जापान में भयानक बर्फीले तूफान के बाद चारों तरफ 'सफेद मौत', 30 की मौत... सेना हटा रही बर्फ

जापान में रिकॉर्ड तोड़ भारी बर्फबारी से हालात गंभीर हैं. विंटर स्टॉर्म से मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई, जबकि 100 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित आओमोरी और सप्पोरो हैं, जहां छत साफ करते समय गिरने से ज्यादातर मौतें हुईं. रविवार के आम चुनाव पर भी असर पड़ सकता है.

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जापान के इशिकावा परफेक्चर के कानाजावा में बर्फबारी के बीच सड़क पर चलते लोग. (Photo: AP) जापान के इशिकावा परफेक्चर के कानाजावा में बर्फबारी के बीच सड़क पर चलते लोग. (Photo: AP)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST

जापान में रिकॉर्ड तोड़ भारी बर्फबारी ने उत्तर और पश्चिमी इलाकों को दबा दिया है. मंगलवार (3 फरवरी 2026) को सैनिकों और हजारों स्नो प्लो (बर्फ हटाने वाली मशीनों) ने मिलकर शहरों से बर्फ साफ करने की जंग लड़ी. विंटर स्टॉर्म से मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है.

क्या हो रहा है?

जापान दुनिया के सबसे ज्यादा बर्फ पड़ने वाले देशों में से एक है, खासकर उत्तर में होकाइडो और ओनोशू द्वीप के इलाकों में. लेकिन इस साल जनवरी के अंत से शुरू हुई बर्फबारी इतनी भयानक है कि कई रिकॉर्ड टूट गए हैं.

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  • आओमोरी शहर (उत्तरी जापान): यहां 40 साल का पुराना रिकॉर्ड टूटा. कुछ जगहों पर 183 सेमी (लगभग 6 फीट) बर्फ जमा हुई, जबकि औसत से दोगुनी से ज्यादा. सबसे ज्यादा 4.54 मीटर (14 फीट से ज्यादा) बर्फ एक जगह पर दर्ज की गई.
  • सप्पोरो (होकाइडो का सबसे बड़ा शहर): यहां 1000 से ज्यादा स्नो प्लो ने 3800 किमी सड़कों से बर्फ हटाने का काम शुरू किया.
  • होकाइडो का मुख्य एयरपोर्ट (न्यू चितोसे): पिछले हफ्ते अस्थायी रूप से बंद रहा, सैकड़ों यात्री फंस गए. ट्रेनें देरी से चलीं, हाईवे बंद हो गए.

मौतें और चोटें कैसे हुईं?

फायर एंड डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी के अनुसार, 20 जनवरी से अब तक 30 लोग मारे गए हैं. 100 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हैं. ज्यादातर मौतें छत से बर्फ साफ करते समय गिरने से हुईं. कई बुजुर्ग घरों की छत पर चढ़कर बर्फ हटा रहे थे, लेकिन फिसलकर गिर गए. बर्फ के ढेर में दब गए. एक 91 साल की महिला को उसके घर के बाहर 3 मीटर बर्फ के नीचे दबा पाया गया. सबसे ज्यादा मौतें निगाता प्रीफेक्चर (12), अकिता (6) और आओमोरी (4) में हुईं.

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सरकार और सेना की मदद

सेल्फ-डिफेंस फोर्सेस (जापान की सेना) को बुलाया गया. आओमोरी में 21 साल बाद पहली बार सेना ने छतों और सड़कों से बर्फ हटाने में मदद की. स्थानीय सरकारें बुजुर्गों और अकेले रहने वालों की मदद के लिए सेना से गुहार लगा रही हैं. एवलांच और छत से गिरने वाली बर्फ का खतरा है, इसलिए अलर्ट जारी किया गया है.

चुनाव पर असर?

जापान में 36 साल बाद मिडविंटर (सर्दियों के बीच) में आम चुनाव होने वाले हैं – रविवार को. इतनी भारी बर्फ से वोटिंग प्रभावित हो सकती है. लोग घर से निकलने में असमर्थ हैं. ट्रांसपोर्ट बाधित है, इसलिए वोटर टर्नआउट कम होने की आशंका है.

क्यों इतनी ज्यादा बर्फ इस बार?

जापान में सर्दियां कड़क होती हैं, लेकिन इस साल का मौसम पैटर्न असामान्य रहा. समुद्र से आने वाली ठंडी हवाएं और बर्फीले तूफान ने रिकॉर्ड बर्फबारी की. यह स्थिति लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण है. सरकार लोगों से छत साफ करने में सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने की अपील कर रही है.

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