ऑपरेशन गृहप्रवेश: जेपी ग्रुप की मनमानी के आगे लोग लाचार

आजतक ने ऑपरेशन गृह प्रवेश के जरिए उन लोगों का दर्द सामने लाने की कोशिश की है जो बिल्डर्स की मनमानी के शिकार हुए हैं. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रुप के प्रोजेक्ट में घर लेने वाले लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. बिल्डर के झूठ को बेनकाब करने के लिए आजतक बना है ऐसे ही परेशान और मायूस लोगों की आवाज.

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सबा नाज़

  • नोएडा,
  • 20 अप्रैल 2016,
  • अपडेटेड 11:40 PM IST

आजतक ने ऑपरेशन गृह प्रवेश के जरिए उन लोगों का दर्द सामने लाने की कोशिश की है जो बिल्डर्स की मनमानी के शिकार हुए हैं. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रुप के प्रोजेक्ट में घर लेने वाले लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. बिल्डर के झूठ को बेनकाब करने के लिए आजतक बना है ऐसे ही परेशान और मायूस लोगों की आवाज.

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एनसीआर में अपने नाम का एक लंबा चौड़ा कारोबार जमाने वाले जेपी ग्रुप के ब्रांड पर जिन लोगों ने भरोसा किया वह आज पछता रहे हैं. कंपनी का सारा ध्यान सिर्फ और सिर्फ में लगा रहा फ्लैट्स बनाने में जेपी ग्रुप ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. एक प्रोजेक्ट बेचा और फिर उसका पैसा किसी दूसरे प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने के लिए लगा दिया.

हताशा आक्रोश बन चुकी है, सब्र का बांध टूट रहा है और अब इन ग्राहकों का बिल्डर पर से यकीन पूरी तरह से उठ चुका है. इन्हें डर लग रहा है कि जेपी ग्रुप कहीं दिवालिया ना हो जाए और उनका सारा पैसा ना डूब जाए. ग्राहकों को अब हर हाल में अपना पैसा वापस चाहिए.

एनिमेशन दिखाकर बेचा झूठ का पुलिंदा
एनिमेशन दिखाकर ने घर का सपना मासूम लोगों को बेचा. एनिमेशन देखकर ग्राहकों को लगता है कि ख्यालों में जिस घर को बसाया था उससे भी शानदार घर देने का वादा जेपी ग्रुप निभाएगा. वक्त पर पजेशन की उम्मीद में बैठे ग्राहकों ने सालों गुजार दिए. जेपी ने अपने हजारों फ्लैट्स में से ज्यादातर का पजेशन दिया ही नहीं है और जिन चंद ग्राहकों को पजेशन मिल भी गया है उनको एनिमेशन तो दूर एक ठीक ठीक हालत का फ्लैट भी नहीं मिला है.

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ग्राहकों के साथ गुंडागर्दी पर उतरा जेपी ग्रुप
घर बेचते वक्त तो जेपी ग्रुप ने जो लुभावने वादे किए थे उनकी सच्चाई ग्राहकों के साथ की जा रही गुंडागर्दी खोल देती है. जेपी ग्रुप की दादागिरी का आलम ये है कि अपने फ्लैट को देखने पहुंचे ग्राहकों को ही धमकाया जाता है. कहा जाता है कि फ्लैट सिर्फ आपका है ये जमीन जेपी ग्रुप की है और यहां खड़ा होने की इजाजत किसी को नहीं है. बिल्डर का ये बर्ताव केवल ग्राहकों के साथ नहीं है. मीडिया के कैमरे को चलते देखकर भी जेपी ग्रुप के हाथ-पांव फूल जाते हैं और उसे बंद कराने की कोशिश शुरु हो जाती है. वहीं अगर कंपनी से ये सवाल दागा जाएं तो कंपनी इससे साफ इनकार कर देती है.

लोगों ने छोड़ी घर मिलने की उम्मीद
इन हालात में घर खरीदने वाले किस तरह के तनाव से गुजर रहे होंगे इसे समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है. ईएमआई-रेंट और बच्चों की स्कूल फीस के बीच वो कैसे घर चलाएं इस सवाल का जवाब उन्हें अब जेपी ग्रुप से मिलने की उम्मीद नहीं है. उन्हें तो बस अपना पैसा वापस चाहिए वो भी ब्याज सहित.

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