पाकिस्तान ने किया नई तैमूर मिसाइल का परीक्षण, टारगेट को भेदने में रही नाकाम

पाकिस्तान वायुसेना ने स्वदेशी तैमूर एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया. 600 किमी रेंज वाली यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन की एयर डिफेंस से बच सकती है. लेकिन परीक्षण के दौरान मिसाइल टारगेट एरिया में सटीकता से नहीं गिरी. अब सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का मजाक उड़ रहा है.

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ये है पाकिस्तान की तैमूर मिसाइल जिसने टारगेट मिस कर दिया. (Photo: X) ये है पाकिस्तान की तैमूर मिसाइल जिसने टारगेट मिस कर दिया. (Photo: X)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 04 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:31 PM IST

पाकिस्तान वायुसेना (PAF) ने 3 जनवरी को स्वदेशी रूप से विकसित तैमूर (Taimoor) एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल का सफल फ्लाइट टेस्ट किया. इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इसे राष्ट्रीय एयरोस्पेस और रक्षा क्षमताओं में एक बड़ा मील का पत्थर बताया. यह मिसाइल दुश्मन के हवाई क्षेत्र में घुसे बिना गहरे अंदर लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकती है. हालांकि सोशल मीडिया पर खबरें चल रही हैं कि मिसाइल ने अपना टारगेट मिस कर दिया. 

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तैमूर मिसाइल की विशेषताएं

तैमूर एक आधुनिक सबसॉनिक क्रूज मिसाइल है, जो लड़ाकू विमान से लॉन्च की जाती है. इसकी मुख्य खूबियां...

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  • रेंज: 600 किलोमीटर तक.
  • लक्ष्य: जमीन और समुद्र दोनों पर सटीक हमला (हाई प्रिसिजन). 
  • वारहेड: कन्वेंशनल (सामान्य विस्फोटक), लेकिन जरूरत पड़ने पर अन्य विकल्प संभव.
  • नेविगेशन और गाइडेंस: स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सिस्टम, जिसमें इनर्शियल, जीपीएस, टेरेन रेफरेंसिंग और इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर शामिल.
  • उड़ान प्रोफाइल: बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान (टेरेन हगिंग और सी स्किमिंग), जिससे दुश्मन की एयर डिफेंस और मिसाइल सिस्टम से बच सकती है.
  • वजन: लगभग 1200 किलोग्राम.
  • विकास: ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूशंस (जीआईडीएस) और एयर वेपंस कॉम्प्लेक्स द्वारा. 2022 में IDEAS प्रदर्शनी में पहली बार दिखाई गई.

यह मिसाइल यूरोपीय स्टॉर्म शैडो/स्कैल्प (SCALP) की तरह है, जिसे भारत राफेल लड़ाकू विमानों पर इस्तेमाल करता है. तैमूर को भारत की इसी मिसाइल का मुकाबला करने के लिए देखा जा रहा है. परीक्षण में मिसाइल ने सफलतापूर्वक अलग हुई, इंजन स्टार्ट किया, उड़ान भरी और लक्ष्य को हिट किया. पर जो वीडियो सोशल मीडिया पर पड़े हैं, उसमें मिसाइल टारगेट मिस करती दिख रही है.

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परीक्षण की डिटेल और प्रतिक्रियाएं

परीक्षण वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मौजूदगी में हुआ. एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू ने टीम की तारीफ की और कहा कि यह तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है.

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बधाई दी. यह मिसाइल पाकिस्तान वायुसेना की कन्वेंशनल डिटरेंस (सामान्य युद्ध निरोध) और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाएगी.

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भारत की स्कैल्प मिसाइल से तुलना

उपयोगकर्ता ने भारत की स्कैल्प सिस्टम का जिक्र किया, जो फ्रांस की MBDA कंपनी की बनाई है. भारत ने राफेल सौदे में यह मिसाइल खरीदी (अरबों डॉलर खर्च). स्कैल्प भी 500-600 किमी रेंज वाली, लो-एल्टीट्यूड उड़ान करने वाली और स्टेल्थ फीचर्स वाली है. पाकिस्तान तैमूर को स्वदेशी विकसित करके कम लागत में समान क्षमता हासिल कर रहा है. 

तैमूर को JF-17, J-10CE या मिराज जैसे विमानों पर इंटीग्रेट किया जाएगा. यह पाकिस्तान की लंबी दूरी की सटीक हमले की क्षमता को मजबूत करेगा. दक्षिण एशिया में रक्षा संतुलन पर इसका असर पड़ेगा, क्योंकि भारत भी अपनी मिसाइलें (जैसे ब्रह्मोस, प्रलय) विकसित कर रहा है.

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