फर्जी फर्म, नकली बिल और कोडीन कफ सिरप... ऐसे पकड़े गए अंतर्राष्ट्रीय ड्रग रैकेट में शामिल दो भाई, UP STF का एक्शन

यूपी एसटीएफ की टीम ने लखनऊ से फेंसिडिल सप्लाई नेटवर्क चलाने वाले दो शातिर भाइयों को गिरफ्तार किया है, इन दोनों के पकड़ में आने के साथ ही फर्जी फर्मों, नकली बिलिंग और राज्यों में फैल चुके बड़े ड्रग रैकेट का खुलासा हुआ है.

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UP STF और पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ा है (फोटो-UPSTF/ITG) UP STF और पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ा है (फोटो-UPSTF/ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 11 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 7:46 PM IST

Fensidyl Smuggling Racket Busted: उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) ने गुरुवार तड़के एक बड़े ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ते हुए दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया. दोनों पर आरोप है कि ये अवैध तरीके से फेंसिडिल कफ सिरप और अन्य कोडीन आधारित दवाओं का कारोबार कर रहे थे. दोनों को लखनऊ में एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत पकड़ा गया. यह कार्रवाई उस सूचना के बाद की गई, जिसमें STF को बताया गया था कि दोनों आरोपी शहर में मौजूद हैं. उनकी गिरफ्तारी के साथ ही नेटवर्क का कई राज्यों में फैला काला कारोबार भी सामने आ गया.

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टेढ़ी पुलिया के पास दबोचे गए आरोपी
STF ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साहिबाबाद के कपिल विहार के रहने वाले अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा के रूप में हुई है. दोनों को अलंबाग–मवैया रोड पर टेढ़ी पुलिया के नजदीक तड़के करीब 4:30 बजे रोका गया था. टीम को देखने के बाद दोनों ने बचने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस की घेराबंदी के सामने वे टिक नहीं सके. गिरफ्तारी के बाद उनकी तलाशी में कई अहम दस्तावेज मिले हैं.

फर्जी फार्मा फर्म का भंडाफोड़
छापेमारी के दौरान STF को दो मोबाइल फोन और 31 ऐसे दस्तावेज मिले जो एक फर्जी फार्मास्यूटिकल कंपनी से जुड़े हुए थे. यह वही कंपनी थी जिसके नाम पर संवेदनशील कफ सिरप की सप्लाई दिखाई जाती थी. दस्तावेजों की जांच से पता चला कि बड़ी मात्रा में नकली बिलिंग, फर्जी खरीद और फर्जी बिक्री के कागज़ तैयार किए गए थे. इससे रैकेट के संचालन का तरीका साफ हो गया.

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दिल्ली से लखनऊ तक सक्रिय था अभिषेक
STF को इनपुट मिला था कि अभिषेक शर्मा, जो एबॉट कंपनी का दिल्ली-बेस्ड डिस्ट्रीब्यूटर रहा है, वह अपने छोटे भाई के साथ लखनऊ आया है. दोनों के बस से उतरकर हजरतगंज जाने की जानकारी मिली थी. इसी सूचना पर STF और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त टीम बनाकर जाल फैलाया और दोनों शातिर भाईयों को धर दबोचा. दरअसल, अभिषेक शर्मा पहले से ही वॉन्टेड चल रहा था.

GR ट्रेडिंग के जरिए काला कारोबार
पूछताछ में आरोपी अभिषेक शर्मा ने बताया कि वह साल 2019 से GR ट्रेडिंग में काम कर रहा था. यह फर्म विशाल सिंह और विभोर राणा की थी. शुरुआत में वह सिर्फ लोडिंग-अनलोडिंग और रिकॉर्ड रखने का जिम्मा संभालता था. लेकिन धीरे-धीरे वह पूरे नेटवर्क के संचालन का हिस्सा बन गया. इसी दौरान उसने फेंसिडिल समेत कई संवेदनशील दवाओं का अवैध रूट समझ लिया था.

बंगाल से बांग्लादेश तक सप्लाई 
अभिषेक शर्मा ने खुलासा किया कि फर्म के मालिक फर्जी कंपनियों के जरिए बड़ी मात्रा में फेंसिडिल खरीदते थे. बाद में इन दवाओं को नशे के रूप में तस्करों को बेच दिया जाता था. यह नेटवर्क बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल से आगे बांग्लादेश तक फैला हुआ था. यानी यह सिर्फ राज्य स्तर का नहीं, बल्कि इंटरनेशनल रैकेट था.

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फर्जी कंपनियां बनाने में CA ने की मदद
पूछताछ में सामने आया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अरुण सिंगल फर्जी कंपनियां बनाने में उनकी मदद करता था. उसने ‘सचिन मेडिकोज’ के नाम से सहारनपुर और भगवानपुर (रुड़की) में दो फर्में खड़ी कीं. इन फर्मों को बनाने के लिए बित्तू कुमार और सचिन कुमार नाम के लोगों की पहचान का इस्तेमाल किया गया.

फर्जी ई-वे बिलों का इस्तेमाल
STF के मुताबिक गैंग फेंसिडिल की बिक्री उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी की फर्मों को दिखाता था. बाद में वही स्टॉक ‘सचिन मेडिकोज’ के नाम पर दोबारा खरीद लिया जाता था. इसके बाद नकली ई-वे बिल बनाकर असली माल तस्करों तक पहुंचाया जाता था. यह पूरा खेल कागज़ों पर साफ दिखाई देता था, लेकिन असल में माल कहीं और जाता था.

पहले भी पकड़ी गईं थी खेप
STF ने बताया कि साल 2021 में कई अवैध खेप जब्त की गई थीं. इसके बाद जांच आगे बढ़ी और 2022 में विभोर राणा को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से गिरफ्तार किया गया था. मालदा लंबे समय से कोडीन आधारित सिरप की तस्करी का बड़ा केंद्र माना जाता है, जिससे उसकी गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण माना गया.

नए नाम से नया नेटवर्क
आरोपी अभिषेक शर्मा ने बताया कि अरुण सिंगल के हटने के बाद उसने दिसंबर 2023 में ‘सचिन मेडिकोज’ का नाम बदलकर ‘मरूति मेडिकोज’ कर दिया था. जनवरी 2024 में यह कंपनी एबॉट की उत्तराखंड की सुपर डिस्ट्रीब्यूटर बन गई. वह बिलिंग और बैंकिंग दूसरे व्यक्ति के नाम से करता था, जिससे किसी को शक न हो.

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नई फर्म के जरिए लेनदेन
आरोपी अभिषेक ने बताया कि दिल्ली में ए वी फार्मास्युटिकल्स (AV Pharmaceuticals) नाम से एक नई कंपनी बनाई गई, जिसमें पप्पन यादव को पार्टनर दिखाया गया. लेकिन असल में इसका संचालन विशाल और विभोर के लोग करते थे. यह फर्म तस्करी किए गए सिरप को रिडायरेक्ट करने के लिए इस्तेमाल की जाती थी.

दुबई से लौटकर रैकेट में शामिल हुआ शुभम
दूसरे आरोपी शुभम शर्मा ने पूछताछ में बताया कि उसने 12वीं तक पढ़ाई की है और वह दुबई में पोर्ट ऑपरेशन ऑफिसर की नौकरी करता था. भारत लौटने के बाद वह फिर विदेश जाने की सोच रहा था, तभी वह अपने भाई के जरिए विशाल और विभोर के सम्पर्क में आ गया. उसके नाम पर "श्री बालाजी संजीवनी" नाम की फर्म बनाई गई. जिसमें शुरुआती लेनदेन मरुति मेडिकोज के जरिए ही किए गए.

वाराणसी और रांची तक पहुंची खेप
STF के अनुसार शुभम ने यह भी स्वीकार किया कि फेंसिडिल की सप्लाई पहले वाराणसी के एक व्यक्ति को भेजी जाती थी. इसके बाद माल रांची की एक फर्म को मिलता था, जिसके पास एबॉट का सुपर डिस्ट्रीब्यूशन कोड था. दोनों भाइयों ने पश्चिम बंगाल के दो अन्य सहयोगियों के नाम भी बताए हैं. STF अब इस पूरी चेन के सबूत जुटा रही है. 

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