103 साल पहले शुरू हुआ था First World War, जब दुनिया पर नाची थी मौत

आज से 103 साल पहले ऐसी जंग हुई जिसने ना केवल लाखों लाशें गिराई बल्कि दुनिया का नक्शा हुलिया और इतिहास सब कुछ बदलकर रख दिया.

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प्रतिकात्मक तस्वीर प्रतिकात्मक तस्वीर

वंदना भारती

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  • 28 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 4:16 PM IST

धरती के सीने को चीर कर रख देने वाला वो युद्ध आज ही के दिन शुरू हुआ था,जिसे दुनिया प्रथम विश्व युद्ध (WORLD WAR 1) के नाम से जानती हैं. 28 जुलाई 1914 से 1919 तक चले इस वर्ल्ड वॉर 1 को पूरे 103 साल हो चुके हैं. जब पूरी दुनिया में मौत नाची थी.

जानतें हैं उस दिलदहलाने वाले युद्ध के बारे में

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1. 1914 से 1919 के मध्य यूरोप, एशिया और अफ्रीका तीन महाद्वीपों के जल, थल और आकाश में प्रथम विश्‍व युद्ध लड़ा गया.

2. प्रथम विश्वयुद्ध लगभग 52 महीने तक चला और उस समय की पीढ़ी के लिए यह जीवन की दृष्टि बदल देने वाला अनुभव था. करीब आधी दुनिया हिंसा की चपेट में चली गई और इस दौरान अनुमानतः एक करोड़ लोगों की जान गई और इससे दोगुने घायल हो गए.

3. प्रथम विश्व युद्ध को THE GREAT WAR के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा इसलिए कहा जाता है कि इस तरह के युद्ध की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.

4. यह महायुद्ध यूरोप, एशिया व अफ़्रीका तीन महाद्वीपों और समुंदर, धरती और आकाश में लड़ा गया था.

5. इस युद्ध में 37 देशों ने प्रथम विश्‍वयुद्ध में भाग लिया.

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6. युद्ध का तात्का‍लिक कारण ऑस्ट्रिया के राजकुमार फर्डिंनेंड की हत्या था.

7. जून 1914 में, ऑस्ट्रिया के राजकुमार फर्डिनेंड हत्या कर दी गई जिसके बाद 28 जुलाई को सर्बिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी गयी. 

8. जब यह युद्ध आरम्‍भ हुआ था उस समय भारत औपनिवेशिक शासन के अधीन था.  यह भारतीय सिपाही सम्‍पूर्ण विश्‍व में अलग-अलग लड़ाईयों में लड़े.

9. युद्ध आरम्भ होने के पहले जर्मनों ने पूरी कोशिश की थी कि भारत में ब्रिटेन के विरुद्ध आन्दोलन शुरू किया जा सके.  बहुत से लोगों का विचार था कि यदि ब्रिटेन युद्ध में लग गया तो भारत के क्रान्तिकारी इस अवसर का लाभ उठाकर देश से अंग्रेजों को उखाड़ फेंकने में सफल हो जाएंगे.

10. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुल 8 लाख भारतीय सैनिक इस युद्ध में लड़े जिसमें कुल 47746 सैनिक मारे गये और 65000 जख्मी हुए. इस युद्ध के कारण भारत की अर्थव्यवस्था लगभग दिवालिया हो गयी थी.

11. भारत के बड़े नेताओं द्वारा इस युद्ध में ब्रिटेन को समर्थन ने ब्रिटिश चिन्तकों को भी चौंका दिया था. भारत के नेताओं को आशा थी कि युद्ध में ब्रिटेन के समर्थन से खुश होकर अंग्रेज भारत को इनाम के रूप में स्वतंत्रता दे देंगे या कम से कम स्वशासन का अधिकार देंगे किन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

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12. 28 जुन,1919 को जर्मनी के सामने फ्रांस इटली, ब्रिटेन और सहयोगी थे. दोनों पक्षों के बीच वर्सलेस संधि पर दस्तखत हुए और युद्ध का आधिकारिक अंत हुआ.

 

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