दिल्ली: भड़काऊ नारेबाजी केस में अश्विनी उपाध्याय को राहत, 50 हजार के मुचलके पर मिली बेल

दिल्ली के जंतर-मंतर के पास भड़काऊ नारेबाजी करने के मामले में गिरफ्तार किए गए अश्विनी उपाध्याय को दिल्ली की अदालत ने बुधवार को जमानत दे दी है. कोर्ट ने उपाध्याय को 50 हजार के निजी मुचलके पर बेल दी है.

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अश्विनी उपाध्याय अश्विनी उपाध्याय

तनसीम हैदर / अशोक सिंघल

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 8:56 PM IST
  • भड़काऊ नारेबाजी मामले में अश्विनी को जमानत
  • जंतर-मंतर के पास की गई थी भड़काऊ नारेबाजी

दिल्ली के जंतर-मंतर के पास भड़काऊ नारेबाजी करने के मामले में गिरफ्तार किए गए अश्विनी उपाध्याय को दिल्ली की अदालत ने बुधवार को जमानत दे दी है. कोर्ट ने उपाध्याय को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर बेल दी है.

जंतर-मंतर के पास 8 अगस्त को एक प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने भड़काऊ नारेबाजी की थी. कुछ ही देर में मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए वकील अश्विनी उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया था. उनसे इस मामले में पूछताछ भी की गई थी. अश्विनी भी उस प्रदर्शन में मौजूद थे, जहां पर नारेबाजी की गई थी.

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इस मामले में अश्विनी उपाध्याय के अलावा विनोद शर्मा, दीपक सिंह, दीपक, विनीत क्रांति, प्रीत सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था. वहीं, पुलिस को अब भी पिंकी चौधरी की तलाश है. पुलिस ने इस संबंध में छापेमारी भी की है.

गिरफ्तारी से पहले अश्विनी उपाध्याय ने वीडियो की सत्यता की जांच की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि यदि यह वीडियो सही है तो फिर कार्रवाई की जानी चाहिए. 'आजतक' से बात करते हुए उपाध्याय ने कहा था कि जंतर-मंतर पर आयोजित किए गए कार्यक्रम का आयोजक सेव इंडिया फाउंडेशन था, जिसे वह नहीं जानते हैं. वह सिर्फ प्रदर्शन में हिस्सा लेने ही गए थे.

कोर्ट में अश्विनी उपाध्याय की ओर से वकील विकास सिंह और सद्धार्थ लूथरा पेश हुए. सिद्धार्थ लूथरा ने दावा किया कि जब नारेबाजी हुई, तब अश्विनी उपाध्याय मौके पर नहीं थे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि अश्विनी के खिलाफ कोई मामला ही नहीं बनता है. वहीं, कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से पूछा कि आप जमानत पर क्या कहना चाहते हैं? इस पर वकील ने कहा कि जहां लोग इकठ्ठा हुए थे वह जगह संसद के पास है. 15 अगस्त के समय इस तरह की भीड़ इकठ्ठा जानबूझ कर की गई थी.

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अभियोजन पक्ष यानी दिल्ली पुलिस ने सुनवाई के दौरान कहा ये सभी लोग बिना इजाजत इकठ्ठा हुए थे. इसके अलावा, जब पुलिस ने समझाया, तब भी इन लोगों ने बात नहीं सुनी. भड़काऊ नारे लगाए गए, तब इन लोगों ने पुलिस को इस बारे में जानकारी नहीं दी. वहीं, इस मामले में अभी जांच करनी बाकी है.

(इनपुट- श्रेया)

 

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