ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को पूरी तरह अपग्रेड कर लिया है. ईरान की सेना के प्रमुख मेजर जनरल अब्दोलरहीम मूसावी ने IRGC (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की एक अंडरग्राउंड फैसिलिटी के उद्घाटन के दौरान यह खुलासा किया.
उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर बनी सभी मिसाइलों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया गया है, जिससे ईरान की रक्षा क्षमता बढ़ गई है. यह अपग्रेड पिछले जून में इजराइल के साथ 12 दिनों के युद्ध से सीखे सबकों के आधार पर किया गया है.
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घोषणा की मुख्य बातें
अपग्रेड के पहलू: मेजर जनरल मूसावी के अनुसार, मिसाइलों को सभी तकनीकी क्षेत्रों में सुधार किया गया है, जैसे सटीकता (एक्यूरेसी), रेंज और सॉलिड फ्यूल तकनीक. अब ये मिसाइलें ज्यादा तेज और सटीक हमला कर सकती हैं.
रक्षात्मक से आक्रामक रुख: ईरान अब डिफेंसिव नीति से हटकर आक्रामक डॉक्ट्रिन पर जोर दे रहा है. इसका मतलब है कि किसी भी खतरे पर तेजी से जवाबी हमला किया जाएगा.
मिसाइलों की संख्या और रेंज: ईरान के पास मध्य पूर्व में सबसे बड़ा शस्त्रागार है – 2000 से 3000 मिसाइलें. इनकी रेंज 2000 किलोमीटर तक है, जो इजरायल सहित कई देशों को निशाना बना सकती है.
अंडरग्राउंड फैसिलिटी: यह घोषणा आईआरजीसी की एक नई भूमिगत फैसिलिटी के उद्घाटन पर की गई, जो मिसाइलों को छिपाने और सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई है.
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जून 2025 का युद्ध
पिछले साल जून में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों का युद्ध हुआ था. इस युद्ध में ईरान की मिसाइलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन कुछ कमजोरियां भी सामने आईं. युद्ध से सीखते हुए ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक को अपग्रेड किया. ईरान का दावा है कि ये बदलाव उसकी डिटरेंस को मजबूत करेंगे, यानी दुश्मन हमला करने से पहले सोचेगा.
ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें मुख्य रूप से घरेलू उत्पादन हैं, जैसे फतह, शहाब और खोर्रमशहर सीरीज. ये सॉलिड फ्यूल वाली मिसाइलें हैं, जो लॉन्च करने में कम समय लेती हैं. छिपाना आसान होता है.
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिका-ईरान के बीच ओमान में अप्रत्यक्ष वार्ताएं चल रही हैं. अमेरिका ईरान से मिसाइल कार्यक्रम पर लगाम लगाने की मांग कर रहा है. क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहे हैं, खासकर इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच. ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम सिर्फ रक्षा के लिए है, लेकिन पश्चिमी देश इसे खतरा मानते हैं.
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स्वतंत्र विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान का शस्त्रागार मध्य पूर्व में सबसे बड़ा है, जो सऊदी अरब, इजरायल और यूरोप के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है. अपग्रेड से इन मिसाइलों की सटीकता बढ़ गई है, जिससे युद्ध की स्थिति में ज्यादा नुकसान हो सकता है.
आगे क्या?
यह अपग्रेड ईरान की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव है. इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है. अमेरिका और इजरायल ने चिंता जताई है, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा बताता है. ओमान में चल रही वार्ताएं इस मुद्दे पर केंद्रित हैं, जहां अमेरिका ईरान से मिसाइल विकास रोकने की अपील कर रहा है. यह घोषणा दिखाती है कि ईरान अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है.
ऋचीक मिश्रा