बेकार नहीं गई निर्भया की कुर्बानी, देश में हुए ये चार बड़े बदलाव

निर्भया के साथ हुए जघन्य कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. उस वक्त सोशल मीडिया पर एक आंदोलन ख़ड़ा हो गया था. लोग बलात्कार से जुड़े कानूनों को सख्त बनाने की मांग कर रहे थे. कुछ समय बाद ही ये आंदोलन सड़कों पर आ गया. जिसके बाद सरकार भी हरकत में आई और संबंधित कानूनों में बदलाव करने के साथ ही निर्भया फंड की स्थापना की गई. निर्भया कांड के बाद देश में चार बड़े बदलाव देखने को मिले.

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निर्भाया के परिवार का हौंसला देखकर दूसरी रेप पीडि़ताओं ने आवाज बुलंद की निर्भाया के परिवार का हौंसला देखकर दूसरी रेप पीडि़ताओं ने आवाज बुलंद की

परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2017,
  • अपडेटेड 4:05 PM IST

निर्भया के साथ हुए जघन्य कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. उस वक्त सोशल मीडिया पर एक आंदोलन ख़ड़ा हो गया था. लोग बलात्कार से जुड़े कानूनों को सख्त बनाने की मांग कर रहे थे. कुछ समय बाद ही ये आंदोलन सड़कों पर आ गया. जिसके बाद सरकार भी हरकत में आई और संबंधित कानूनों में बदलाव करने के साथ ही निर्भया फंड की स्थापना की गई. निर्भया कांड के बाद देश में चार बड़े बदलाव देखने को मिले.

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कानून हुआ सख्त
के बाद पूरे देश में बलात्कारियों के खिलाफ कानून को सख्त बनाने की मांग ने जोर पकड़ा था. इस जघन्य कांड के तीन माह के भीतर बलात्कार और महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े कानूनों की समीक्षा की गई. और उनमें फेरबदल कर उन्हें सख्त बनाया गया. लेकिन बावजूद इसके निर्भया कांड के बाद उपजे आंदोलन से कानून और सरकार तो बदल गए मगर पांच साल का अरसा बीत जाने पर भी व्यवस्था में खास बदलाव दिखाई नहीं देता. लेकिन कानून के सख्त हो जाने से कई जगहों पर महिलाओं और पीड़िताओं को इसका फायदा मिलता दिख रहा है.

शातिर नाबालिगों पर शिकंजा
निर्भया कांड में शामिल एक दोषी वारदात के वक्त नाबालिग था. लिहाजा वह सजा-ए-मौत से बच गया. पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस जघन्य रेपकांड के बाद 16 से 18 साल की उम्र वाले अपराधियों को भी वयस्क अपराधियों की तरह देखने और सजा देने का फैसला लिया गया था. निर्भया कांड में शामिल नाबालिग आरोपी को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत तीन साल से ज्यादा की सजा नहीं हो सकती थी. लिहाजा दिसंबर 2015 में उसे कोर्ट ने सुधार गृह से रिहा करके एक एनजीओ के संरक्षण में भेज दिया था. उसके बाद यह बहस छिड़ी कि ऐसी खौफनाक वारदात में शामिल बलात्कारी को केवल तीन साल में कैसे छोड़ा जा सकता है. तब केंद्र सरकार ने ऐसे अपराधों में शामिल नाबालिगों को वयस्क के तौर पर देखे जाने और सजा देने का अहम फैसला किया गया था. इस बिल को संसद में पास किया गया था.

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निर्भया फंड की स्थापना
निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने निर्भया फंड की स्थापना की थी. निर्भया निधि में सरकार ने 1000.00 करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया. यह फंड दुष्कर्म की पीड़ितों और उत्तरजीवियों के राहत और पुनर्वास की योजना के लिए बनाया गया था. इसमें प्रावधान है कि प्रत्येक राज्य सरकार, केन्द्र सरकार के समन्वय से दुष्कर्म सहित अपराध की पीड़िताओं को मुआवजे के उद्देश्य से फंड उपलब्ध कराएगा. अब तक 20 राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों ने पीड़ित मुआवजा योजना लागू कर दी है. महिला और बाल विकास मंत्रालय के अनुसार बलात्कार पीड़ितों और कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही महिलाओं के पुनर्वास के लिए स्वाधार और अल्पावास गृह योजना भी शुरू की गई थी. इस फंड से महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई प्रकार के इंतजाम किए जाने का प्रावधान है. मसलन पुलिस को सीसीटीवी या पेट्रोलिंग वाहन जैसे संसाधन उपलब्ध कराना आदि.

पीड़िताओं को मिला हौंसला, बदला कोर्ट का माहौल
अक्सर बलात्कार या यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़ित और उसके परिवार वालों की पहचान छिपाई जाती है. लेकिन निर्भया कांड शायद देश का ऐसा पहला मामला था. जिसमें पीड़ित के परिवार ने खुद सामने आकर लोगों से आह्वान किया था कि रेप पीड़ित या यौन उत्पीड़न का शिकार होने वाली महिलाएं अपनी पहचान छिपाने की बजाय सामने आकर गुनाहगारों का पर्दाफाश करें. इसके में भी माहौल बदला. रेप पीडिताओं को लेकर संवेदनशीलता बढ़ी. उनके साथ हुए अत्याचार के खिलाफ आवाज उठायें. निर्भया के माता-पिता ने खुद मीडिया में आकर अपनी पहचान जाहिर की. उन्होंने देश वासियों से आह्वान किया कि ऐसे मामले पीड़ितों के लिए नहीं दोषियों के लिए शर्म की बात है. उन्हें सजा-ए-मौत ही मिलनी चाहिए.

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