दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- पीजी और प्राइवेट हॉस्टल पर पुलिस रखे नजर

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और जस्टिस ए. जे. भम्भानी की एक पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस का कर्तव्य है कि वह अपने क्षेत्रों पर नजर रखें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाओं या लड़कियों को बंधक बनाकर नहीं रखा जा सके जैसा रोहिणी के एक आश्रम में कथित तौर पर किया गया था.

दिल्ली हाई कोर्ट
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 10:34 PM IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि निजी छात्रावासों और पेइंग गेस्ट आवासों जैसे उन स्थानों पर पुलिस को निगरानी करनी होगी, जहां बड़ी संख्या में लोग, विशेषकर महिलाएं या लड़कियां रहती हैं ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. दिल्ली के रोहिणी इलाके में वीरेन्द्र देव दीक्षित द्वारा संचालित आध्यात्मिक स्कूल में लड़कियों और महिलाओं को कथित रूप से कैद किए जाने से संबंधित एक मामले में उच्च न्यायालय ने यह बात कही है. जब यह मामला सुर्खियों में आया था तो बहुत बवाल हुआ था.  

मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और जस्टिस ए. जे. भम्भानी की एक पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस का कर्तव्य है कि वह अपने क्षेत्रों पर नजर रखें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाओं या लड़कियों को बंधक बनाकर नहीं रखा जा सके जैसा रोहिणी के एक आश्रम में कथित तौर पर किया गया था.

अदालत ने पुलिस से पूछा कि जब यह पता चला कि रोहिणी के आश्रम में अनेक लड़कियां और महिलाएं रह रही हैं तो उन्होंने क्या कदम उठाए. अदालत ने कहा, दिल्ली पुलिस का यह पता लगाने का दायित्व है कि उनके क्षेत्र में क्या गतिविधियां चल रही हैं. जब इतनी सारी लड़कियां एक ही इमारत में रह रही थीं, तब निगरानी होनी चाहिए थी. आश्रम की ओर से पेश वकील ने कहा कि इमारत परिसर में कोई छात्रावास या पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास नहीं चल रहा था. परिसर में रहने वाले लोगों को केवल आध्यात्मिक शिक्षा दी जा रही थी.

अदालत दिल्ली के रोहिणी में वीरेन्द्र देव दीक्षित द्वारा संचालित ‘आध्यात्मिक विद्यालय’में लड़कियों और महिलाओं को कथित रूप से कैद किए जाने से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी. हाई कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद से ही दीक्षित फरार है. सीबीआई ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है. एक एनजीओ ने जनहित याचिका दायर की है जिसमें आरोप लगाया गया है कि रोहिणी के ‘आध्यात्मिक विश्वविद्यालय’ में लड़कियों और महिलाओं को अवैध रूप से कैद करके रखा गया था.

गौरतलब है कि हाईकोर्ट के एक ऑर्डर पर 20 दिसंबर को एसआईटी बनाई गई थी. इसके पहले दिल्ली पुलिस ने 19 जनवरी 2017, 12 नवंबर 2017 और 19 दिसंबर 2017 को एफआईआर दर्ज की थी. कोर्ट के ऑर्डर पर 3 जनवरी 2018 को सीबीआई ने भी इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी. लेकिन पुलिस और सीबीआई की तमाम कोशिशों के बावजूद वीरेंद्र देव का कोई पता नहीं लगा. देश भर में जहां-जहां इसके आश्रम हैं, सभी जगहों पर टीम भेजी गई, नोटिस चिपकाए गए है लेकिन वीरेंद्र देव का कोई सुराग नहीं मिला.

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