4 साल का इंतजार, ₹8000 का खर्च, टूटती उम्मीदें... UP VDO भर्ती के छात्र बेहाल, कब आएगा फाइनल रिजल्ट?

जब कोई भर्ती 4 साल तक लटकी रहती है, तो वह सिर्फ एक सरकारी फाइल नहीं अटकती, बल्कि उस फाइल के साथ आदित्य, राघवेंद्र और ऋषभ जैसे हजारों होनहार युवाओं की जिंदगी और उनके परिवारों की उम्मीदें भी अधर में लटक जाती हैं. महीने का 8 हजार रुपये खर्च उठाना इन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कितना भारी पड़ता है, इसका अहसास शायद वातानुकूलित दफ्तरों में बैठे अफसरों को नहीं है. आइए जानते हैं अभ्यर्थ‍ियों का पक्ष. 

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आजतक एजुकेशन डेस्क

  • लखनऊ,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:48 PM IST

'कमरे का किराया साढ़े तीन हजार रुपये है. खाना और पढ़ाई मिलाकर हर महीने का खर्च करीब 8 हजार रुपये बैठता है. दिन-रात बस इसी उम्मीद में आंखें घिस रहा हूं कि नौकरी लगेगी तो बूढ़े मां-बाप का सहारा बनूंगा, उनकी सेवा कर पाऊंगा...' 

यह रुआंसा कर देने वाला दर्द हरदोई के आदित्य का है, जो लखीमपुर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. लेकिन आदित्य अकेले नहीं हैं. हरदोई के ही राघवेंद्र आज कोचिंग पढ़ाकर अपनी पढ़ाई और जिंदगी का खर्च उठा रहे हैं क्योंकि घर की जिम्मेदारियों के आगे अब मां-बाप से पैसे मांगने में शर्म आती है. वहीं बाराबंकी के ऋषभ पिछले 4 सालों से सिर्फ एक 'फाइनल रिजल्ट' की उम्मीद में अपनी जवानी खपा रहे हैं.

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यह दर्द है उत्तर प्रदेश के उन हजारों बेरोजगार युवाओं का, जो UPSSSC (उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) की लेट लतीफ लचर व्यवस्था के शिकार हैं. साल 2022-23 की ग्राम पंचायत अधिकारी (VDO) भर्ती आज साल 2026 में भी अधूरी खड़ी है.

26 लाख बच्चों का सपना, अब सिर्फ 1468 पदों की जंग

इस भर्ती की कहानी उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हर छात्र की दास्तां बयां करती है.
साल 2023: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने ग्राम पंचायत अधिकारी (VDO) के 1468 पदों पर विज्ञापन जारी किया. उम्मीद इतनी बड़ी थी कि करीब 26 लाख अभ्यर्थियों ने फॉर्म भर दिया. पीईटी स्कोर के आधार पर मुख्य परीक्षा के लिए लगभग 66 हजार उम्मीदवार क्वालिफाई हुए.

लेकिन इसके बाद शुरू हुआ अंतहीन इंतजार का वो दौर, जिसने छात्रों के सब्र का बांध तोड़ दिया. प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के खिलाफ युवाओं ने अक्टूबर 2024 में लखनऊ की सड़कों पर उतरकर भारी प्रदर्शन किया.

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देरी का साइड इफेक्ट: 66 हजार में से केवल 31 हजार ने दी परीक्षा
व्यवस्था की सुस्ती का नतीजा यह हुआ कि जो परीक्षा समय पर होनी चाहिए थी, वह टलते-टलते 27 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई. भर्ती इतनी लंबी खिंच गई कि मुख्य परीक्षा में 66 हजार में से केवल 31 हजार अभ्यर्थी ही शामिल हुए. बाकी के 35 हजार छात्र कहां गए? छात्रों का कहना है कि सालों की देरी के कारण हताश होकर बड़ी संख्या में उम्मीदवार या तो ओवरएज हो गए या फिर प्राइवेट नौकरियों और दूसरी परीक्षाओं की तरफ मुड़ गए.

प्रदर्शन के बाद खुली आयोग की नींद
परीक्षा तो हो गई, लेकिन रिजल्ट के लिए फिर वही ढाक के तीन पात. थक-हारकर 16 अक्टूबर 2025 को अभ्यर्थियों ने आयोग के दफ्तर के बाहर एक बार फिर जोरदार प्रदर्शन किया. दबाव बढ़ा, तो अगले ही दिन यानी 17 अक्टूबर 2025 को आयोग ने मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया. इस परिणाम में लगभग 6,000 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है. अब इन्हीं 6,000 छात्रों में से अंतिम रूप से 1468 उम्मीदवारों का चयन होना है. लेकिन आज साल 2026 का आधा समय बीत जाने के बाद भी यह फाइनल लिस्ट जारी नहीं हो सकी है.

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मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आए भी महीनों बीत चुके हैं, अब आयोग को किस बात का इंतजार है? उत्तर प्रदेश के इन युवाओं का सब्र अब जवाब दे रहा है. 

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