ईरान के पास अमेरिकी सैन्य बेड़ा पिछले साल से भी बड़ा... क्या अब होगा हमला?

ईरान के पास अमेरिकी सैन्य बेड़ा अब जून 2025 से भी बड़ा हो गया है. मस्कट में वार्ता के बीच तीन E-11A, तीन ऑस्प्रे, दर्जन भर F-15 जेट, MQ-9 ड्रोन और A-10C विमान ट्रैक हुए हैं. अल-खार्ज और मुवाफ्फक सल्ती बेस पर गतिविधि बढ़ी हुई है. USS अब्राहम लिंकन कैरियर ग्रुप अरब सागर में तैनात है. हमले की तैयारी का संकेत मिल रहे हैं.

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अरब सागर में तैनात USS अब्राहम लिंकन से टेकऑफ करता हेलिकॉप्टर. (File Photo: Getty) अरब सागर में तैनात USS अब्राहम लिंकन से टेकऑफ करता हेलिकॉप्टर. (File Photo: Getty)

बिदिशा साहा

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

अमेरिका ईरान पर हमला करेगा या नहीं, यह अरब सागर में उसके सैन्य जहाजों और विमानों की संख्या से पता चल सकता है. पिछले साल जून में मिडनाइट हैमर ऑपरेशन में अमेरिका ने ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला किया था, लेकिन उससे पहले भी समुद्र में संकेत मिल रहे थे.

अब रक्षा विश्लेषक स्टीफन वॉटकिंस ने हाल के हफ्तों में क्षेत्र में कई अमेरिकी चेतावनी और जासूसी विमानों की तैनाती ट्रैक की है. इनमें कम से कम तीन E-11A बैटलफील्ड एयरबोर्न कम्युनिकेशन नोड (BACN) शामिल हैं, जो सऊदी अरब के अल-खार्ज एयर बेस पर तैनात हैं. जून 2025 के हमलों के दौरान मध्य पूर्व में सिर्फ एक E-11A देखा गया था.

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वॉटकिंस ने X पर पोस्ट में कहा कि यह पैटर्न शायद बताता है कि हमले जल्द ही हो सकते हैं. इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने छह E-11A BACN विमानों को ट्रैक और मैप किया है, जो या तो मध्य पूर्व में तैनात हैं या रोटेशन में काम कर रहे हैं. ये तैनातियां खाड़ी में अमेरिकी कमांड-एंड-कंट्रोल संसाधनों में बड़ा इजाफा दर्शाती हैं. यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जनवरी में विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई पर दबाव बढ़ाने के साथ मेल खाती है.

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यह सब तब हो रहा है जब अमेरिकी और ईरानी अधिकारी मस्कट में पहली बार आमने-सामने की वार्ता करने वाले हैं, जो पिछले जून के हमले के बाद की पहली बैठक है. इसका उद्देश्य एक और संघर्ष को रोकना है. इसी बीच, अमेरिका ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे पश्चिम एशियाई देश ईरान से तुरंत निकलें. अमेरिकी दूतावास से कोई मदद नहीं मिलेगी.

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मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर बढ़ती गतिविधि

इस हफ्ते मध्य पूर्व में अन्य अमेरिकी ठिकानों पर भी ज्यादा गतिविधि के संकेत मिले हैं. जॉर्डन के पूर्वी इलाके में मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस अमेरिकी बेडे़ का जुटाव हो रहा है. इंडिया टुडे ने कोपरनिकस सैटेलाइट इमेजरी से देखा कि जनवरी के अंत में टारमैक पर करीब एक दर्जन जेट विमान खड़े थे. यह जगह जून 2025 में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर से पहले भी इस्तेमाल हुई थी.

इंडिया टुडे ने ओपन-सोर्स फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से ओमान में डुकम एयर बेस पर विशेष ड्रोन्स और ऑस्प्रे सप्लाई विमानों की गतिविधि ट्रैक की. जनवरी की शुरुआत से दो बॉम्बार्डियर E-11A विमान (टेल नंबर 23-9048 और 21-9045) पहले से ही मध्य पूर्व में तैनात थे. इस हफ्ते एक और E-11A (टेल नंबर 12-9506) चानिया से आया और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर पहुंचा.

मंगलवार को बॉम्बार्डियर 21-9045 प्रिंस सुल्तान एयर बेस से जॉर्डन गया और फिर अमेरिका लौट आया. बुधवार को एक अलग E-11A (22-9047) चानिया आया और फिर अल-खार्ज गया. इस तरह क्षेत्र में अमेरिकी वायु सेना के BACN विमानों की संख्या तीन बनी रही.

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ये संशोधित कमर्शियल जेट विमानों का काम एक उड़ते हुए कम्युनिकेशन हब की तरह है, जिससे अमेरिकी सेनाएं बड़े इलाकों में तेजी से और सुरक्षित रूप से जानकारी साझा कर सकती हैं. इन्हें अक्सर आसमान में वाई-फाई कहा जाता है.

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USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती

इससे पहले हफ्तों में USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अरब सागर में पहुंचा. कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अमेरिकी सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक है, जिसमें करीब 70 विमान होते हैं. ईरानी सेनाएं, जिसमें ड्रोन्स और उसका मुख्य ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी शामिल है, लिंकन पर नजर रख रही हैं. 3 फरवरी को अमेरिका ने एक ईरानी शाहेद-139 ड्रोन को मार गिराया, क्योंकि अधिकारियों ने कहा कि वह लिंकन के करीब आ रहा था.

कैरियर की लोकेशन हाल की विमान गतिविधियों से भी पुष्टि होती है. इंडिया टुडे ने ओमान के डुकम एयरपोर्ट पर अरब सागर और नजदीकी बेस के बीच कम से कम तीन ऑस्प्रे सप्लाई विमानों की बार-बार उड़ानें ट्रैक कीं, जो 30 जनवरी से शुरू हुईं. हाल के वर्षों में यह इलाका अमेरिकी नौसेना के लिए महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब बन गया है, जैसा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड कहती है.

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अब्राहम लिंकन F-35 स्टेल्थ फाइटर्स ले जाता है, जो उन्नत एयर डिफेंस नेटवर्क में घुसपैठ कर सकते हैं. स्ट्राइक ग्रुप में तीन डेस्ट्रॉयर भी हैं, जो टोमाहॉक लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं. इसमें आमतौर पर एक न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन भी होती है, जो उसी तरह के हथियारों से सुसज्जित है. यह क्षेत्र में पहले से मौजूद दो अमेरिकी डेस्ट्रॉयर के अलावा है.

जून 2025 से तुलना: ज्यादा तैयारियां

जून 2025 के हमलों से कुछ दिन पहले मीडिया ने अमेरिकी सैन्य संसाधनों की असामान्य गतिविधि की रिपोर्ट दी थी. उदाहरण के लिए, 21 जून को अमेरिका ने छह B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स को गुआम की ओर भेजा, लेकिन बाद में पता चला कि यह सरप्राइज रखने के लिए एक डेकोय मिशन था.

USS कार्ल विंसन और USS निमित्ज़ वाले दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी हमले से पहले अरब सागर में तैनात थे. USS थॉमस हडनर, एक आर्ले बर्क-क्लास गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, पूर्वी भूमध्य सागर में भेजा गया था.

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मध्य पूर्वी हवाई क्षेत्र में अतिरिक्त E-11A विमानों की तैनाती हमले की तैयारियों के अनुरूप ऊंचे स्तर की तत्परता दर्शाती है. इंडिया टुडे की OSINT टीम ने कम से कम तीन E-11A, तीन ऑस्प्रे सप्लाई विमान, एक दर्जन F-15 फाइटर जेट, एक MQ-9 रीपर कॉम्बैट ड्रोन और कई A-10C थंडरबोल्ट II ग्राउंड अटैक विमान ट्रैक किए हैं. यह जून 2025 से बेहतर सैन्य तैयारी दिखाता है.

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यह स्थिति मस्कट में चल रही वार्ताओं के बीच तनाव बढ़ा रही है. क्या अमेरिका हमला करेगा या वार्ता सफल होगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा.
 

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