रूस ने यूक्रेन युद्ध में एक नया खतरनाक हथियार ढूंढ लिया है. अब वह यूक्रेन के अपने ड्रोन को हवा में हाईजैक करके उन्हें नाटो देशों की तरफ मोड़ रहा है. यह कोई गोली-बारूद से नहीं, बल्कि GPS को धोखा देकर किया जा रहा है. रूस जैमिंग और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल कर यूक्रेनी ड्रोन को भ्रमित कर देता है, जिससे वे अपना रास्ता भटक जाते हैं और नाटो देशों की ओर चले जाते हैं.
हाल ही में लिथुआनिया की राजधानी विल्नियस में अचानक हवाई हमले का अलर्ट जारी हुआ. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बम-प्रूफ बंकर में छिपना पड़ा. हवाई उड़ानें रद्द कर दी गईं. सड़कें बंद हो गईं. हजारों लोग भूमिगत पार्किंग में छिप गए. यह नाटो देशों में से किसी की राजधानी में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहला ऐसा बड़ा अलर्ट था. बाद में पता चला कि ऊपर उड़ रहे ड्रोन यूक्रेन के थे, जिन्हें रूस ने हाईजैक कर लिया था.
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रूस कैसे करता है ड्रोन हाईजैक?
रूस दो तरीकों से काम करता है - जैमिंग और स्पूफिंग.
पहले वह ड्रोन के GPS सिग्नल को तेज नॉइज से ब्लॉक कर देता है. ड्रोन भटक जाता है. नया सिग्नल ढूंढने लगता है. उसी समय रूस अपना नकली लेकिन मजबूत GPS सिग्नल भेजता है. ड्रोन इस नकली सिग्नल को असली समझकर उस पर भरोसा कर लेता है. रूस ड्रोन को यह भ्रम पैदा कर देता है कि वह रूस के अंदर गहराई में है, जबकि असल में वह नाटो देशों की सीमा की ओर जा रहा होता है.
रूस समय की जानकारी भी गलत देता है - कभी दशकों पुराना, कभी भविष्य का. इससे ड्रोन का कंप्यूटर कन्फ्यूज हो जाता है और क्रैश हो जाता है.
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नाटो देशों पर असर
यूक्रेन के लिए बड़ा झटका
यूक्रेन के लिए ड्रोन सबसे सस्ता और प्रभावी हथियार है. कुछ हजार रुपये में बने ये ड्रोन रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर हमला करते हैं. मॉस्को, तेल भंडारण, रडार स्टेशन- सब पर हमले हो चुके हैं. लेकिन अब रूस इन्हीं ड्रोन को पलटकर यूक्रेन के खिलाफ और नाटो देशों पर इस्तेमाल कर रहा है.
रूस का मुख्य केंद्र कालिनिनग्राद में है, जहां से बहुत शक्तिशाली ट्रांसमीटर लगातार GPS सिग्नल बाधित कर रहा है. रूस ने सैटेलाइट से भी जैमिंग करने की क्षमता विकसित कर ली है. इसका मकसद सिर्फ ड्रोन मारना नहीं, बल्कि नाटो में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना और गठबंधन की एकता को तोड़ना है.
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस बिना सीधे हमला किए नाटो की ताकत और एकता की परीक्षा ले रहा है. यूक्रेन भी तैयार है. अब वह फाइबर ऑप्टिक ड्रोन (तार से जुड़े) और AI गाइडेड ड्रोन (कैमरे और मैप से चलने वाले) बना रहा है, जो GPS पर निर्भर नहीं होते और जैमिंग से बच सकते हैं.
रूस की यह नई तकनीक युद्ध के रूप को बदल रही है. सस्ते ड्रोन अब दुश्मन के हथियार बन सकते हैं. यूरोप और नाटो देशों के लिए यह नई चुनौती है. यदि रूस पर कोई लागत या सजा नहीं लगाई गई, तो यह खतरा और बढ़ेगा.
ऋचीक मिश्रा