AI को लेकर 99% बॉस बोले- होगी छंटनी, सबसे ज्यादा लपेटे में आएंगे ऐसे कर्मचारी

AI Layoffs Survey: कंपनियां जूनियर कर्मचारियों की भर्ती को लेकर अपने प्लान बदल रही हैं. एक साल के भीतर उन कंपनियों की संख्या 17 फीसदी से बढ़कर 43 फीसदी हो गई है, जिन्होंने जूनियर पदों में कटौती की है.

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AI की वजह से एंट्री लेवल जॉब सबसे ज्यादा खतरे में. (सांकेतिक तस्वीर: Pexel) AI की वजह से एंट्री लेवल जॉब सबसे ज्यादा खतरे में. (सांकेतिक तस्वीर: Pexel)

आदित्य के. राणा

  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:42 AM IST

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल काम आसान करने का टूल नहीं रह गया है. एक नई ग्लोबल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले दो साल में AI की वजह से नौकरियां जाने की आशंका बेहद बढ़ गई है और इसका सबसे बड़ा असर करियर की शुरुआत कर रहे युवाओं पर पड़ सकता है.

दरअसल, दुनिया भर के बिजनेस लीडर्स AI को प्रोडक्टिविटी बढ़ाने वाले टूल के तौर पर नहीं, कर्मचारियों की संख्या घटाने वाले हथियार के रूप में भी देखने लगे हैं. ग्लोबल HR और कंसल्टिंग फर्म Mercer की ताजा Global Talent Trends Report के मुताबिक 99 फीसदी से ज्यादा एग्जीक्यूटिव्स का मानना है कि अगले दो साल में AI की वजह से किसी ना किसी स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी होगी. रिपोर्ट के लिए दुनियाभर के करीब 12,000 एग्जीक्यूटिव्स, HR लीडर्स और कर्मचारियों से बातचीत की गई.

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युवा कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खतरा!
रिपोर्ट के मुताबिक AI का सबसे बड़ा असर एंट्री-लेवल और करियर की शुरुआत करने वाले कर्मचारियों पर पड़ सकता है. दरअसल, जिस कामकाज को नए कर्मचारी सीखने और अनुभव हासिल करने के लिए करते थे, उनमें से कई काम AI आसानी से कर सकता है. यही वजह है कि कंपनियां जूनियर कर्मचारियों की भर्ती को लेकर अपने प्लान बदल रही हैं. एक साल के भीतर उन कंपनियों की संख्या 17 फीसदी से बढ़कर 43 फीसदी हो गई है, जिन्होंने जूनियर पदों में कटौती की है. 22 से 27 साल की उम्र के प्रोफेशनल्स को सबसे ज्यादा जोखिम वाले वर्ग में माना जा रहा है.

अधूरी तैयारी के बीच AI की तेज रफ्तार
दिलचस्प बात है कि कंपनियां तेजी से AI को अपनाने में जुटी हैं, लेकिन ज्यादातर संगठन अभी इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. सर्वे के मुताबिक, केवल एक-तिहाई कंपनियों को ही भरोसा है कि वो इंसानों और AI के बीच प्रभावी तालमेल बनाकर काम कर सकती हैं. यानी कई कंपनियां पहले AI लागू कर रही हैं और बाद में ये सोच रही हैं कि कर्मचारियों की भूमिका क्या होगी. 

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AI से छंटनी, क्या फायदा होगा?
AI की वजह से नौकरी कटौती बढ़ रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनियों को हमेशा फायदा ही होगा. एक और रिसर्च के मुताबिक, जिन कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की संख्या घटाई, उन्हें जरूरी नहीं कि बेहतर मुनाफा या ज्यादा प्रोडक्टिविटी मिली हो. कई मामलों में AI से अच्छा नतीजा तब मिला, जब तकनीक का इस्तेमाल कर्मचारियों को रिप्लेस करने के बजाय उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए किया गया.

AI के नाम पर बढ़ रही छंटनी
2026 में AI भविष्य का खतरा नहीं, मौजूदा हकीकत बन चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक अकेले अप्रैल 2026 में अमेरिका में करीब 21,500 नौकरियां ऐसी थीं जिनकी कटौती के पीछे AI एक प्रमुख वजह था. ये उस महीने हुई कुल छंटनी का लगभग 26 फीसदी हिस्सा था. 2026 में अब तक AI से जुड़ी 49 हजार से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं, जो 2025 के आंकड़े के लगभग बराबर है. Meta, Oracle, Salesforce और Block जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी AI आधारित री-स्ट्रक्चरिंग और ऑटोमेशन के नाम पर कर्मचारियों की संख्या घटा चुकी हैं.

कर्मचारियों के सामने बड़ी चुनौती?
जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सबसे ज्यादा मांग उन स्किल्स की होगी जो AI के साथ मिलकर काम कर सकें. यानी AI से मुकाबला करने की जगह AI का इस्तेमाल करना सीखना ज्यादा जरूरी होगा. फिलहाल एक बात साफ है कि AI केवल टेक्नोलॉजी की कहानी नहीं रह गया है. ये नौकरी, भर्ती, करियर और भविष्य की कार्यशैली को बदलने वाली सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. ऐसे में आने वाले दो साल तय करेंगे कि AI कर्मचारियों के लिए खतरा साबित होता है या फिर नए मौकों का दरवाजा खोलता है.

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