तालिबान की ताकत है गुरिल्ला युद्ध... पहले रूस और अमेरिका को सिखाया सबक, अब पाकिस्तान में तबाही

तालिबान की सबसे बड़ी ताकत गुरिल्ला युद्ध है. इसी छापामार रणनीति से उन्होंने सोवियत रूस और अमेरिका को 20 साल तक थका-थका कर हराया. अब अफगान-पाक सीमा पर वही तरीका अपना रहे हैं – अचानक हमला, आईईडी ब्लास्ट, फिर पहाड़ों में गायब. पाक सेना भारी नुकसान झेल रही है. 2021 से अब तक 1000 से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं.

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पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास गुलाम खान जीरो प्वाइंट बॉर्डर पर तैनात तालिबानी सिक्योरिटी गार्ड. (File Photo: AFP) पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास गुलाम खान जीरो प्वाइंट बॉर्डर पर तैनात तालिबानी सिक्योरिटी गार्ड. (File Photo: AFP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:13 PM IST

रात के अंधेरे में अचानक गोलीबारी, आईईडी ब्लास्ट, फिर सन्नाटा... हमलावर गायब. सुबह पाकिस्तान हवाई हमले करता है. यही सिलसिला पिछले एक हफ्ते से चल रहा है. तालिबान और पाकिस्तान के बीच अब खुली जंग है, लेकिन यह कोई साधारण जंग नहीं – यह गुरिल्ला युद्ध है. तालिबान की सबसे बड़ी ताकत.

गुरिल्ला युद्ध क्या है?

गुरिल्ला युद्ध को छापामार युद्ध भी कहते हैं. इसमें बड़ी फौज के खिलाफ छोटे-छोटे समूह काम करते हैं. अचानक हमला करते हैं. फिर जंगल, पहाड़ या गांव में गायब हो जाते हैं. दुश्मन को ढूंढना मुश्किल हो जाता है. स्थानीय लोगों का समर्थन मिलता है. यह युद्ध लंबा चलता है और बड़ी सेना को थका देता है.

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तालिबान ने रूस और अमेरिका को कैसे सबक सिखाया?

1980 के दशक में सोवियत रूस की विशाल सेना अफगानिस्तान आई थी. तालिबान के पूर्वज मुजाहिदीन ने गुरिल्ला युद्ध से उन्हें 10 साल में भागने पर मजबूर कर दिया. 2001 में अमेरिका आया. सबसे ताकतवर फौज, सबसे महंगे हथियार. तालिबान ने 20 साल तक छापामार हमले किए. आखिरकार 2021 में अमेरिका को बिना जीते वापस जाना पड़ा. अब वही तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ अपना पुराना हथियार इस्तेमाल कर रहा है.

सीमा पर गुरिल्ला हमले कब शुरू हुए?

  • 21 फरवरी से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले शुरू किए. तालिबान ने जवाब दिया.
  • 26-27 फरवरी की रात को तालिबान और टीटीपी ने पाकिस्तानी बॉर्डर पोस्टों पर बड़े छापामार हमले किए.
  • पाकिस्तान का दावा – 133 तालिबान मारे गए.
  • तालिबान का दावा – कई पाकिस्तानी चौकियां कब्जे में, टैंक और हथियार लूट लिए.

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तालिबान की गुरिल्ला ताकत क्यों इतनी मजबूत?

  • पहाड़ी इलाका: ड्यूरंड लाइन पर जंगल, गुफाएं और ऊंचे पहाड़. तालिबान इन्हें सालों से जानता है.  
  • स्थानीय समर्थन: पश्तून कबीले तालिबान को खाना, जानकारी और छिपने की जगह देते हैं.  
  • सस्ते हथियार: आईईडी, रॉकेट लॉन्चर, छोटी बंदूकें और सुसाइड बॉम्बर. एक हमले में 10-20 सैनिक मर जाते हैं.  
  • धैर्य: 40 साल से लड़ रहे हैं. थकते नहीं.   
  • अफगान ठिकाने: अफगानिस्तान में सुरक्षित जगह मिलती है, वहां से पाकिस्तान में घुसते हैं.

पाकिस्तानी सेना कहां फंस गई?

पाकिस्तान की फौज दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी है. टैंक, ड्रोन, जेट सब हैं. लेकिन गुरिल्ला युद्ध में ये सब कम पड़ रहे हैं. पहाड़ों में बड़ी फौज नहीं घूम सकती. हमला छोटा और अचानक होता है. तालिबान गायब हो जाता है. हर दिन 24 घंटे अलर्ट रहना पड़ रहा है.


 
2021 से अब तक 1000 से ज्यादा पाक सैनिक मारे जा चुके हैं. पाकिस्तान ने ओपन वॉर का ऐलान कर दिया है. हवाई हमले तेज कर दिए हैं, लेकिन तालिबान का गुरिल्ला हमला रुक नहीं रहा.

इतिहास दोहरा रहा है?

  • वियतनाम में वियत कांग्रेस ने अमेरिका को थका दिया.
  • अफगानिस्तान में तालिबान ने रूस और अमेरिका को थका दिया. 
  • अब पाकिस्तान उसी जाल में फंसता दिख रहा है.
  • विशेषज्ञ कह रहे हैं – अगर जंग लंबी चली तो पाकिस्तान की सेना थक जाएगी, अर्थव्यवस्था बिगड़ जाएगी और अंदरूनी बगावत बढ़ जाएगी. 

तालिबान की असली ताकत हथियार नहीं, बल्कि गुरिल्ला युद्ध की रणनीति है. इसी ने पहले रूस और अमेरिका को सबक सिखाया. अब पाकिस्तान उसी सबक को भुगत रहा है. जंग लंबी चली तो पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.  

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