इंडियन कोरोना वैरिएंट पर असरदार हैं कोविशील्ड और कोवैक्सीन, भारतीय वैज्ञानिक का दावा

सार्स कोव-2 के B.1.617 वैरिएंट पर की गई स्टडी से पता चलता है कि ये दोनों ही वैक्सीन इस पर असरकारक है और वैक्सीनेशन के बाद बीमारी होने पर लक्षण बहुत ही मामूली होते हैं. B.1.617 को 'डबल म्यूटेंट' और 'इंडियन स्ट्रेन' कहा जा रहा है.

Advertisement
संक्रमण के बीच वैक्सीन को लेकर ऐसी खबर राहत देती है. (फाइल फोटो-PTI) संक्रमण के बीच वैक्सीन को लेकर ऐसी खबर राहत देती है. (फाइल फोटो-PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST
  • दोनों वैक्सीन B.1.617 को बेअसर करने में कारगर
  • वैक्सीनेशन के बाद संक्रमित होने पर मामूली लक्षण

देश में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच राहत की खबर आई है और वो ये कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन कोरोना वायरस के इंडियन स्ट्रेन पर असरदार है. ये दावा काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च (CSIR) के तहत आने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (IGIB) के डायरेक्टर अनुराग अग्रवाल ने किया है. उनका दावा है कि भारत में इस्तेमाल हो रही कोविशील्ड और कोवैक्सीन कोरोना वायरस के 'इंडियन स्ट्रेन' पर असरदार है. फिर भी अगर वैक्सीनेशन के बाद आप संक्रमित हो जाते हैं, तो आपको सिर्फ 'मामूली लक्षण' ही दिखेंगे. आपकी स्थिति इतनी गंभीर नहीं होगी कि आपको अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़े.

Advertisement

भारत में कोरोना के मामलों में आई तेजी के पीछे इंडियन वैरिएंट B.1.617 को ही जिम्मेदार माना जा रहा है. ऐसे में वैक्सीन को लेकर किया गया ये दावा राहत देता है. अनुराग अग्रवाल ने ट्वीट कर बताया कि सार्स कोव-2 के B.1.617 वैरिएंट पर की गई स्टडी से पता चलता है कि ये दोनों ही वैक्सीन इस पर असरकारक है और वैक्सीनेशन के बाद बीमारी होने पर लक्षण बहुत ही मामूली होते हैं. B.1.617 को 'डबल म्यूटेंट' और 'इंडियन स्ट्रेन' कहा जा रहा है.

इसके अलावा CSIR के अंतर्गत आने वाले हैदरबादा स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) की स्टडी में भी ये बात सामने आई है कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों ही वैक्सीन B.1.617 वैरिएंट के खिलाफ प्रोटेक्शन देने में सक्षम हैं. CCMB के डायरेक्ट राकेश मिश्रा ने पिछले दिनों ट्वीट कर बताया था कि शुरुआती नतीजों में सामने आया है कि कोविशील्ड B.1.617 वैरिएंट के खिलाफ कारगर है. 

Advertisement

B.1.617 वैरिएंट में तीन नए स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन हैं. इनमें से दो म्यूटेशन E484Q और L452R एंटीबॉडी आधारित न्यूट्रलाइजेशन के लिए हैं. तीसरा म्यूटेशन P681R वायरस को कोशिकाओं में दाखिल होने देता है और यही उसको सबसे खतरनाक बनाता है. देश में महाराष्ट्र और दिल्ली में B.1.617 वैरिएंट मिला है और इसी ने दूसरी लहर को इतना खतरनाक बनाया है.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »