जॉब के लालच में मां का मर्डर! जानिए किन हालातों में बच्चों को मिलती है पेरेंट्स की 'अनुकंपा नौकरी'

जयपुर के इस मामले में कानून तो अपना काम करेगा ही और आरोपी बेटी को नौकरी की जगह जेल की कालकोठरी मिलेगी, लेकिन इस घटना के बाद देश भर के युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के परिवारों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर वो कौन से नियम हैं जिनके तहत बच्चों को माता-पिता की सरकारी नौकरी मिलती है? आइए जानें...

Advertisement
कातिल बेटी को अपने किए का कोई पछतावा नहीं है (फोटो-ITG) कातिल बेटी को अपने किए का कोई पछतावा नहीं है (फोटो-ITG)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:04 AM IST

राजस्थान की राजधानी जयपुर से आई एक खौफनाक खबर ने पूरे देश को सन्न कर दिया है, जहाँ 23 साल की एक बेटी ने अपनी ही सरकारी मुलाजिम माँ की सिर्फ इसलिए हत्या करवा दी ताकि माँ की जगह वो पक्की सरकारी नौकरी उसे मिल जाए. इस दिल दहला देने वाली वारदात ने सरकारी व्यवस्था के एक बेहद भावुक और जरूरी नियम 'अनुकंपा नियुक्ति' को चर्चा में ला दिया है.

Advertisement

जयपुर के इस मामले में कानून तो अपना काम करेगा ही और आरोपी बेटी को नौकरी की जगह जेल की कालकोठरी मिलेगी, लेकिन इस घटना के बाद देश भर के युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के परिवारों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर वो कौन से नियम हैं जिनके तहत बच्चों को माता-पिता की सरकारी नौकरी मिलती है?

आइए आसान भाषा में 'अनुकंपा नियुक्ति' के उन कड़े नियमों को डिकोड करते हैं, जो हर किसी को पता होने चाहिए:

किन हालातों में लागू होता है 'अनुकंपा नौकरी' का नियम?
सरकारी व्यवस्था में यह नियम विशुद्ध रूप से मानवीय संवेदनाओं के आधार पर बनाया गया है ताकि घर के कमाऊ सदस्य के न रहने पर परिवार अचानक सड़क पर न आ जाए. लेकिन इसके लिए कुछ कड़े नियम हैं:

Advertisement

1. सेवाकाल के दौरान मृत्यु
सबसे पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु उसके रिटायर होने से पहले, यानी उसकी सर्विस के दौरान ही हुई हो. अगर कोई कर्मचारी रिटायर हो चुका है, तो उसके बच्चों को इस नियम का कोई लाभ नहीं मिलता.

2. मेडिकल अनफिट होना 
यदि सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु नहीं हुई है, लेकिन किसी गंभीर बीमारी या हादसे के कारण वह पूरी तरह 'मेडिकल अनफिट' (काम करने में असमर्थ) घोषित हो जाता है और समय से पहले रिटायरमेंट ले लेता है, तब भी विशेष परिस्थितियों में उसके आश्रित को नौकरी मिल सकती है.

3. 'अचानक आई आर्थिक तंगी' होना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में साफ किया है कि अनुकंपा नियुक्ति कोई पैतृक अधिकार (Inheritance) या वसीयत नहीं है. यह केवल परिवार को तुरंत आए संकट से उबारने के लिए सरकार की एक 'सहानुभूति' है. यदि मृत कर्मचारी का परिवार बहुत अमीर है, बड़ा बैंक बैलेंस है, या परिवार का कोई दूसरा सदस्य पहले से ही अच्छी सरकारी या प्राइवेट जॉब में है, तो विभाग इस अर्जी को खारिज कर सकता है.

परिवार में किस बच्चे को मिलती है पहली प्राथमिकता?
माता-पिता की मृत्यु के बाद परिवार के किसी एक ही सदस्य को योग्यता के अनुसार नौकरी (आमतौर पर ग्रुप 'सी' या 'डी' पदों पर) मिल सकती है. इसके लिए वरीयता तय होती है. इसमें  पहली प्राथमिकता मृत कर्मचारी के पति या पत्नी (Spouse) को मिलती है. वहीं दूसरी प्राथमिकता यदि पति/पत्नी नौकरी नहीं करना चाहते या सक्षम नहीं हैं, तो उनके सगे बेटे या अविवाहित बेटी को.

Advertisement

शादीशुदा बेटी और गोद लिए बच्चे का क्या है नियम?
हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान समेत कई हाईकोर्ट्स ने ऐतिहासिक फैसले दिए हैं कि 'सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता.' बशर्ते वह यह साबित करे कि वह अपने माता-पिता पर ही आर्थिक रूप से निर्भर थी और परिवार की देखभाल वही करेगी.

वहीं यदि बच्चे को माता-पिता के जीवित रहते हुए पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया (Legal Adoption) के तहत गोद लिया गया था, तो उसे भी सगे बच्चे की तरह ही अनुकंपा का अधिकार मिलता है.

अपराधी को कभी नहीं मिलता 'सहानुभूति' का लाभ!
जयपुर वाले केस के संदर्भ में यह जानना बेहद जरूरी है कि अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया में पुलिस वेरिफिकेशन और आवेदक का साफ चरित्र सबसे अहम होता है.

कानून का स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी अपराधी अपने ही किए गए अपराध का वित्तीय या प्रशासनिक लाभ नहीं उठा सकता. यदि कोई आश्रित अपने ही परिवार के सदस्य (जिसकी जगह नौकरी मिलनी है) की हत्या का आरोपी या दोषी पाया जाता है, तो 'राजस्थान अनुकंपा नियुक्ति नियम, 1996' और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के तहत वह तुरंत अयोग्य हो जाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »