दो-तीन हफ्ते के फुल लॉकडाउन पर विचार करे यूपी सरकार, HC का निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोरोना मामले को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं. राज्य सरकार से कहा है कि खुले मैदानों में अस्थायी अस्पताल बनाकर कोरोना पीड़ितों के इलाज की व्यवस्था की जाए. साथ ही बिना मास्क लगाए सड़कों पर निकलने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटने के लिए कहा गया है.

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कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर सख्त हुआ इलाहाबाद हाई कोर्ट (फाइल फोटो) कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर सख्त हुआ इलाहाबाद हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

कुमार अभिषेक

  • प्रयागराज,
  • 13 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 11:05 PM IST
  • 19 अप्रैल को है इस मामले में अगली सुनवाई
  • हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से मांगा हलफनामा
  • खुले मैदानों में बनाए जाएं अस्थायी अस्पताल

उत्तर प्रदेश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रभावित क्षेत्रों में दो से तीन सप्ताह के लिए पूर्ण लॉकडाउन लगाने पर विचार करने के निर्देश दिया है. जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजित कुमार की खंडपीठ ने आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार से कहा है कि खुले मैदानों में अस्थायी अस्पताल बनाकर कोरोना पीड़ितों के इलाज की व्यवस्था की जाए. कोर्ट ने कहा है कि जरूरी हो तो संविदा पर स्टाफ तैनात किया जाए. इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 19 अप्रैल को तय करते हुए स्वास्थ्य सचिव से हलफनामा मांगा है. 

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हाई कोर्ट ने कहा कि सड़क पर कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के दिखायी न दे, अन्यथा कोर्ट पुलिस के खिलाफ अवमानना कार्यवाही करेगी. कोर्ट ने कहा कि सामाजिक, धार्मिक आयोजनों में 50 ज्यादा लोग एकत्र न हों. कोर्ट ने कहा नाइट कर्फ्यू या कोरोना कर्फ्यू संक्रमण फैलाव रोकने के छोटे कदम हैं. ये नाइट पार्टी एवं नवरात्रि या रमजान में धार्मिक भीड़ तक सीमित है. कोर्ट ने कहा कि नदी में जब तूफान आता है तो छोटे बांध उसे रोक नहीं पाते हैं. हमें कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सख्त प्रयास करने चाहिए. हाई कोर्ट ने कहा कि दिन में भी गैर जरूरी यातायात को नियंत्रित किया जाए. जीवन रहेगा तो अर्थ व्यवस्था भी दुरूस्त हो जाएगी. विकास व्यक्तियों के लिए है. जब आदमी ही नहीं रहेंगे तो विकास का क्या अर्थ रह जाएगा. 

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बता दें कोरोना से अत्यधिक प्रभावित शहरों में लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर शामिल है. कोर्ट ने कहा कि संक्रमण फैले एक साल बीत रहा है, लेकिन इलाज की सुविधाओं को बढ़ाया नहीं जा सका. कोर्ट ने राज्य सरकार की 11अप्रैल की गाइडलाइंस का सभी जिला प्रशासन को कड़ाई से अमल में लाने का निर्देश दिया है.  कोर्ट ने 19 अप्रैल को डीएम व सीएमओ प्रयागराज को कोर्ट में हाजिर रहने का भी निर्देश दिया है. कोर्ट ने कंटेनमेंट जोन को अपडेट करने तथा रैपिड फोर्स को चौकन्ना रहने का निर्देश दिया है, साथ ही कहा है कि हर 48 घंटे में जोन का सेनेटाइजेशन किया जाए. 

यूपी बोर्ड की आनलाइन परीक्षा दे रहे छात्रों की जांच करने पर बल दिया जाए, कोर्ट ने एसपीजीआई लखनऊ की तरह स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में कोरोना आईसीयू बढ़ाने व सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने राज्य व केन्द्र सरकार को ऐन्टी वायरल दवाओं के उत्पाद व आपूर्ति बढ़ाने के लिए कहा है. साथ ही कहा है कि जरुरी दवाओं की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग करने वालों से सख्ती से निपटा जाए. 

 

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