कैंप फीनिक्स काबुल शहर में एक पुराना बड़ा मिलिट्री बेस था. अमेरिका और नाटो (NATO) फोर्सेस ने 2000 के दशक से 2021 तक यहां इस्तेमाल किया. यहां मुख्य काम था अफगान नेशनल आर्मी (ANA) को ट्रेनिंग देना, अफगान सिक्योरिटी फोर्सेस को तैयार करना और लॉजिस्टिक सपोर्ट देना.
ये बेस काबुल एयरपोर्ट के पास था. अमेरिकी सेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण था. 2021 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान छोड़ा और तालिबान सत्ता में आया, तो ये बेस तालिबान के कब्जे में चला गया.
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बाद में अफगानिस्तान सरकार ने इसे ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर (नशा मुक्ति केंद्र) में बदल दिया, जिसका नाम ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल है. लोकल लोग इसे ओमिद कैंप या उम्मीद का कैंप कहते हैं. ये 2000 बेड वाला बड़ा सेंटर है जहां नशेड़ी इलाज कराते हैं.
अमेरिकी सेना का कनेक्शन क्या था?
अमेरिकी सेना ने कैंप फीनिक्स को अफगान आर्मी ट्रेनिंग का मुख्य केंद्र बनाया था. यहां अमेरिकी ट्रेनर्स अफगान सैनिकों को हथियार चलाना, ऑपरेशन करना और सुरक्षा सिखाते थे. ये बेस अमेरिका की अफगानिस्तान में लंबी मौजूदगी का हिस्सा था.
2011 में यहां तालिबान ने सुसाइड अटैक भी किया था, लेकिन अमेरिकी फोर्सेस ने उसे नाकाम कर दिया. 2021 में अमेरिकी वापसी के बाद बेस खाली हो गया. तालिबान ने कब्जा कर लिया.
अब पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान ने इसे दोबारा मिलिट्री यूज में लिया है – TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) आतंकियों को ट्रेनिंग देने और हथियार गोदाम के लिए इस्तेमाल होता है.
पाकिस्तान क्यों निशाना बना रहा है?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान (तालिबान सरकार) के बीच पिछले महीनों से बहुत तनाव है. पाकिस्तान का मुख्य आरोप है कि तालिबान TTP आतंकियों को अफगानिस्तान में पनाह दे रहा है. TTP पाकिस्तान में पुलिस, आर्मी और आम लोगों पर हमले करता है.
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पाकिस्तान कहता है कि TTP का लीडरशिप और फाइटर्स अफगानिस्तान में छिपे हैं. वहां से ऑपरेशन चलाते हैं. इसलिए पाकिस्तान ने फरवरी 2026 से अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक्स शुरू किए. 16 मार्च 2026 की रात को पाकिस्तान ने 6 स्ट्राइक्स किए, जिनमें से एक काबुल में कैंप फीनिक्स पर था.
पाकिस्तान का दावा है कि ये बेस अब TTP का मिलिट्री टेररिस्ट अम्यूनिशन और इक्विपमेंट स्टोरेज साइट बन गया है – यानी हथियार रखने और आतंकियों को ट्रेनिंग देने की जगह. पाकिस्तान कहता है कि हमला प्रिसाइज था. अस्पताल पर हमला नहीं किया गया बल्कि मिलिट्री टारगेट था जो अस्पताल से कई किलोमीटर दूर है.
तालिबान कहता है...
तालिबान कहता है कि पाकिस्तान ने ओमिद हॉस्पिटल पर हमला किया, जहां 400 से ज्यादा लोग (ज्यादातर नशेड़ी मरीज) मारे गए और 250+ घायल हुए. तालिबान के मुताबिक ये सिविलियन टारगेट था. पाकिस्तान ने निर्दोषों को मारा. रेस्क्यू टीम अभी भी मलबे से लाशें निकाल रही है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बेस के कुछ हिस्से में तालिबान ने सुसाइड ड्रोन या अन्य मिलिट्री काम किए थे, लेकिन मुख्य जगह हॉस्पिटल ही थी.
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विवाद क्यों है?
दोनों तरफ अलग-अलग दावे हैं. पाकिस्तान कहता है – हमने TTP के हथियार गोदाम और ट्रेनिंग साइट को मारा. अस्पताल अलग है. तालिबान कहता है – पूरा हमला हॉस्पिटल पर हुआ, ये युद्ध अपराध है. मैप्स और लोकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हॉस्पिटल और पुराना कैंप पास-पास हैं, लेकिन पाकिस्तान कहता है कि दूरी कई किलोमीटर है. तालिबान प्रोपगैंडा फैला रहा है. ये हमला पाकिस्तान-अफगानिस्तान युद्ध का सबसे बड़ा इंसिडेंट है.
ऋचीक मिश्रा