अमेरिका और डेनमार्क के बीच ग्रीनलैंड को लेकर तनाव चरम पर है, लेकिन इसी बीच अमेरिका डेनमार्क को हथियार बेच रहा है. यह स्थिति बेहद अजीब है- जैसे किसी को बंदूक बेचते हुए यह कहना कि इससे तुम्हें ही निशाना बनाऊंगा.
ट्रंप की ग्रीनलैंड पर जिद
डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद से बार-बार कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहिए. उनका कहना है कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है. ट्रंप ने हाल ही में कहा कि ग्रीनलैंड न सिर्फ हमारी सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए भी.
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उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड नहीं लिया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे. अगर हम आसानी से नहीं ले पाए, तो हम कठिन तरीके से लेंगे. उन्होंने यहां तक कहा कि चाहे उन्हें पसंद आए या न आए, हम ग्रीनलैंड लेंगे.
ट्रंप प्रशासन ने डेनमार्क के साथ बातचीत तेज की है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो खुद डेनमार्क के अधिकारियों से मिले. अमेरिका ने ग्रीनलैंड के लोगों को बड़ी रकम देने का प्रस्ताव भी रखा ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका में शामिल हो जाएं.
डेनमार्क और ग्रीनलैंड का विरोध
डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता अमेरिका के इस दबाव का कड़ा विरोध कर रहे हैं. ग्रीनलैंड के नेता कहते हैं कि वे न तो अमेरिकी बनना चाहते हैं. न ही डेनमार्क के साथ रहना चाहते हैं- वे स्वतंत्र होना चाहते हैं.
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डेनमार्क ने NATO सहयोगियों के साथ मिलकर अमेरिका को चेतावनी दी है. डेनिश सेना को आदेश दिया गया है कि अगर कोई आक्रमण करे तो पहले गोली चलाओ, बाद में बात करो. यह आदेश 1940 में नाजी जर्मनी के हमले के समय दिया गया था.
अमेरिका डेनमार्क को हथियार क्यों बेच रहा है?
यहां सबसे बड़ी अजीब बात है कि अमेरिका डेनमार्क को लगातार हथियार बेच रहा है, जबकि ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दे रहा है.
अमेरिका का कहना है कि ये हथियार डेनमार्क को रूस के खतरे से बचाने के लिए हैं. लेकिन अब ये हथियार अमेरिका के खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं अगर ट्रंप ग्रीनलैंड पर हमला करें.
क्या होगा अगर अमेरिका और डेनमार्क में टकराव हुआ?
विशेषज्ञों का मानना है कि डेनमार्क अमेरिका से सीधे लड़ नहीं सकता. अमेरिका की सेना बहुत बड़ी और मजबूत है. डेनमार्क की रणनीति होगी... शुरुआती विरोध करना. NATO को सक्रिय करना. कूटनीतिक दबाव बढ़ाना.
लेकिन अगर अमेरिका ने हमला किया, तो डेनमार्क के F-35 और हेलफायर मिसाइलें अमेरिकी F-35 और ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती हैं. यह स्थिति बेहद अजीब और खतरनाक है.
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ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दे रहे हैं, लेकिन अमेरिका डेनमार्क को हथियार बेच रहा है. यह पूरी स्थिति एक बड़ी विडंबना है- जैसे दुश्मन को हथियार देकर कहना कि अब मुझ पर हमला करो. NATO में शामिल दोनों देशों के बीच ऐसा तनाव दुनिया के लिए चिंता की बात है.
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