से पीछे रह गए और 329 अंकों के साथ AIR-2 बने. इस त्रिकोणीय मुकाबले में तीसरा स्थान यानी AIR-3 सीकर के जतिन चाहर को मिला, जिन्होंने 319 अंक हासिल किए. इन तीनों ने ही कोटा में रहकर पढ़ाई की. 

हॉस्टल की दोस्ती से देश की टॉप रैंक तक का सफर
शुभम और कबीर की यह जुगलबंदी कोटा के एक ही हॉस्टल में परवान चढ़ी. शुभम चौथी मंजिल पर रहते थे और कबीर सातवीं मंजिल पर. दिनभर की थका देने वाली पढ़ाई के बाद दोनों का एक ही नियम था, शाम को बैडमिंटन कोर्ट पर उतरना और खेल के जरिए अपने दिमाग को बिल्कुल फ्रेश करना. आज उनकी इसी संतुलित लाइफस्टाइल और कड़े अनुशासन ने उन्हें देश के सबसे ऊंचे शिखर पर लाकर खड़ा कर दिया है. अब इन दोनों यारों का अगला सपना भी साझा है यानी आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करना.

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इस महापरीक्षा में बेटियों ने भी अपना परचम लहराया है. दिल्ली जोन की आरोही देशपांडे महिला अभ्यर्थियों में सबसे आगे रहीं. उन्होंने 280 अंक हासिल कर कॉमन रैंक लिस्ट में 77वीं रैंक अपने नाम की.

शुभम की 'क्वालिटी स्टडी' का जादुई मंत्र
शुभम कुमार पिछले दो सालों से कोटा में तपस्या कर रहे थे. इससे पहले जेईई मेन 2026 में भी उन्होंने 300 में से 295 अंक लाकर AIR-6 पाई थी. शुभम का मानना है कि सफलता इस बात से नहीं मिलती कि आप कितने घंटे कुर्सी पर बैठे हैं, बल्कि इस बात से मिलती है कि आपकी पढ़ाई कितनी फोकस्ड है.

शुभम ने कभी 16-16 घंटे की मैराथन पढ़ाई नहीं की, बल्कि रोज सिर्फ 6 घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ा. उन्होंने अपना एक बॉडी क्लॉक सेट कर लिया था, रोज रात 10:30 बजे सो जाना और सुबह 6:30 बजे बिना किसी अलार्म के खुद-ब-खुद उठ जाना. अपनी तैयारी के दौरान उन्होंने खुद को सुख-सुविधाओं से दूर रखा. वह एसी के आदी नहीं बने ताकि परीक्षा के दिन चाहे जैसा भी माहौल हो, उनका ध्यान न भटके.

खाने में भारी नाश्ते की जगह अंकुरित मूंग और फल, सोशल मीडिया और फिल्मों से मुकम्मल दूरी, और खुद को हमेशा सकारात्मक रखना ही उनकी रणनीति थी. शुभम के भीतर आत्मविश्वास इस कदर था कि वह अपनी रफ कॉपी पर पहले से ही 'JEE Advanced Topper' लिख दिया करते थे ताकि खुद को याद दिला सकें कि लक्ष्य क्या है. शुभम के पिता शिवकुमार एक व्यवसायी हैं और मां कंचन देवी गृहिणी हैं, जिन्होंने हमेशा अपने बेटे के इस सधे हुए सफर का साथ दिया.

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दोस्त की जीत पर कबीर का बड़ा दिल
कबीर छिल्लर, जिन्होंने जेईई मेन 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की थी, इस बार एडवांस्ड में दूसरे स्थान पर रहे. लेकिन उनके चेहरे पर इस बात का कोई मलाल नहीं था, बल्कि अपने दोस्त की जीत की एक अलग ही चमक थी.

कबीर कहते हैं, शुभम ने दो साल तक बहुत कड़ा संघर्ष किया है, वह इस कामयाबी का हकदार है. अगर कोई दूसरा मुझसे आगे निकलता तो शायद थोड़ा दुख होता, लेकिन मेरे दोस्त ने टॉप किया है, इससे बड़ी खुशी मेरे लिए और कुछ नहीं हो सकती.

गुरुग्राम के रहने वाले कबीर के रगों में भी इंजीनियरिंग और अनुशासन है. उनके पिता अमोल छिल्लर खुद आईआईटी खड़गपुर से पढ़े सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और मां प्रियंका एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं. कबीर ने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई उसी स्कूल से की जहां उनकी मां पढ़ाती थीं. इसके अलावा कबीर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी रह चुके हैं, जिसने उन्हें खेल भावना और दबाव से लड़ना सिखाया.

आने वाले छात्रों के लिए टॉपर्स का पैगाम
इन दोनों टॉपर्स ने देश के लाखों छात्रों को एक बेहद खूबसूरत संदेश दिया है. कबीर कहते हैं कि कभी भी खुद पर रैंक का दबाव मत बनाओ, परिणाम की चिंता करने से बेहतर है कि आप अपनी तैयारी के इस पूरे सफर का आनंद लें. वहीं शुभम की सलाह है कि चीजों को रटने की आदत छोड़ें, लॉजिक और कॉन्सेप्ट की गहराई को समझें, वही असली कुंजी है. पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, भरपूर नींद और खेल भी उतने ही जरूरी हैं.

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इस साल जेईई एडवांस्ड के दोनों पेपरों में लगभग 1 लाख 87 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी बैठे थे, जिनमें से 56 हजार 880 छात्रों ने इस कठिन बाधा को पार किया है. इसमें 10 हजार 107 महिला अभ्यर्थी भी शामिल हैं. अब ये सभी सफल छात्र 2 जून से शुरू होने वाली जोसा (JoSAA) काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों में दाखिला लेंगे. आईआईटी रुड़की के निदेशक और संयुक्त प्रवेश बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर कमल किशोर पंत ने सभी सफल छात्रों को बधाई देते हुए काउंसलिंग में हिस्सा लेने की अपील की है. साथ ही उन्होंने यह बड़ी राहत भी दी कि इस बार काउंसलिंग के लिए 12वीं के अंकों की कोई बाध्यता नहीं होगी.

कोटा को लोग अक्सर एक तनाव भरा कोचिंग हब मान लेते हैं, लेकिन शुभम और कबीर ने साबित कर दिया कि अगर आपके पास अनुशासन, सही नजरिया और एक सच्चा दोस्त हो, तो आप तनाव को मात देकर इतिहास रच सकते हैं. अंकों में भले ही एक नंबर का फासला हो, लेकिन कामयाबी के इस आसमान पर दोनों दोस्त बराबर के चमकते सितारे हैं.

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