2 साल के बच्चों पर भी कोवैक्सीन का ट्रायल! भारत बायोटेक कर रही तैयारी

विवादों के बीच भारत बायोटेक कोरोना से लड़ाई में एक और कदम आगे बढ़ने जा रही है. कोवैक्सीन का ट्रायल अब 2 साल की उम्र के बच्चों पर भी किया जाएगा.

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प्रतीकात्मक फोटो (PTI) प्रतीकात्मक फोटो (PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST
  • भारत बायोटेक कर चुकी है 12 साल के बच्चों पर ट्रायल
  • अब दो साल के बच्चों पर भी कोवैक्सीन के ट्रायल की तैयारी

स्वदेशी कोरोना वैक्सीन 'कोवैक्सीन' को लेकर एक तरफ जहां बयानबाजी हो रही हैं, सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस वैक्सीन को तैयार करने वाली कंपनी भारत बायोटेक कोरोना से लड़ाई में एक और कदम आगे बढ़ने जा रही है. कोवैक्सीन का ट्रायल अब 2 साल की उम्र के बच्चों पर भी किया जाएगा. विवादों के बीच सोमवार को भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर कृष्णा एला ने ये जानकारी दी. 

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इससे पहले भारत बायोटेक अपनी वैक्सीन का ट्रायल 12 साल की उम्र के बच्चों पर भी कर चुकी है. बता दें कि कोवैक्सीन पहली ऐसी वैक्सीन है जिसका ट्रायल बच्चों पर शुरू किया गया था. टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर कृष्णा ने बताया, ''अब हम 2 से 15 साल की उम्र के बीच वाले बच्चों पर क्लिनिकल ट्रायल की योजना बना रहे हैं. इसके लिए हम अपना प्रस्ताव जल्द ही एक्सपर्ट कमेटी के सामने रखेंगे.'' डॉक्टर कृष्णा ने पोलियो टीके का उदाहरण भी दिया. 

गौरतलब है कि भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन ICMR और NIV के साथ मिलकर तैयार की है. ये पहली वैक्सीन है जिसका सितंबर में ही बच्चों पर ट्रायल किया गया था. कोवैक्सीन के फेज-2 ट्रायल में कुल 380 लोग थे, जो 12 से 65 साल की उम्र के बीच के थे. जबकि दुनिया की दो मशहूर कंपनी फाइजर और मॉडर्ना ने 12 साल की उम्र के बच्चों पर अक्टूबर और दिसंबर में ट्रायल किया. यानी भारत बायोटेक के बाद.

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अब भारत बायोटेक ने एक और कदम आगे बढ़ते हुए 2 साल की उम्र के बच्चों को भी ट्रायल में शामिल करने की योजना बना रही है. कंपनी ये सब ऐसे वक्त में कर रही है जबकि उसकी वैक्सीन के अप्रूवल को लेकर ही विवाद खड़ा हो गया है. 

दरअसल, DCGI ने सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार ऑक्सफोर्ड की कोविशील्ड वैक्सीन को मंजूरी के साथ ही भारत बायोटेक की पूर्ण रूप से स्वदेशी वैक्सीन को भी इमरजेंसी इस्तेमाल का ग्रीन सिग्नल दे दिया है. लेकिन सवाल ये उठाए जा रहे हैं कि जब कोवैक्सीन का तीसरे फेज का ट्रायल ही पूरा नहीं हुआ तो ऐसी जल्दबाज़ी क्यों की गई.

बता दें कि कोवैक्सीन के पहले और दूसरे चरण में 800 लोगों पर ट्रायल हुआ था. तीसरे चरण में साढ़े 22 हज़ार लोगों पर परीक्षण करने का दावा किया गया है लेकिन फाइनल नतीजा क्या रहा, इसका कोई आंकड़ा नहीं है.


 

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