ईरान के मिसाइल कमांड सेंटर को अंधा करने के लिए अमेरिका ने तैनात किया खास अटैक प्लेन

अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ चल रहे ऑपरेशंस के लिए नया EA-37B Compass Call इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट तैनात कर दिया है. यह प्लेन दुश्मन की रेडियो, रडार, GPS और कम्युनिकेशन सिस्टम को पूरी तरह जाम कर सकता है. इससे अमेरिकी और इजरायली हमलों को और घातक बनाने में मदद मिलेगी.

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ये है अमेरिका का वो प्लेन जो ईरान को किसी भी तरह से कम्युनिकेट नहीं करने देगा. (Photo: Wiki/USAF) ये है अमेरिका का वो प्लेन जो ईरान को किसी भी तरह से कम्युनिकेट नहीं करने देगा. (Photo: Wiki/USAF)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:12 AM IST

अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों को मजबूत करने के लिए नया EA-37B Compass Call इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट तैनात कर दिया है. यूएस सेंट्रल कमांड ने इसकी आधिकारिक घोषणा की. ये प्लेन दुश्मन की कम्युनिकेशन, रडार और नेविगेशन सिस्टम को पूरी तरह बंद कर सकते हैं.

EA-37B Compass Call क्या है?

EA-37B Compass Call अमेरिकी वायुसेना का सबसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्लेन है. यह B-737 विमान पर आधारित है. इसमें खास इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए गए हैं. इसका मुख्य काम दुश्मन की रेडियो, रडार, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और GPS को बाधित करना है. इससे दुश्मन के विमान, मिसाइल और कमांड सेंटर अंधे और बहरे हो जाते हैं. यह प्लेन दुश्मन को बिना गोली चलाए भी युद्ध में कमजोर कर सकता है.

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ईरान के खिलाफ क्यों तैनात किया गया?

ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने इन प्लेनों को तुरंत तैनात किया है. ईरान के पास मजबूत बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हैं, जिन्हें रडार और सैटेलाइट से कंट्रोल किया जाता है. EA-37B इन सिस्टम को जाम करके ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को बेकार बना सकता है. इससे अमेरिकी और इजरायली विमानों को सुरक्षित हमला करने में आसानी होगी. सेंट्रल कमांड ने कहा कि ये प्लेन क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशंस को सीधा सपोर्ट करेंगे.

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यह प्लेन कैसे काम करता है?

EA-37B में लगे खास एंटीना और कंप्यूटर दुश्मन की रेडियो फ्रीक्वेंसी को पहचानकर उसे जाम कर देते हैं. यह रडार सिग्नल को रोक सकता है. GPS को गलत दिशा में भेज सकता है. कम्युनिकेशन लिंक तोड़ सकता है. एक ही प्लेन कई सौ किलोमीटर के दायरे में दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को प्रभावित कर सकता है. यह प्लेन दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर भी काम कर सकता है, लेकिन ज्यादातर सुरक्षित दूरी से ही ऑपरेट किया जाता है.

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यह तैनाती दिखाती है कि अमेरिका अब पारंपरिक हवाई हमलों के साथ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध पर भी पूरा जोर दे रहा है. ईरान के पास रूसी और चीनी तकनीक से बने रडार और मिसाइल सिस्टम हैं. EA-37B इन सभी को बेअसर करने में सक्षम है. इससे न सिर्फ ईरानी हमलों को रोका जा सकेगा, बल्कि अमेरिकी सेना को बिना ज्यादा नुकसान के अपना मिशन पूरा करने में मदद मिलेगी. 

अमेरिका द्वारा EA-37B Compass Call की तैनाती इस जंग को और भी आधुनिक बना रही है. अब युद्ध सिर्फ गोला-बारूद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल और रडार को जाम करने की लड़ाई भी शुरू हो गई है. यह प्लेन ईरान के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है. 

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