पाकिस्तान में कुल आबादी का लगभग 10-15% शिया मुसलमान हैं, जबकि 85-90% सुन्नी हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने शिया उलेमा से एक इफ्तार मीटिंग में कड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर आप ईरान से इतना प्यार करते हैं तो ईरान चले जाइए.
यह बयान रावलपिंडी में 19 मार्च 2026 को दिया गया. शिया समुदाय ने इसे अपमानजनक और सांप्रदायिक बताया. ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत और युद्ध के बाद पाकिस्तान में शिया समुदाय ने ईरान के समर्थन में प्रदर्शन किए थे. मुनीर का बयान इन्हीं प्रदर्शनों के बाद आया. शिया नेता कह रहे हैं कि आर्मी चीफ शिया समुदाय को देशद्रोही बता रहे हैं.
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मुनीर ने ऐसा बयान क्यों दिया?
ईरान युद्ध में पाकिस्तान सऊदी अरब और गल्फ देशों की तरफ झुक रहा है. पाकिस्तान ने ईरान के हमलों की निंदा की और सऊदी के साथ खड़ा है. मुनीर का बयान इसी रणनीति का हिस्सा लगता है. पाकिस्तान सरकार और आर्मी ईरान समर्थक प्रदर्शनों को नियंत्रित करना चाहते हैं ताकि अंदरूनी सांप्रदायिक हिंसा न भड़के.
मुनीर ने शिया उलेमा को चेतावनी दी कि विदेशी देश (ईरान) के प्रति वफादारी पाकिस्तान की एकता के खिलाफ है. कुछ शिया नेता कह रहे हैं कि यह बयान शिया समुदाय को डराने के लिए है. पाकिस्तान में पहले भी सुन्नी-शिया तनाव रहा है, लेकिन ईरान युद्ध ने इसे और भड़का दिया है.
पाकिस्तान में संप्रदायिक तनाव बढ़ेगा या नहीं?
पाकिस्तान 90% सुन्नी बहुल देश है. शिया अल्पसंख्यक (10-15%) हमेशा से संवेदनशील रहे हैं. मुनीर के बयान के बाद शिया समुदाय में गुस्सा है. कई जगहों पर छोटे-मोटे प्रदर्शन हो रहे हैं. एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि अगर आर्मी और सरकार सख्ती बढ़ाती रही तो सांप्रदायिक हिंसा बढ़ सकती है.
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पाकिस्तान में पहले भी शिया मस्जिदों और प्रोसेशन पर हमले हो चुके हैं. ईरान युद्ध के दौरान अगर शिया समुदाय ईरान का खुला समर्थन करता रहा तो आर्मी सख्ती कर सकती है. लेकिन अभी तक बड़े पैमाने पर हिंसा नहीं हुई है. सरकार पाकिस्तान फर्स्ट का नारा दे रही है. कह रही है कि कोई भी विदेशी देश की तरफदारी बर्दाश्त नहीं होगी.
ईरान पाकिस्तान पर हमला करेगा?
ईरान और पाकिस्तान की 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा है. दोनों देशों के बीच पहले भी तनाव रहा है, लेकिन ईरान पाकिस्तान पर सीधा हमला करने की स्थिति में नहीं है. पाकिस्तान परमाणु हथियार वाला देश है और उसकी सेना बहुत मजबूत है. ईरान अभी अमेरिका-इजरायल से जूझ रहा है.
पाकिस्तान ने ईरान को चेतावनी दी है कि गल्फ देशों पर हमले बंद करे. ईरान पाकिस्तान पर हमला करने की बजाय कूटनीति पर जोर दे रहा है. दोनों देशों के बीच अभी भी कुछ व्यापार और सीमा सुरक्षा को लेकर बातचीत चल रही है. एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान पाकिस्तान पर हमला करने का जोखिम नहीं उठाएगा क्योंकि इससे उसका दूसरा मोर्चा खुल जाएगा.
पाकिस्तान सऊदी अरब का साथ देगा?
पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ पुराना रक्षा समझौता है. सऊदी अगर ईरान से लड़ाई में फंसता है तो पाकिस्तान उसे सैन्य मदद दे सकता है. पाकिस्तान ने पहले ही सऊदी के साथ मिलकर बयान जारी किया है कि ईरान गल्फ देशों पर हमले रोकें. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सऊदी तेल और निवेश पर निर्भर है.
आर्मी चीफ मुनीर और सरकार सऊदी की तरफ झुक रही है. लेकिन पाकिस्तान ईरान से सीधी लड़ाई नहीं चाहता. वह कूटनीति से दोनों तरफ बैलेंस करने की कोशिश कर रहा है. अगर सऊदी ने मदद मांगी तो पाकिस्तान हवाई और लॉजिस्टिक सपोर्ट दे सकता है, लेकिन जमीन पर सैनिक नहीं भेजेगा.
ऋचीक मिश्रा