पाकिस्तान इन दिनों बहुत बड़ी मुसीबत में फंसा हुआ है. अफगानिस्तान के साथ खुली जंग शुरू हो गई है. उधर बलूचिस्तान में बीएलए (बलोच लिबरेशन आर्मी) रोज हमले कर रही है. सवाल उठ रहा है – क्या ये दोनों संकट मिलकर पाकिस्तान को तोड़ देंगे? आर्मी चीफ आसिम मुनीर की फौज पहले से ही थक चुकी है.
अफगानिस्तान के साथ जंग कितनी खतरनाक है?
21 फरवरी 2026 से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पक्तिया और खोस्त में भारी हवाई हमले शुरू किए. पाकिस्तान का कहना है – अफगानिस्तान में टीटीपी छिपकर हमारे देश में हमले करवा रहा है. तालिबान ने जवाब दिया. 26-27 फरवरी को अफगान लड़ाकों ने पाकिस्तानी बॉर्डर पोस्टों पर हमला किया.
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अफगानिस्तान का दावा – 40 पाक सैनिक मारे गए, कई पोस्ट कब्जे में लिए. पाकिस्तान ने फिर काबुल और कंधार पर बम बरसाए. रक्षा मंत्री ने कहा कि हम अब अफगानिस्तान के साथ ओपन वॉर में हैं. ये जंग सिर्फ सीमा तक नहीं है. पाकिस्तान को रोजाना गोलीबारी और मिसाइलों का खतरा है.
बीएलए के हमले – पाकिस्तान की फौज पहले से ही कमजोर
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है. यहां बीएलए नाम की संगठन सालों से अलगाव की लड़ाई लड़ रही है. जनवरी-फरवरी 2026 में बीएलए ने सबसे बड़े हमले किए. पुलिस स्टेशन, बैंक, सैन्य कैंप और घरों पर एक साथ हमले हुए. 30 से ज्यादा आम लोग और सैनिक मारे गए.
पाकिस्तानी आर्मी ने जवाब दिया और 200 से ज्यादा बीएलए लड़ाकों को मारने का दावा किया, लेकिन हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे. फौज को अब बलूचिस्तान में 24 घंटे अलर्ट रहना पड़ रहा है. सैनिक थक चुके हैं, हथियार और पैसे दोनों की कमी महसूस हो रही है.
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दोनों संकट मिलकर पाकिस्तान को क्यों तोड़ सकते हैं?
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
पाकिस्तानी और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अभी तो पाकिस्तान नहीं टूटेगा, लेकिन अगर ये जंग 2-3 महीने और चली तो बहुत बड़ा खतरा है. अमेरिका और चीन शांति की अपील कर रहे हैं. चीन तो पाकिस्तान का सबसे बड़ा दोस्त है, लेकिन वो भी कह रहा है – जंग बंद करो, अर्थव्यवस्था बचाओ.
अभी हालात क्या हैं?
अफगान बॉर्डर पर भारी गोलीबारी चल रही है. बलूचिस्तान में ऑपरेशन जारी, लेकिन बीएलए के हमले रुक नहीं रहे. आसिम मुनीर पूरे दिन मीटिंग कर रहे हैं, लेकिन कोई आसान रास्ता नहीं दिख रहा.
अफगान जंग पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा खतरा है. बीएलए के हमलों से फौज पहले ही हल्कान है. अगर ये दोनों संकट साथ-साथ बढ़े तो पाकिस्तान की सेना, अर्थव्यवस्था और एकता पर गहरा असर पड़ सकता है. लेकिन अभी टूटने जैसी स्थिति नहीं है.
ऋचीक मिश्रा