पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स कितनी बड़ी है? भारत के लिए कैसा है चैलेंज

पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. पाक की ARFC में फतह सीरीज (750-1000 किमी) तेजी से बढ़ रही है, जबकि चीन की PLARF दुनिया की सबसे बड़ी है- 1250+ मिसाइलें, 600+ परमाणु वॉरहेड और हाइपरसोनिक तकनीक है. भारत की मिसाइलें (अग्नि-5, ब्रह्मोस) मजबूत हैं, लेकिन संख्या और टेक्नोलॉजी में पीछे हैं. दो-मोर्चे पर जंग का खतरा गंभीर परिणाम ला सकता है.

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चीन के रॉकेट फोर्स से टेस्ट के दौरान फायर होती मिसाइल. (File Photo: Reuters) चीन के रॉकेट फोर्स से टेस्ट के दौरान फायर होती मिसाइल. (File Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:51 AM IST

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां पाकिस्तान और चीन अपनी मिसाइल ताकत को तेजी से मजबूत कर रहे हैं. SIPRI 2025, अमेरिकी पेंटागन की 2025 रिपोर्ट, CSIS और अन्य स्रोतों के अनुसार, दोनों देशों की रॉकेट और मिसाइल फोर्स भारत के लिए गंभीर खतरा बनी हुई हैं. ये मिसाइलें परमाणु या सामान्य हथियार ले जा सकती हैं. दो-मोर्चे पर युद्ध की स्थिति में भारत की सुरक्षा को चुनौती दे सकती हैं. 

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पाकिस्तान की रॉकेट-मिसाइल फोर्स: नई ARFC की शुरुआत

पाकिस्तान ने अगस्त 2025 में आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) बनाई, जो मुख्य रूप से सामान्य (नॉन-न्यूक्लियर) मिसाइलों और रॉकेट्स पर फोकस करती है. ये फैसला मई 2025 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद लिया गया. जहां पाकिस्तान को लंबी दूरी के सटीक हमलों की कमी महसूस हुई. ARFC चीन की PLARF की तर्ज पर बनाई गई है. इसमें फतह सीरीज की मिसाइलें प्रमुख हैं. 

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पाकिस्तान की फोर्स छोटी लेकिन तेजी से बढ़ रही है. अनुमानित 100-200 लॉन्चर हैं, जिनमें SRBM और MRBM शामिल हैं. SIPRI 2025 करीब 170 परमाणु वॉरहेड हैं.

प्रमुख मिसाइलें...

  • फतह-1 (140 किमी रेंज), फतह-2 (250-400 किमी), फतह-4 (750 किमी क्रूज मिसाइल, 2025 में टेस्ट) और फतह-5 (2026 में संभावित टेस्ट, 1000 किमी रेंज).
  • अन्य: गजनवी (290 किमी), शाहीन-3 (2750 किमी, पूरे भारत को कवर).

ये मिसाइलें सटीक, मोबाइल और सैचुरेशन अटैक (बहुत सारी एक साथ) के लिए डिजाइन की गई हैं. पाकिस्तान चीन से टेक्नोलॉजी ले रहा है, जैसे PL-15 मिसाइलें.

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चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स: दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइल फोर्स है. पेंटागन 2025 रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 1250+ ग्राउंड-बेस्ड बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं. परमाणु वॉरहेड 600+ हैं, जो 2030 तक 1000+ हो सकते हैं.

मुख विशेषताएं

900+ छोटी दूरी (SRBM), 1300 मध्यम दूरी (MRBM), 500 इंटरमीडिएट (IRBM), 400+ ICBM (जैसे DF-41, 12,000+ किमी रेंज).
हाइपरसोनिक मिसाइलें (DF-17, 5+ मैक स्पीड), एंटी-शिप और सटीक गाइडेंस वाली. नए साइलो (320+), सबमरीन-लॉन्च JL-3 और स्पेस-बेस्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम.

चीन की फोर्स मात्रा, टेक्नोलॉजी और रेंज में बहुत आगे है, जो भारत के उत्तरी इलाकों को आसानी से निशाना बना सकती है.

भारत की मिसाइल फोर्स: स्थिति और तुलना

भारत की मिसाइल फोर्स मजबूत है, लेकिन संख्या और कुछ टेक्नोलॉजी में पीछे. SIPRI 2025 के अनुसार परमाणु वॉरहेड 180 हैं.

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प्रमुख मिसाइलें...

  • अग्नि सीरीज: अग्नि-1 (700 किमी), अग्नि-5 (5000+ किमी, MIRV क्षमता).
  • ब्रह्मोस (सुपरसोनिक क्रूज, 290-800 किमी), प्रलय (500 किमी).
  • कुल लॉन्चर 200-300+.

तुलना 

  • पाकिस्तान से: भारत क्वालिटी और रेंज में आगे, लेकिन पाकिस्तान की नई ARFC सैचुरेशन अटैक से चुनौती दे सकती है.
  • चीन से: चीन की संख्या (हजारों मिसाइलें) और हाइपरसोनिक टेक भारत से बहुत आगे. भारत की अग्नि-5 पूरे चीन को कवर करती है, लेकिन मात्रा में कमी है.

भारत के लिए दो-मोर्चे की चुनौती

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पाकिस्तान पश्चिम से सीधा खतरा है- ARFC और फतह सीरीज सीमा पर तेज हमले कर सकती हैं. 2025 संघर्ष में पाकिस्तान ने मिसाइलों का इस्तेमाल किया. चीन उत्तर से (तिब्बत) पूरे भारत को निशाना बना सकता है. हाइपरसोनिक मिसाइलें S-400 जैसी डिफेंस को बायपास कर सकती हैं.

दोनों मिलकर हमला करें तो भारत को दो मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा- मिसाइलों की बाढ़ से डिफेंस ओवरलोड हो सकता है. भारतीय सेना प्रमुख ने भी रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की जरूरत बताई है.

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भारत की प्रतिक्रिया और भविष्य

भारत अपनी इंडिजेनस मिसाइलों (अग्नि वेरिएंट, हाइपरसोनिक टेस्ट), S-400/S-500 डिफेंस और ब्रह्मोस विस्तार पर काम कर रहा है. रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की योजना है. लेकिन पाकिस्तान-चीन की बढ़ती ताकत से मिसकैलकुलेशन का खतरा है, जो छोटे संघर्ष को बड़ा युद्ध बना सकता है.

कुल मिलाकर, पाकिस्तान की फोर्स फोकस्ड और सीधी चुनौती है, जबकि चीन की विशाल और एडवांस्ड. भारत को अपनी डिफेंस को लगातार मजबूत करना होगा ताकि रणनीतिक संतुलन बना रहे.

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