राम रहीम केस: 25 अगस्त को हुई हिंसा का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

राम रहीम केस में पंचकूला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. राम रहीम को रेप केस में दोषी ठहराए जाने के बाद भड़की हिंसा में मुख्य भूमिका निभाने वाले दंगा आरोपी गोविंद इंसा को पुलिस ने पंजाब के जीरकपुर से गिरफ्तार कर लिया है. गोविंद ही डेरा समर्थकों की भीड़ को गाइड कर रहा था. 25 अगस्त को पंचकूला के हैफेड चौक पर हुए दंगे में भी शामिल था.

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पंजाब के जीरकपुर से हुई गिरफ्तारी पंजाब के जीरकपुर से हुई गिरफ्तारी

मुकेश कुमार

  • चंडीगढ़,
  • 10 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

राम रहीम केस में पंचकूला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. राम रहीम को रेप केस में दोषी ठहराए जाने के बाद भड़की हिंसा में मुख्य भूमिका निभाने वाले दंगा आरोपी गोविंद इंसा को पुलिस ने पंजाब के जीरकपुर से गिरफ्तार कर लिया है. गोविंद ही डेरा समर्थकों की भीड़ को गाइड कर रहा था. 25 अगस्त को पंचकूला के हैफेड चौक पर हुए दंगे में भी शामिल था.

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जानकारी के मुताबिक, राम रहीम को इस बात का एहसास हो चुका था कि उसके कुकर्मों की सजा मिलनी तय है. इसलिए उसने कोर्ट का फैसला आने से पहले ही कुछ डेरा समर्थकों के साथ एक साजिश रची, जिसे 45 लोगों की एक कमेटी ने अंजाम दिया था. इसी कमेटी में गोविंद इंसा शामिल था. इनको 25 अगस्त को राम रहीम के खिलाफ फैसला आते ही दंगा भड़काना था.

साजिश के तहत यह कमेटी 25 अगस्त से पहले से ही पंचकूला के आसपास डेरा जमा चुकी थी. इस कमेटी में गोविंद के साथ दान सिंह और चमकौर सिंह अहम रोल निभा रहे थे. पुलिस ने शुक्रवार को ही दान और चमकौर को गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद गोविंद की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है. गोविंद को कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस हिरासत में लेगी.

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बताते चलें कि रेप केस में दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 20 साल की सजा सुनाई जा चुकी है. जिस दिन राम रहीम को कोर्ट ने दोषी करार दिया था उस दिन हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और यूपी के कुछ हिस्सों में जमकर हिंसा हुई थी. डेरा समर्थकों के उत्पात के बीच करीब 38 लोगों की मौत हो गई थी, तो वहीं सैकड़ों लोग घायल हो गए थे.

साल 2002 में डेरा आश्रम में रहने वाली एक साध्वी ने चिट्ठी के जरिए डेरा प्रमुख पर का आरोप लगाया था. इस मामले में हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी. इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट के आदेश पर साल 2001 में पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई. साल 2007 में सीबीआई द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने के बाद कोर्ट ने केस पर सुनवाई शुरू की थी.

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