सुशांत केसः पोस्टमार्टम-विसरा रिपोर्ट की जांच कर रहे हैं AIIMS के फॉरेंसिक एक्सपर्ट

एम्स के डॉक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को देख रहे हैं. विसरा रिपोर्ट को पढ़ रहे हैं. शुक्रवार तक एम्स के ये फॉरेंसिक एक्सपर्ट सीबीआई की एसआईटी को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे.

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सुशांत केस में SIT को एम्स के फोरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट का इंतजार है सुशांत केस में SIT को एम्स के फोरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट का इंतजार है

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 26 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 7:16 PM IST
  • सीबीआई को एम्स की रिपोर्ट का इंतजार है
  • विसरा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की हो रही जांच
  • फोरेंसिक एक्सपर्ट खोलेंगे सुशांत की मौत का राज

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई (CBI) की जांच का अब वो चैप्टर खुलने वाला है. जहां AIIMS के फॉरेंसिक एक्सपर्ट सच का पता करेंगे. यही वजह है कि अब मुंबई में बैठी सीबीआई की एसआईटी को दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की रिपोर्ट का इंतजार है. एम्स में चार डॉक्टरों का एक पैनल है, जो सुशांत के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लेकर विसरा रिपोर्ट तक सबकी जांच कर रहा है. 

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एम्स के डॉक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को देख रहे हैं. विसरा रिपोर्ट को पढ़ रहे हैं. शुक्रवार तक एम्स के ये फॉरेंसिक एक्सपर्ट सीबीआई को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे. मंगलवार को ही सीबीआई ने कूपर अस्पताल के डॉक्टरों से जांच की डिटेल भी साझा की थी. 

दरअसल, सुशांत की मौत कैसे हुई? कब हुई? पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच से ही सीबीआई को इन सारे सवालों के जवाब मिलेंगे. विसरा रिपोर्ट से ये पता चलेगा कि कहीं सुशांत को जहर तो नहीं दिया गया था. 

सवाल वाजिब थे. सीबीआई को शक है कि या तो सुशांत का पोस्टमार्टम सही से नहीं किया गया या फिर रिपोर्ट सही से नहीं बनाई गई. ऐसे में एम्स के डॉक्टरों की जांच और भी अहम हो जाती है. सुशांत के विसरा का करीब 80 फीसदी सैंपल जांच में इस्तेमाल हो चुका है. अब 20 फीसदी सैंपल बचा है. अगर सीबीआई विसरा की दोबारा जांच कराना चाहे तो उसे इन 20 फीसदी बचे हुए विसरा के नमूने पर ही निर्भर रहना पड़ेगा.

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अगर सीबीआई चाहे तो वो इन नमूनों को अपने कब्जे में ले सकती है. फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक विसरा के बाकी बचे नमूनों से भी सीबीआई सच्चाई का पता लगा सकती है. सुशांत केस में मौका-ए-वारदात के ज्यादातर सबूत और निशान नष्ट हो चुके हैं. इसलिए अब इस केस में फॉरेंसिक सबूत ही सबसे अहम साबित होंगे. 

 

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