ईरान क्या आसमानी युद्ध में लाचार होता जा रहा? पहले नेतन्याहू, अब ट्रंप का दावा... किसके कंट्रोल में है आसमान?

ईरान और इज़रायल के बीच युद्ध में इज़रायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को नष्ट किया. ट्रंप का दावा है कि ईरान का आसमान अमेरिका के कंट्रोल में है. नेतन्याहू ने ईरान की सत्ता अस्थिर करने की बात कही. ईरान की फतह-1 मिसाइलें जवाब दे रही हैं, लेकिन उसकी हवाई रक्षा कमजोर है. यह युद्ध क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा सकता है.

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डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू ने दावा किया है इराक के आसमान में उनका कंट्रोल है. (फोटोः IDF/AFP) डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू ने दावा किया है इराक के आसमान में उनका कंट्रोल है. (फोटोः IDF/AFP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2025,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

ईरान और इज़रायल के बीच जून 2025 में शुरू हुआ युद्ध मध्य पूर्व को एक खतरनाक मोड़ पर ले आया है. इज़रायल का ऑपरेशन राइज़िंग लायन और ईरान का ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3 इस क्षेत्र को आग की लपटों में लपेट रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का आसमान अब अमेरिका के कंट्रोल में है. इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा. लेकिन क्या ईरान वाकई आसमानी युद्ध में लाचार हो रहा है? आइए, इस जटिल स्थिति को समझते हैं.

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युद्ध का पृष्ठभूमि: इज़रायल vs ईरान

13 जून 2025 को इज़रायल ने ऑपरेशन राइज़िंग लायन शुरू किया, जिसका मकसद ईरान के परमाणु ठिकानों (नतांज़, फोर्डो, और इस्फहान) और सैन्य अड्डों को नष्ट करना था. इसके जवाब में, ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3 के तहत इज़रायल पर 150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें, जिनमें फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइलें शामिल थीं, दागीं. इस जंग में अब तक...

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  • ईरान में नुकसान: 224 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें 70 महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. 1481 लोग घायल हुए.
  • इज़रायल में नुकसान: 24 लोग मारे गए. 600 से अधिक घायल हुए.
  • निशाने: इज़रायल ने ईरान के नतांज और इस्फहान के परमाणु केंद्रों, मिसाइल उत्पादन साइटों, रडार और हवाई रक्षा तंत्र को नष्ट किया. ईरान ने तेल अवीव, हाइफा और नेवातिम एयरबेस को निशाना बनाया.

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ईरान की हवाई ताकत: कितनी कमजोर?

ईरान की वायुसेना को कमजोर माना जाता है, और इसके पीछे कई कारण हैं...

  • पुराने विमान: ईरान के पास 1970 के दशक में सोवियत संघ से खरीदे गए 50 मिग-29 और कुछ F-4 और F-5 विमान हैं. इनका रखरखाव मुश्किल है, क्योंकि दशकों से लगे प्रतिबंधों ने स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति रोकी है.
  • रडार और हवाई रक्षा का नुकसान: इज़रायल ने 25 अक्टूबर 2024 को ईरान के रडार और हवाई रक्षा तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया. इससे ईरान की आसमान में आने वाली मिसाइलों को ट्रैक करने और रोकने की क्षमता कमजोर हुई है.
  • सीमित हवाई रक्षा: ईरान की S-300 और स्वदेशी बावर-373 हवाई रक्षा प्रणालियां इज़रायल के F-35 स्टील्थ जेट्स और ड्रोनों के खिलाफ कम प्रभावी साबित हुई हैं.

इन कमजोरियों के कारण, ईरान हवाई युद्ध में इज़रायल और अमेरिका के सामने कमज़ोर दिखता है. इज़रायल के पास F-35, F-16 और उन्नत ड्रोन हैं, जिन्होंने ईरान के ठिकानों पर सटीक हमले किए.

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ट्रंप का दावा- ईरान का आसमान हमारे कंट्रोल में 

17 जून 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर तीन पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने दावा किया कि ईरान के आसमान पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है. हमें पता है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई कहां छिपे हैं. वह आसान निशाना हैं, लेकिन हम अभी उन्हें नहीं मारेंगे. ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना होगा.

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ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के F-16, F-22 और F-35 जेट्स ने ईरान के हवाई क्षेत्र में "निरंकुश ताकत" स्थापित किया है. इसके पीछे कई तथ्य हैं...

  • अमेरिकी नौसैनिक तैनाती: ट्रंप ने मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोत और नौसैनिक बेड़े तैनात किए, जो दक्षिण चीन सागर से स्थानांतरित किए गए. ये बेड़े न केवल इज़रायल की रक्षा के लिए हैं, बल्कि ईरान की जवाबी कार्रवाई को रोकने के लिए भी हैं.
  • मिसाइल रक्षा में मदद: अमेरिका ने इज़रायल के आयरन डोम और एरो-3 सिस्टम के साथ मिलकर ईरान की मिसाइलों को रोकने में सहायता की.
  • खामेनेई पर नज़र: ट्रंप का दावा है कि अमेरिका को खामेनेई के ठिकाने का पता है, जो खुफिया जानकारी और ड्रोन निगरानी का संकेत देता है.

नेतन्याहू का दावा- ईरान को भारी कीमत चुकानी होगी

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना और खामेनेई की सत्ता को अस्थिर करना उनका लक्ष्य है. उनके दावों के प्रमुख बिंदु...

  • परमाणु ठिकानों पर हमले: इज़रायल ने नतांज के सेंट्रीफ्यूज और इस्फहान की यूरेनियम प्रोसेसिंग सुविधाओं को नष्ट किया. IAEA के अनुसार, नतांज की भूमिगत सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है, हालांकि फोर्डो पर बड़ा असर नहीं हुआ.
  • सैन्य नेतृत्व पर हमले: इज़रायल ने ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों, जैसे मेजर जनरल गुलाम अली राशिद को निशाना बनाया.
  • सत्ता परिवर्तन का मकसद: नेतन्याहू ने कहा कि ईरान में अशांति पैदा करके खामेनेई की सत्ता को कमजोर किया जा सकता है.

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क्या ईरान वाकई लाचार है?

ईरान की कमजोरियां स्पष्ट हैं, लेकिन वह पूरी तरह लाचार नहीं है. कुछ तथ्य... 

मिसाइल ताकत: ईरान की फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइल (1,400 किमी रेंज, मैक 13-15 गति) ने इज़रायल के नेवातिम एयरबेस और हाइफा की तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचाया. ईरान ने 17 जून 2025 को इज़रायल पर 25 मिसाइलें दागीं.

जवाबी रणनीति: ईरान पहले ड्रोन और छोटी मिसाइलें दागता है, जिससे इज़रायल का आयरन डोम व्यस्त हो जाता है. फिर हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला करता है.

क्षेत्रीय सहयोगी: हिजबुल्लाह, हूती विद्रोही और सीरियाई मिलिशिया ईरान का समर्थन करते हैं, हालांकि ये समूह कमजोर हो चुके हैं.

परमाणु क्षमता: IAEA के अनुसार, ईरान के पास 400 किलोग्राम उच्च शुद्धता वाला यूरेनियम है, जिससे वह कुछ हफ्तों में 10 परमाणु बम बना सकता है.

हालांकि, ईरान की हवाई रक्षा और वायुसेना की सीमाएं उसे रक्षात्मक स्थिति में रखती हैं. इज़रायल और अमेरिका की उन्नत तकनीक और खुफिया जानकारी ने ईरान के हवाई क्षेत्र में उनकी स्थिति को कमजोर किया है.

ट्रंप और नेतन्याहू के दावों का मतलब

अमेरिकी दबाव: ट्रंप का आसमान पर कंट्रोल और बिना शर्त आत्मसमर्पण का दावा ईरान पर मनोवैज्ञानिक और सैन्य दबाव बनाने की रणनीति है. यह दिखाता है कि अमेरिका इज़रायल का खुलकर समर्थन कर रहा है. ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मजबूर करना चाहता है.

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सत्ता परिवर्तन का इरादा: नेतन्याहू का दावा कि ईरान में तख्तापलट से मध्य पूर्व बदल जाएगा यह संकेत देता है कि इज़रायल न केवल ईरान की सैन्य क्षमता को नष्ट करना चाहता है, बल्कि खामेनेई की सरकार को अस्थिर करना भी चाहता है.

अमेरिका की उलझन: ट्रंप ने पहले मध्य पूर्व से अमेरिका को युद्धों से बाहर रखने का वादा किया था, लेकिन अब वह इज़रायल के साथ खुलकर खड़े हैं. यह उनके समर्थकों के बीच विवाद पैदा कर सकता है, क्योंकि कई अमेरिकी मध्य पूर्व में नए युद्ध के खिलाफ हैं.

ईरान की रणनीति और भविष्य

ईरान ने ट्रंप के परमाणु समझौते के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. अपने मिसाइल कार्यक्रम को तेज किया है. खामेनेई ने कहा कि हम इज़रायल को कड़ा जवाब देंगे. युद्ध शुरू हो चुका है. लेकिन ईरान की सीमाएं स्पष्ट हैं...

  • मिसाइल भंडार: लगातार हमलों से ईरान का मिसाइल स्टॉक कम हो रहा है.
  • आर्थिक दबाव: प्रतिबंधों और युद्ध के नुकसान ने ईरान की अर्थव्यवस्था को और कमजोर किया.
  • आंतरिक अशांति: इज़रायल के हमलों से ईरान में नागरिक असंतोष बढ़ सकता है.

ईरान का आसमान पूरी तरह अमेरिका और इज़रायल के कंट्रोल में नहीं है, लेकिन उनकी उन्नत तकनीक और रणनीति ने ईरान की हवाई रक्षा को कमजोर किया है. ट्रंप और नेतन्याहू के दावे मनोवैज्ञानिक दबाव और सैन्य ताकत का प्रदर्शन हैं, जिनका मकसद ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने और सत्ता परिवर्तन के लिए मजबूर करना है. ईरान की मिसाइलें और क्षेत्रीय सहयोगी अभी भी उसे जवाबी ताकत देते हैं. यह युद्ध मध्य पूर्व को और अस्थिर कर सकता है. इसका अंत अभी अनिश्चित है.

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