स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान ने अमेरिकी युद्धपोत पर दागी दो मिसाइलें, पीछे हटा वॉरशिप

ईरान ने दावा किया कि उसके मिसाइलों ने जास्क द्वीप के पास अमेरिकी नौसेना के फ्रिगेट वॉरशिप पर हमला किया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की कोशिश में चेतावनी न मानने पर दो मिसाइलें दागी गईं. जहाज को पीछे हटना पड़ा.

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ईरान ने अमेरिकी युद्धपोत पर जास्क द्वीप के पास मिसाइलों से हमला किया है. (Photo: Repesentational/US Centcom) ईरान ने अमेरिकी युद्धपोत पर जास्क द्वीप के पास मिसाइलों से हमला किया है. (Photo: Repesentational/US Centcom)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:36 PM IST

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना का एक फ्रिगेट वॉरशिप पर जास्क द्वीप के पास दो मिसाइलों से हमला किया. ईरान का कहना है कि यह जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसने IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया. अमेरिका ने कहा कि ऐसा कोई हमला नहीं हुआ है. अगर ऐसा कोई हमला होता तो अमेरिका भी करारा जवाब देता. फिलहाल आधिकारिक पुष्टि दोनों तरफ से नहीं आई है. 

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ईरान ने आरोप लगाया कि जहाज को अनुमति लिए बिना इलाके में घुसने की कोशिश की गई थी. अमेरिकी फ्रिगेट ने ईरानी अधिकारियों की चेतावनी के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की कोशिश की. इसके जवाब में ईरानी बलों ने दो मिसाइलें दाग दीं. ईरान का दावा है कि हमले के बाद जहाज को पीछे हटना पड़ा. ईरान इसे अपनी समुद्री सीमा की रक्षा का हिस्सा बता रहा है.

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यह घटना जास्क द्वीप के पास की बताई जा रही है. जास्क ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुहाने के करीब है. यह इलाका दुनिया के तेल निर्यात का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है. ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि विदेशी युद्धपोतों को उसके जल क्षेत्र से गुजरने के लिए उसकी अनुमति लेनी चाहिए.

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अभी तक क्या जानकारी है?

ईरानी दावे के अनुसार दो मिसाइलें जहाज पर लगीं, लेकिन जहाज को हुए नुकसान या किसी हताहत की कोई जानकारी नहीं दी गई है. अमेरिकी नौसेना या अमेरिकी सरकार की तरफ से इस घटना की अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है. दोनों तरफ से आधिकारिक बयान का इंतजार है.

यह दावा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पहले से ही तनाव चल रहा है. अमेरिका 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत तटस्थ व्यापारिक जहाजों को निकालने की कोशिश कर रहा है. ईरान इस इलाके पर अपना नियंत्रण बताता है. विदेशी वॉरशिप की आवाजाही को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है.

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अगर ईरान का यह दावा सही साबित होता है तो यह अमेरिका-ईरान तनाव को और बढ़ा सकता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का एक चौथाई तेल गुजरता है. अगर यहां युद्ध जैसी स्थिति बनी रही तो वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होगा.

ईरान इसे अपनी समुद्री सीमा की सफल सुरक्षा बता रहा है, जबकि अमेरिका अभी चुप्पी साधे हुए है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं क्षेत्र में बड़े संघर्ष का कारण बन सकती हैं. फिलहाल दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटना पर नजर रखे हुए है. यह घटना दिखाती है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शांति बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है. आगे की जांच और आधिकारिक बयानों से ही पूरी सच्चाई सामने आएगी.

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