धर्मांतरण की कोशिश, यौन उत्पीड़न के आरोप... TCS केस में आरोपी निदा खान की जमानत का विरोध

नाशिक TCS BPO केस में निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई. अब इस मामले में कोर्ट 2 मई को फैसला सुनाएगी. हालांकि पुलिस और पीड़ित पक्ष ने निदा की जमानत का विरोध जताया है. पढ़ें पूरी कहानी.

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पुलिस और पीड़ित पक्ष ने निदा की जमानत का विरोध किया है (फोटो-ITG) पुलिस और पीड़ित पक्ष ने निदा की जमानत का विरोध किया है (फोटो-ITG)

दिव्येश सिंह

  • नासिक,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

नासिक के चर्चित TCS BPO मामले में आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है. अब सभी की नजर कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो 2 मई को सुनाया जाएगा. इस मामले में धर्मांतरण की कोशिश, धार्मिक भावनाएं आहत करने और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. पुलिस और पीड़ित पक्ष दोनों ने जमानत का कड़ा विरोध किया है, जिससे केस और भी संवेदनशील हो गया है.

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नासिक रोड सेशन कोर्ट में आज TCS BPO केस से जुड़ी अहम सुनवाई हुई, जिसमें मुख्य आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर बहस पूरी हो गई. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब कोर्ट 2 मई को अपना आदेश सुनाएगा. इस केस को लेकर शुरुआत से ही विवाद बना हुआ है, क्योंकि इसमें कई गंभीर आरोप शामिल हैं. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने विस्तार से सभी पक्षों को सुना.

इस केस में महाराष्ट्र सरकार की ओर से अजय मिसर को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया गया है. वे इस केस से जुड़े कुल नौ मामलों में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. इन मामलों में संगीन आरोप शामिल हैं. सरकार ने इस केस की गंभीरता को देखते हुए अनुभवी वकील को जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मजबूत पैरवी हो सके.

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अजय मिसर इससे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रह चुके हैं. उन्होंने मालेगांव ब्लास्ट, PFI और मुंबई ब्लास्ट जैसे संवेदनशील मामलों में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है. इसके अलावा वे एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS), NIA और मुंबई क्राइम ब्रांच जैसी एजेंसियों के साथ भी काम कर चुके हैं. उनके अनुभव को देखते हुए इस केस में भी सरकार को उनसे काफी उम्मीदें हैं.

निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका का पुलिस ने सख्त विरोध किया है. पुलिस का कहना है कि आरोप गंभीर हैं और जांच अभी जारी है, ऐसे में आरोपी को राहत देना जांच को प्रभावित कर सकता है. पुलिस ने कोर्ट में दलील दी कि अगर जमानत मिलती है तो आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती है या गवाहों को प्रभावित कर सकती है. इसी आधार पर पुलिस ने जमानत याचिका खारिज करने की मांग की.

इस मामले में पीड़ित पक्ष के वकीलों ने भी हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर जमानत का विरोध किया है. उनका कहना है कि पीड़ितों के साथ गंभीर अन्याय हुआ है और आरोपी को जमानत देने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. पीड़ित पक्ष ने कोर्ट से अपील की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को किसी भी तरह की राहत न दी जाए. इस हस्तक्षेप के बाद मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है.

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अब इस पूरे मामले में अगली और सबसे अहम तारीख 2 मई है, जब नासिक रोड सेशन कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी. यह फैसला न सिर्फ आरोपी के लिए बल्कि पूरे केस की दिशा तय करने वाला होगा. अगर जमानत मिलती है तो जांच पर असर पड़ सकता है, वहीं अगर याचिका खारिज होती है तो पुलिस की कार्रवाई और तेज हो सकती है, फिलहाल, सभी पक्ष कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहे हैं.

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