उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में प्रिंसिपल और असिस्टेंट प्रोफेसर के हजारों पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव मिल चुके हैं. आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने aajtak.in से खास बातचीत में कहा कि आयोग को पिछले 10 दिनों में प्रिंसिपल के 211 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 2107 पदों का रिक्विजिशन प्राप्त हुआ है. पदों की अंतिम संख्या तय होने के बाद अगस्त में भर्ती विज्ञापन जारी करने की तैयारी है.
प्रशांत कुमार ने ये भी बताया कि अभी तक अटकी हुई भर्तियां भी जल्द पूरी की जाएंगी. पीजीटी, टीजीटी और टीईटी के माध्यम से भर्तियां आने वाले दो महीनों में पूरी करने की योजना है. उन्होंने कहा कि आयोग का गठन 2023 में माध्यमिक, उच्च शिक्षा और आईटीआई संस्थानों में शिक्षकों तथा प्राचार्यों की भर्ती को एकीकृत और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए किया गया था. आयोग असिस्टेंट प्रोफेसर, टीजीटी, पीजीटी, आईटीआई अनुदेशक और कॉलेज प्रिंसिपल जैसे पदों पर भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है.
छह महीने में कई बड़ी परीक्षाएं पूरी
आयोग अध्यक्ष के मुताबिक, पिछले छह महीनों में टीजीटी, पीजीटी, असिस्टेंट प्रोफेसर और टीईटी समेत चार प्रमुख परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं. इनमें से तीन के परिणाम जारी हो चुके हैं, जबकि शेष प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं. उन्होंने कहा कि आयोग का प्रयास है कि पुरानी भर्तियों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि नई भर्ती प्रक्रियाओं का रास्ता साफ हो सके.
अगस्त में आ सकता है नया विज्ञापन
प्रशांत कुमार ने बताया कि नई भर्तियों के लिए रिक्त पदों का विवरण लगातार प्राप्त हो रहा है. पदों की सटीक संख्या तय होने के बाद आयोग अगस्त में विज्ञापन जारी करने की दिशा में काम करेगा. उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में प्रश्नपत्र निर्माण, मुद्रण, आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा आयोजन जैसे कई चरण होते हैं, इसलिए सभी तैयारियां पूरी करने के बाद ही विज्ञापन जारी किया जाता है.
पेपर लीक रोकने के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स का सहारा
वहीं भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशांत कुमार ने कहा कि अब तकनीक का इस्तेमाल आवेदन चरण से ही शुरू कर दिया जाता है. डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाती है. बायोमेट्रिक सत्यापन और अन्य डिजिटल उपायों के जरिए अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित की जाती है. उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित टीईटी परीक्षा में 44 संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया. आयोग पेशेवर एजेंसियों की मदद लेता है और परीक्षा संचालन के लिए जिला प्रशासन तथा शासन स्तर पर विस्तृत समन्वय किया जाता है.
गृह जनपद में परीक्षा नहीं, दिव्यांगों को छूट
आयोग अध्यक्ष ने बताया कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सामान्य अभ्यर्थियों को गृह जनपद में परीक्षा केंद्र नहीं दिया जाता. केवल दिव्यांग अभ्यर्थियों को यह सुविधा दी जाती है. कोशिश रहती है कि परीक्षा केंद्र पड़ोसी मंडल या नजदीकी क्षेत्र में मिले, ताकि यात्रा भी कम करनी पड़े और पारदर्शिता भी बनी रहे. उन्होंने कहा कि टीईटी 2026 में करीब 20 लाख अभ्यर्थी पंजीकृत थे और उपस्थिति लगभग 88 प्रतिशत रही. परीक्षा केंद्र आवंटन में इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि एक ही परिवार या गांव के लोगों को एक साथ न बैठाया जाए. यहां तक कि जुड़वां अभ्यर्थियों के लिए भी अलग-अलग व्यवस्था की जाती है.
'भर्तियां रुकनी नहीं चाहिए'
प्रशांत कुमार ने कहा कि आयोग का उद्देश्य मेरिट आधारित, पारदर्शी और त्रुटिरहित भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करना है. उनका कहना है कि आयोग लगातार यह प्रयास कर रहा है कि भर्ती प्रक्रियाएं बिना रुकावट आगे बढ़ें. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सभी पुरानी भर्तियों को पूरा करना और नई भर्ती प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा करना आयोग की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है.
मानसी मिश्रा