‘तुम अपनी गर्लफ्रेंड के हत्यारे हो’... सुप्रीम कोर्ट ने डबल मर्डर के आरोपी को राहत देने से किया इनकार

मेरठ में एक तरफा प्यार के चलते दुल्हन और उसके पिता की हत्या के आरोपी सागर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली. देश की सबसे बड़ी अदालत ने जमानत याचिका पर सख्त टिप्पणी करते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया. पढ़ें पूरा मामला.

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई से ही इनकार कर दिया (फोटो-ITG) सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई से ही इनकार कर दिया (फोटो-ITG)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 02 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:35 PM IST

मेरठ में एक युवती और उसके पिता की हत्या से जुड़े चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सागर को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया. मंगलवार को जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता पर कड़ी टिप्पणी की और आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करने से मना कर दिया. यह मामला कथित तौर पर एकतरफा प्रेम और शादी से पहले हुई गोलीबारी से जुड़ा है.

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सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपी के वकील की दलीलें सुनीं. अदालत ने कहा कि आरोपी ने सिर्फ युवती ही नहीं, बल्कि उसके पिता की भी हत्या कर दी और उसका भाई भी घायल हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया.

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'हे भगवान! तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को मार दिया, उसके पिता को भी मार दिया और उसका भाई भी घायल हो गया. तुम तो बड़े दुस्साहसी निकले. क्या तुमने अजय देवगन की बिहार वाली फिल्म नहीं देखी?' अदालत की यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान चर्चा का विषय रही.

दरअसल, यह मामला जून 2020 का है. युवती के भाई ने मेरठ में एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि सागर युवती का पीछा करता था और उससे एकतरफा प्रेम करता था. शिकायत में कहा गया कि युवती की शादी किसी दूसरे युवक से तय होने के बाद आरोपी नाराज था.

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अभियोजन के अनुसार, युवती की शादी से दो दिन पहले सागर अपने कुछ साथियों के साथ उसके घर पहुंचा और वहां अंधाधुंध फायरिंग कर दी. गोली लगने से दुल्हन बनने जा रही युवती और उसके पिता की मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य घायल हो गए. घटना के बाद पुलिस ने सागर को गिरफ्तार कर लिया था.

आरोपी सागर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता अभिषेक राणा ने दलील दी कि घटना के समय सागर की उम्र केवल 18 वर्ष थी और वह तब से लगातार जेल में बंद है. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ मुख्य आधार एफआईआर है, जिसमें कई तथ्यों को लेकर सवाल उठते हैं.

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मुकदमे के दौरान जिरह में युवती के भाई ने कहा था कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था, जबकि वही इस मामले का शिकायतकर्ता है. सागर की जमानत याचिका में यह भी कहा गया कि कथित प्रत्यक्षदर्शी की गवाही साबित नहीं हो सकी है और राज्य सरकार को अभी 43 गवाहों की जांच करनी बाकी है.

आरोपी ने यह तर्क भी दिया कि शिकायतकर्ता अपने पहले के बयान से पीछे हट गया है, जिससे एफआईआर की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ और याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. 

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बाद में जब अदालत मामला खारिज करने के संकेत देने लगी तो आरोपी के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, ताकि उचित समय पर हाईकोर्ट में फिर से जमानत की मांग की जा सके. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट सागर की जमानत याचिका खारिज कर चुका है, जबकि इस हमले में शामिल बताए गए अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है.

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