मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी पर कसा शिकंजा, 9 घंटे की पूछताछ के बाद ED ने किया गिरफ्तार

माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. दरअसल ईडी ने शुक्रवार को मुख्तार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनसे 9 घंटे पूछताछ की. इसके बाद देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. बताया जा रहा है कि वह एजेंसी के कई सवालों के जवाब नहीं दे पाए.

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मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास की गिरफ्तारी पर लटकी तलवार (फाइल फोटो) मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास की गिरफ्तारी पर लटकी तलवार (फाइल फोटो)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 04 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 6:50 AM IST

माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी को ईडी ने शुक्रवार देर रात गिरफ्तार कर लिया. इससे पहले ED ने अपने प्रयागराज ऑफिस में उनसे 9 घंटे तक पूछताछ की. मुख्तार अंसारी के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था. मुख्तार भाई अफजाल अंसारी के बयान दर्ज करने के बाद अब्बास अंसारी से दूसरे राउंड की पूछताछ शुरू की गई थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

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उन्हें पहले पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया. कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद अब्बास की गिरफ्तारी दिखाई गई. ईडी दफ्तर के बाहर भारी पुलिस फोर्स भी तैनात कर दिया गया. अब्बास मऊ विधानसभा सीट से सुभासपा विधायक हैं. ED ने अब्बास अंसारी के खिलाफ पिछले महीने लुकआउट नोटिस जारी किया था. 

मई में परिवार के कई सदस्यों से हुई थी पूछताछ

ईडी ने मार्च 2021 में मुख्तार अंसारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था. इसके बाद ईडी ने मुख्तार के भाई और बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी से इस साल 9 मई, फिर मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी और विधायक भतीजे शोएब अंसारी से 10 मई को और अब्बास अंसारी और छोटे बेटे उमर अंसारी से 20 मई को पूछताछ की थी.

तीन मामलों को लेकर दर्ज किया है केस

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मुख्तार अंसारी के खिलाफ 2020 में जाली दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन पर कब्जे करने, लखनऊ में धोखाधड़ी कर संपत्ति अर्जित करने, धोखाधड़ी कर विधायक निधि निकालने का केस दर्ज है. इन्हीं तीनों मुकदमों को आधार बनाकर ईडी ने भी मुख्तार अंसारी पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है.

21 अक्टूबर को कोर्ट में किया था सरेंडर

कई महीने से फरार चल रहे सुभासपा के विधायक अब्बास अंसारी, भाई उमर अंसारी समेत तीन लोगों ने 21 अक्टूबर को पुलिस को चकमा देते हुए चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के दो मामलों और अफसरों को धमकाने के केस में एमपी/एमएलए कोर्ट में समर्पण कर दिया था. इसके बाद तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया था हालांकि करीब तीन घंटे बाद तीनों को जमानत दे दी थी.

तीन महीने तक अब्बास अंसारी समेत तीनों आरोपी फरार थे. इसके बाद विधायक ने सुप्रीम कोर्ट में राहत की गुहार लगाई थी, जिस पर लखनऊ में दर्ज अवैध असलहे के मामले में अब्बास को गिरफ्तारी से चार हफ्ते की अंतरिम राहत दे दी गई थी.

कोर्ट ने घोषित कर दिया था भगोड़ा

25 अगस्त को एमपी-एमएलए कोर्ट ने अब्बास अंसारी को भगोड़ा घोषित कर दिया था. वह कोर्ट में सरेंडर नहीं कर रहा था. अब्बास के खिलाफ आर्म्स एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) सहित अन्य मामले दर्ज हैं.

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उसके पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने अब्बास अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. एमपी/एमएलए की स्पेशल कोर्ट ने पुलिस की अर्जी पर अब्बास अंसारी को भगोड़ा घोषित कर दिया था.

सितंबर में अब्बास की लोकेशन पंजाब में मिली थी. उसकी तलाश में एक टीम पंजाब भेजी गई थी, लेकिन अब्बास पकड़ में नहीं आया था. उसकी पार्टी के नेता ओपी राजभर ने भी अब्बास से ई़डी के सामने पेश होने की अपील की थी.

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