MBA डिग्री ने बदल दी जिंदगी, 25 हजार से 1 लाख हो गई सैलरी, खुद पोस्ट कर बताया 

इस समय AI की वजह से कई बड़ी टेक कंपनियां छंटनी कर रही हैं. लेकिन इस बीच ओरेकल के पूर्व कर्मचारी प्रदीप कन्नन ने बताया है कि किस तरह MBA की डिग्री ने उनकी जिंदगी बदल दी है. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी दावा किया है कि ये कोर्स करने के बाद उनकी सैलरी 25 हजार से बढ़कर 1 लाख रुपये  हो गई है. 

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25 हजार रुपये से हो गई 1 लाख रुपये सैलरी. 25 हजार रुपये से हो गई 1 लाख रुपये सैलरी.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:55 PM IST

आजकल AI और डिजिटल का जमाना है लेकिन इस बढ़ते ट्रेंड के साथ कोर्स की वैल्यू कम होती जा रही है. अभी कुछ समय पहले भी कुछ रिपोर्ट में कहा गया था कि MBA कोर्स की वैल्यू नौकरी दिलाने में कम हो गई है लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट में कुछ और ही दावे किए जा रहे हैं. दरअसल, ओरेकल के पूर्व कर्मचारी प्रदीप कन्नन ने बताया है कि MBA कोर्स करने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई है. प्रदीप ने पोस्ट में बताया कि किस तरह MBA कोर्स ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी है. 

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पोस्ट में इन बातों का जिक्र  

प्रदीप ने पोस्ट में लिखा कि अगर वो MBA नहीं करते तो, शायद वह बिजनेस कभी शुरू नहीं कर पाते.  उन्होंने बताया कि जब साल 2010 में उन्होंने MBA करना शुरू किया था, तो उन्हें बिजनेस की कोई समझ नहीं थी. मैं दक्षिण भारत के एक टियर-3 शहर से आता हूं. MBA मेरे लिए पहली बार बिजनेस समझने का मौका था और पता करने का कि ये किस तरह काम करता है. कोर्स ने मुझे ऐसी मजबूत नींव दी, जो मुझे कहीं और नहीं मिल सकती थी. 

25 हजार से 1 लाख हो गई सैलरी 

प्रदीप ने आगे कहा कि MBA करने के बाद मेरी सैलरी 25 हजार रुपये महीने से 1 लाख रुपये महीने हो गई. आज 2026 में जहां हर कुछ ऑनलाइन है, हर कुछ AI से सीखी जा सकती है. लेकिन साल 2010 में ऐसी सुविधाएं नहीं थीं. कई लोगों के लिए MBA एक डिग्री हो सकती है लेकिन इसने मेरे लिए पूरी दिशा बदल दी है. 

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सोशल मीडिया पर लोग दे रहे हैं प्रतिक्रिया 

प्रदीप की इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर देखने के बाद लोगों के बीच बहस छिड़ गई है. कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि आज के समय में बिजनेस के लिए डिग्री से ज्यादा व्यावहारिक अनुभव जरूरी होता है. इस दौरान एक यूजर ने लिखा कि MBA का बिजनेस और उद्यमिता पर निगेटिव असर पड़ता है. कुछ सालों में कंपनियों को एहसास होगा कि इसकी उतनी जरूरत नहीं है. 

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