अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में अब जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहे हैं. खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने उसी एलीट टीम को ईरान भेजने का प्लान बनाया है जिसने 2011 में पाकिस्तान में ऑपरेशन लादेन में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ ऑपरेशन में काम किया था. इजरायल भी इस प्लान में पूरी तरह साथ है.
दोनों देश मिलकर ईरान के सीक्रेट न्यूक्लियर अड्डों और मोजतबा खामेनेई के गुप्त बंकर पर स्पेशल फोर्स उतारने की तैयारी कर रहे हैं. ये फोर्सेज दुनिया की सबसे खतरनाक और गोपनीय यूनिट्स हैं. आइए समझते हैं कि अमेरिका की डेल्टा फोर्स (1st SFOD-D) और इजरायल की सायरेट मटकल (Sayeret Matkal) क्या हैं. ये कैसे काम करती हैं. कौन-से हथियार इस्तेमाल करती हैं. इनकी टैक्टिक्स क्या होती हैं.
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डेल्टा फोर्स (1st SFOD-D) क्या है?
डेल्टा फोर्स अमेरिकी सेना की सबसे एलीट काउंटर-टेररिज्म यूनिट है. इसे 1977 में कर्नल चार्ल्स बेकविथ ने बनाया था. यह यूनिट अमेरिकी आर्मी के स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के तहत काम करती है. इसका मुख्य काम है – दुश्मन के पीछे घुसकर हाई-वैल्यू टारगेट को मारना, बंधकों को बचाना और गुप्त खुफिया ऑपरेशन करना.
यह यूनिट इतनी गोपनीय है कि इसके जवान कभी अपना नाम या चेहरा सार्वजनिक नहीं करते. डेल्टा फोर्स सिर्फ सबसे मुश्किल मिशन लेती है. ऑपरेशन लादेन में यही टीम पाकिस्तान के अबोटाबाद में घुसी थी और बिन लादेन को मार गिराया था. ईरान में भी यही टीम न्यूक्लियर बंकरों में घुसकर सेंट्रीफ्यूज नष्ट करने या मोजतबा खामेनेई को टारगेट करने का काम कर सकती है.
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सायरेट मटकल (Sayeret Matkal) क्या है?
सायरेट मटकल इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) की सबसे पुरानी और सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्स यूनिट है. इसे 1957 में बनाया गया था. इसका मुख्य काम है– दुश्मन के इलाके में गुप्त घुसपैठ, खुफिया जानकारी जमा करना और हाई-प्रोफाइल टारगेट को मारना. इजरायल की सेना में इसे जनरल स्टाफ रेकॉनिसेंस यूनिट कहते हैं.
यह यूनिट बहुत छोटी टीम में काम करती है – ज्यादातर 8-12 जवान. सायरेट मटकल ने 1976 में उगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट में बंधकों को बचाया था. कई अरब देशों में गुप्त हमले किए हैं. ईरान में यह यूनिट पहाड़ों के अंदर बने फोर्डो या नतांज जैसे न्यूक्लियर बंकरों में घुसकर ऑपरेशन कर सकती है. इजरायल और अमेरिका मिलकर दोनों फोर्स को एक साथ इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं.
ये फोर्सेज किन हथियारों का इस्तेमाल करती हैं
दोनों फोर्सेज के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियार होते हैं. मुख्य हथियार हैं...
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ये जवान हल्के बॉडी आर्मर, हेलमेट और कम्युनिकेशन डिवाइस पहनते हैं. हथियारों को हर मिशन के हिसाब से बदलते हैं.
क्या ये खुफिया या क्लासिफाइड हथियार इस्तेमाल करती हैं?
हां, दोनों फोर्सेज के पास कुछ ऐसे हथियार और उपकरण हैं जिनकी डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की जातीं. जैसे...
ये हथियार सिर्फ टॉप सीक्रेट मिशन में इस्तेमाल होते हैं. इनकी पूरी जानकारी सिर्फ यूनिट कमांडर और राष्ट्रपति को होती है.
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इन फोर्सेज की ऑपरेशन टैक्टिक्स क्या होती हैं
ये फोर्सेज बहुत छोटी टीम में काम करती हैं. मुख्य टैक्टिक्स हैं...
ये रात में काम करती हैं. दुश्मन की भाषा बोलती हैं. कभी-कभी दुश्मन की वर्दी पहनकर घुसती हैं. हर मिशन से पहले महीनों की ट्रेनिंग होती है. ईरान में भी यही टैक्टिक्स इस्तेमाल होंगी – पहले ड्रोन से जानकारी, फिर छोटी टीम बंकर में घुसकर ऑपरेशन करेगी और फिर हेलीकॉप्टर से निकल जाना.
ट्रंप और इजरायल का यह प्लान दिखाता है कि हवाई हमलों के बाद अब जमीनी स्तर पर भी ईरान को कमजोर करने की तैयारी है. ये दोनों फोर्सेज दुनिया की सबसे खतरनाक यूनिट्स हैं इसलिए ईरान के लिए यह बहुत बड़ा खतरा है. पूरी दुनिया इन एलीट फोर्सेज पर नजर रखे हुए है क्योंकि इनका एक ऑपरेशन युद्ध की दिशा बदल सकता है.
ऋचीक मिश्रा