हिंदुस्तान को हिला देने वाले बुराड़ी कांड के एक महीने बाद ऐसे हैं हालात

हिंदुस्तान को हिला देने वाले बुराड़ी कांड में पुलिस जांच अपने आखिरी पड़ाव में है. क्राइम ब्रांच ने सीबीआई को खत लिखकर साइक्लोजिकल पोस्टमार्टम करवाने की मांग की है.

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एक महीने पहले हुआ था बुराड़ी कांड एक महीने पहले हुआ था बुराड़ी कांड

मुकेश कुमार / अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 9:32 PM IST

हिंदुस्तान को हिला देने वाले बुराड़ी कांड को एक महीना पूरा हो चुका है. पुलिस की जांच अपने आखिरी पड़ाव में है. इन सबके बीच बुराड़ी की उस गली में अब सबकुछ सामान्य हो चुका है. लेकिन अभी भी जो इस रास्ते से गुजरता है, वो घर के पास रुक कर एक बार जरूर देखता है.

बुराड़ी के उस घर में जहां 11 लोगों की लाश मिली थी, वहां घटना के बाद पुलिस टीम तैनात रहती थी, लेकिन अब पुलिस का पहरा हटा दिया गया है. हालांकि घर अब भी पुलिस के कब्जे में है. इस कांड के बाद पुलिस ने सबसे पहले घर वालों के बारे में जानने के लिए पड़ोस में रहने वाले मदन से पूछताछ की थी.

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मदन, भाटिया परिवार के घर के बगल में ही ड्राईक्लिंग का काम करता है. मदन ने बताया कि सिविल ड्रेस में कुछ लोग आए थे. उससे भाटिया परिवार के बारे में पूछताछ की गई थी. प्रियंका मैडम अक्सर कपड़े लेकर आती थीं. वह स्वभाव से बहुत अच्छी थीं. ऐसा कभी नहीं लगा कि वह इस तरह के कदम उठाएंगी.

भाटिया परिवार के घर के बगल में मंदिर है. यहां पर वे लोग कभी-कभी आते थे. उनके घर के बाहर एक बोर्ड लगा है, जिस पर नीतू हर रोज कोई ना कोई शुभ विचार लिखा करती थी. राहगीर रुक उसे पढ़ा करते थे. मदन को पुलिस की थ्योरी पर यकीन नहीं हो रही है. वह भाटिया परिवार को अंधविश्वासी नहीं मानता.

बुराड़ी कांड के बाद घर के बाहर से एक के बाद जिस तरह के राज बाहर आ रहे थे, उससे आसपास के लोगों में दहशत थी, लेकिन अब माहौल सामान्य है. लोगों को बिल्कुल भी नहीं होता कि सामान्य सा दिखने वाला परिवार एक दिन ऐसा कदम उठा लेगा. लोगों का मानना है कि परिवार के लोग ऐसे नहीं थे.

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पुलिस जांच अपने आखिरी पड़ाव में है. क्राइम ब्रांच ने सीबीआई को खत लिखकर साइक्लोजिकल पोस्टमार्टम करवाने की मांग की है. पुलिस ने सीबीआई की CFSL को ये खत लिखा है. साइक्लोजिकल पोस्टमार्टम में मरने वालों के रिश्तेदारों की मदद ली जाएगी और ये पता लगाया जाएगा कि मरने वालों की मानसिक हालात कैसी थी.

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