अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के सबसे एडवांस फाइटर जेट F35 C लाइटनिंग II ने ईरान के खतरनाक शाहेद-139 ड्रोन को मार गिराया. यह घटना 3 फरवरी 2026 को हुई, जब ईरानी ड्रोन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के बहुत करीब से पहुंच गया था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे आत्मरक्षा में किया गया एक्शन बताया.
क्या हुआ था घटनाक्रम?
स्थान: अरब सागर (ईरान के दक्षिणी तट से करीब 800 किलोमीटर दूर). यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप वहां तैनात था. यह अमेरिका का Fifth Fleet का हिस्सा है, जो मिडिल ईस्ट में ऑपरेशन करता है.
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ईरानी शाहेद-139 ड्रोन (लंबी दूरी का सर्वेलेंस/अटैक ड्रोन) कैरियर की ओर तेजी से बढ़ा. अमेरिकी सेना ने कई बार चेतावनी सिग्नल और रेडियो वार्निंग दिए, लेकिन ड्रोन ने इग्नोर किया और आगे बढ़ता रहा.
खतरा महसूस होने पर कैरियर से लॉन्च हुए F-35C फाइटर जेट ने ड्रोन को मिसाइल से मार गिराया. यह F-35C का पहला ज्ञात ड्रोन इंटरसेप्शन है. कोई अमेरिकी नुकसान नहीं हुआ.
शाहेद-139 ड्रोन क्या है?
शाहेद-139 ईरान का उन्नत यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल - UAV) है...
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F-35C फाइटर जेट की ताकत
F35 C अमेरिका का सबसे एडवांस्ड फिफ्थ-जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर है, जो कैरियर से उड़ान भर सकता है...
क्यों पहुंचा ड्रोन इतना करीब?
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
क्या मतलब है इस घटना का?
यह दिखाता है कि ड्रोन युद्ध कितना आम हो गया है. ईरान के सस्ते ड्रोन्स अमेरिका की महंगी तकनीक को चुनौती दे रहे हैं, लेकिन F-35C जैसी मशीनें अभी श्रेष्ठ हैं. फिर भी, अगर स्वार्म में कई ड्रोन्स आएं, तो डिफेंस मुश्किल हो सकता है. अमेरिका अब और सतर्क होगा. ईरान अपनी असिमेट्रिक वॉरफेयर जारी रखेगा. यह घटना इंडो-पैसिफिक और मिडिल ईस्ट में नई तरह की लड़ाई का संकेत है – जहां ड्रोन और स्टेल्थ जेट आमने-सामने हैं.
ऋचीक मिश्रा