जे डे मर्डर केस: जज के इस सवाल पर छोटा राजन ने कहा, 'ठीक है'

मकोका कोर्ट ने बुधवार को पत्रकार जे डे की हत्या के मामले में माफिया डॉन राजेंद्र एस. निखलजे उर्फ छोटा राजन सहित आठ को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.

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माफिया डॉन राजेंद्र एस. निखलजे उर्फ छोटा राजन माफिया डॉन राजेंद्र एस. निखलजे उर्फ छोटा राजन

मुकेश कुमार

  • मुंबई,
  • 03 मई 2018,
  • अपडेटेड 4:28 PM IST

मकोका कोर्ट ने बुधवार को पत्रकार जे डे की हत्या के मामले में माफिया डॉन राजेंद्र एस. निखलजे उर्फ छोटा राजन सहित आठ को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. छोटा राजन से इस निर्णय के बारे में जब जज ने पूछा, तो उसने बहुत सहज भाव से कहा, 'ठीक है.' पत्रकार जे डे की जून 2011 में हत्या हुई थी.

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इस केस में सजा सुनाने के बाद विशेष न्यायाधीश समीर अदकर ने छोटा राजन (59) से पूछा कि उसे अपनी पूरी जिंदगी अब जेल में बितानी होगी, क्या उसे कुछ कहना है? इसके कुछ देर बाद बिना किसी भावना के प्रदर्शन के राजन ने विनम्रता से कहा, 'ठीक है.' पिछले साल उसे पासपोर्ट केस में सात वर्षों की सजा सुनाई गई थी.

इस मामले में जांच का आदेश देने वाले मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त अरूप पटनायक ने फैसले के बाद कहा कि वह कोर्ट के इस फैसले से काफी संतुष्ट हैं. विशेष सरकारी वकील प्रदीप घरात ने कहा कि यह पहली बार है कि डॉन को हत्या जैसे बड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

इससे पहले अदालत द्वारा छोटा राजन और अन्य आठ को दोषी करार दिए जाने के बाद विशेष सरकारी वकील प्रदीप घरात और बचाव पक्ष के वकीलों ने सजा की अवधि पर अपनी-अपनी दलीलें पेश करने के दौरान तीखी बहसें की. न्यायालय में अपनी बहस के दौरान प्रदीप घरात ने आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी.

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उन्होंने जज के सामने कहा कि जे डे एक पत्रकार थे. वह लोकतंत्र के चौथे खंभे का प्रतिनिधित्व करते थे. इस मामले को दुर्लभतम की श्रेणी में रखा जाना चाहिए. एक कड़ा संदेश देने की जरूरत है. जे डे (56) जाने माने अपराध संवाददाता थे. उनकी जब हत्या की गई, उस समय वह अंग्रेजी सांध्य दैनिक मिड-डे के संपादक (इन्वेस्टीगेशन) थे.

मुंबई में उनके पवई आवास के निकट 11 जून, 2011 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. डे 'खल्लास-एन ए टू जेड गाइड टू द अंडरवर्ल्ड' और 'जीरो डायल : द डेंजरस वर्ल्ड ऑफ इनफॉरमर्स' के लेखक थे. वह मौत से पहले अपनी तीसरी किताब 'चिंदी : राग्स टू रिचेस' लिख रहे थे. इस किताब को लेकर भी राजन नाराज था.

विशेष सरकारी अभियोजक प्रदीप घरात ने बताया कि विशेष न्यायाधीश समीर अदकर ने इस मामले में सह आरोपी पत्रकार जिग्ना वोरा को बरी कर दिया, जिस पर हत्या की साजिश रचने के अलावा अन्य कई आरोप थे. जोसेफ पॉलसन को भी बरी कर दिया गया, जिस पर हत्या की साजिश रचे जाने के लिए मोबाइल सिम कार्ड मुहैया कराने का आरोप था.

इस मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से आठ दोषी पाए गए. ये आठ दोषी रोहित थांगप्पन जोसफ ऊर्फ सतीश काल्या (28), अभिजीत काशराम शिंदे (27), अरुण जनार्दन डाके (27), सचिन सुरेश गायकवाड़ (35), अनिल भानुदास वाघमोड़े (35), नीलेश नारायण शिंगड़े उर्फ बब्लू (34), मंगेश दामोदर अगावाने (25) और दीपक सिसोदिया (28) हैं.

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इस मामले में सनसनीखेज मोड़ तब आया था, जब ने 25 नवंबर, 2011 को मुंबई की द एशियन एज की डिप्टी ब्यूरो चीफ जिग्ना वोरा समेत 10 अन्य को गिरफ्तार किया. जांच के दौरान पता चला था कि वोरा कथित रूप से लगातार छोटा राजन के संपर्क में थीं. डे की हत्या के लिए उसे उसकाया था. लेकिन, यह बात सही साबित नहीं हुई.

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