ईरान में न्यूक्लियर रेडिएशन का कितना खतरा... क्या ये US-इजरायल के हमले से हुआ?

ईरान में न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा चर्चा में है. IAEA ने चेतावनी दी कि हमलों से न्यूक्लियर सेफ्टी जोखिम में है, लेकिन अभी कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ है. मुख्य साइट्स हैं- नतांज, फोर्डो, इस्फहान, परचिन. अमेरिका-इजरायल हमलों से सेंट्रीफ्यूज टूटने पर UF6 गैस लीक हो सकती है. खतरा लोकलाइज्ड है. IAEA मॉनिटरिंग कर रहा है.

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IAEA ने ईरान ने न्यूक्लियर रेडिएशन के खतरे का अलर्ट जारी किया है. (File Photo: Getty) IAEA ने ईरान ने न्यूक्लियर रेडिएशन के खतरे का अलर्ट जारी किया है. (File Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

ईरान में न्यूक्लियर रेडिएशन की बातें चल रही हैं. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के डायरेक्टर जनरल रफाएल ग्रॉसी ने 2 मार्च 2026 को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि वेस्ट एशिया में चल रहे सैन्य हमलों से न्यूक्लियर सेफ्टी का खतरा बहुत बढ़ गया है. रेडियोलॉजिकल रिलीज (रेडिएशन लीक) की संभावना को नकारा नहीं जा सकता, जिससे बड़े शहरों जितने इलाके खाली करने पड़ सकते हैं.

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लेकिन IAEA ने साफ कहा है कि अभी तक ईरान के किसी भी न्यूक्लियर साइट पर कोई रेडिएशन लीक या बढ़ोतरी नहीं हुई है. पड़ोसी देशों में भी बैकग्राउंड रेडिएशन से ज्यादा कुछ नहीं मिला. ईरान के न्यूक्लियर प्लांट्स जैसे बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट, तेहरान रिसर्च रिएक्टर या अन्य फ्यूल साइकिल साइट्स पर कोई नुकसान या हमला नहीं हुआ है. IAEA ईरान के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है लेकिन अभी जवाब नहीं मिला है.

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रेडिएशन का खतरा ईरान में कहां-कहां है?

IAEA की रिपोर्ट और बयानों के मुताबिक अभी कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ है. खतरा सिर्फ संभावित है. ईरान के मुख्य न्यूक्लियर साइट्स जहां रेडिएशन का जोखिम हो सकता है वे हैं... 

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  • नतांज (Natanz): यूरेनियम संवर्धन का सबसे बड़ा प्लांट. यहां सेंट्रीफ्यूज मशीनें हैं. अगर हमला होता है तो UF6 गैस (यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड) लीक हो सकती है जो जहरीली और हल्की रेडियोएक्टिव है.  
  • फोर्डो (Fordow): पहाड़ के अंदर गहरा बंकर. बहुत संवर्धित यूरेनियम यहां स्टोर होता है.   
  • इस्फहान (Isfahan): यूरेनियम कन्वर्जन और फ्यूल फैब्रिकेशन साइट. यहां हाईली एनरिच्ड यूरेनियम अंडरग्राउंड टनल में रखा है. IAEA ने यहां इंस्पेक्शन की मांग की है.  
  • अराक (Arak): हेवी वॉटर रिएक्टर साइट.  
  • परचिन (Parchin): मिलिट्री रिसर्च साइट जहां न्यूक्लियर से जुड़े टेस्ट होने का शक है.  
  • बुशहर (Bushehr): एकमात्र ऑपरेशनल न्यूक्लियर पावर प्लांट.

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अभी तक इनमें से किसी पर भी हमला या नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है. IAEA ने कहा कि कोई रेडियोलॉजिकल इम्पैक्ट नहीं मिला. लेकिन बड़े हमलों में इन साइट्स को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे रेडिएशन हो सकता है.

क्या यह अमेरिका-इजरायल के हमलों की वजह से है?

अमेरिका और इजरायल ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (28 फरवरी 2026 से शुरू) में ईरान पर हमले किए हैं. इनमें मिलिट्री टारगेट, मिसाइल साइट्स, कमांड सेंटर और न्यूक्लियर से जुड़े कुछ इलाके निशाने पर हैं. लेकिन IAEA के अनुसार अभी तक किसी भी न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन (जैसे बुशहर, नतांज, फोर्डो, इस्फहान) पर सीधा हमला या नुकसान नहीं हुआ है. ईरान ने दावा किया कि नतांज पर हमला हुआ लेकिन IAEA ने इसकी पुष्टि नहीं की.

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2025 के पिछले हमलों में नतांज और इस्फहान को नुकसान हुआ था लेकिन रेडिएशन लीक नहीं हुआ. IAEA का कहना है कि हमले से न्यूक्लियर सेफ्टी का खतरा बढ़ गया है क्योंकि साइट्स पर हमला हो सकता है.  

रेडिएशन क्यों हो सकता है और खतरा कितना बड़ा?

रेडिएशन का खतरा इसलिए है क्योंकि ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर सेंट्रीफ्यूज और यूरेनियम स्टोर है. अगर बम गिरे तो...   

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  • सेंट्रीफ्यूज टूट सकते हैं और UF6 गैस लीक हो सकती है. यह जहरीली है और सांस या खाने से नुकसान पहुंचाती है.  
  • हाईली एनरिच्ड यूरेनियम फैल सकता है लेकिन यह चेर्नोबिल जैसा बड़ा मेल्टडाउन नहीं होगा क्योंकि ईरान में कोई बड़ा रिएक्टर नहीं चला रहा.  
  • अगर बुशहर पावर प्लांट पर हमला हुआ तो रिएक्टर को नुकसान हो सकता है लेकिन IAEA कहता है कि अभी ऐसा नहीं हुआ है. 

खतरा कितना बड़ा? 

IAEA का कहना है कि अगर रेडियोलॉजिकल रिलीज हुई तो बड़े इलाके खाली करने पड़ सकते हैं. लेकिन अभी कोई लीक नहीं है. पड़ोसी देशों में रेडिएशन नॉर्मल है. खतरा लोकलाइज्ड (सिर्फ साइट के आसपास) रह सकता है, पूरे देश या क्षेत्र में फैलने की संभावना कम है. IAEA ने सभी पक्षों से संयम बरतने और डिप्लोमेसी की अपील की है. स्थिति चिंताजनक है लेकिन अभी पैनिक करने की जरूरत नहीं. 

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